विराट गंगा का विराट मन – गंगा दशहरा पर विशेष 2

गंगा को क्रोध भी आता है। जब वह असंख्य ग्रामों को निगल जाती हैं। जब कोसों तक खेत जलमग्न हो जाते हैं, पर गंगा का क्रोध बहुत जल्द शांत हो जाता है। उस समय। गंगा फिर से खुश नज़र आती है। लोकमाता गंगा को सचमुच इसी तरह खुश रहना चाहिए। आज भी देश की अधिकांश […]

संस्कार की सांस गंगा धर्म की विश्वास गंगा

गंगा दशहरा पर विशेष–1 हमारा देश भारत और माँ गंगा एक दूसरे से उसी प्रकार जुड़े हैं जैसे प्राण से शरीर। गंगा गोमुख से निकलकर 2525 किलोमीटर की जो संस्कारवादी संस्कृति की रेखा खिंचती हैं, वह अद्भुत  है। निर्गुण सन्त कबीर के ‘निराकार’ राम से लेकर सगुण सन्त गोस्वामी तुलसीदास के ‘नराकार’ राम का इतिहास […]

कश्मीर के बहार का इंतज़ार – मिलिए कश्मीर से

-किस्सों में बीत जाते थे हाड़ कँपाऊ चालीस दिन-बहार के मौसम में चिनार के पत्तों की खनक करती है हलचल आजकल फिर कश्मीर में सियासी हलचल बढ़ गई है। एक दो दिन में प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। सुनने में आ रहा है कि कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का अधिकार मिलने वाला […]

यादों की आलमारी में सज गए मिल्खा सिंह

-कोरोना से हुआ निधन -याद आता है कामनवेल्थ गेम्स का उद्घाटन समारोह आँख खुलते ही पहली खबर आज़ाद भारत के पहले सितारे के बुझ जाने की मिली। मिल्खा सिंह आज़ाद भारत के पहले सितारे थे जिन्होंने दुनिया के सीने पर तिरंगा लहराया था। जिनकी दौड़ ने दुनिया को खड़े होकर जन गण मन करने पर […]

तू खुद अमिट निशानी थी – महारानी अमरत्व दिवस

दुनियाभर के महान लोगों के इतिहास में केवल दो ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने अपने जीवन को नहीं बल्कि मौत को डिज़ाइन किया। वो दो नाम हैं मणिकर्णिका राव (महारानी लक्ष्मीबाई) और दूसरा सरदार भगत सिंह संधू। इनदोनों ने अपनी 23 साल के जीवनकाल में जो किया वो तो शायद कोई याद नहीं करता लेकिन इनकी […]

प्रकाशनार्थ 

वाराणसी: रवींद्रपुरी स्थित गोपी राधा गर्ल्स इंटर कॉलेज में एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स फोरम – भारत के पूर्वी उत्तर प्रदेश सम्मेलन को रविवार फोरम के मुख्य संरक्षक डॉ विजय चौथाईवाले जी ने सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान माननीय प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत होने का महामंत्र दिया उससे देश में उद्यमिता को […]

*जो बाग़ी न हो वो ईश्क़ नहीं*

वेलेंटाइन स्पेशल————– प्यार के साथ विद्रोह ऐसे ही जुड़ा है जैसे दिन के साथ उजाला, रात के साथ अंधेरा। जो बाग़ी न हो वो ईश्क नहीं है। जो दुनिया से डर जाए वो ईश्क नहीं है। जो जंजीरों में बंध जाए वो ईश्क नहीं है। जावेद अख्तर कहते हैं कि अब अगर आओ तो जाने […]

वादाशिकन होना ही ईश्क़ का सबब

प्रॉमिस डे पर ईश्क़ की बुनियाद वादों और विश्वास पर बननी शुरू होती है। दुःख यह है कि ईश्क़ की पूर्णता वादाखिलाफी या वादाशिकन होकर ही होती है। वो ईश्क़ ही क्या जिसमें कशिश बाक़ी न रहे। कोई रोता न रहे। मन पुराने दिनों को याद करके रोने लगे कि हमने किसी और की खुशी […]

ज़रा याद उन्हें भी कर लें….. चौरी चौरा के सौ बरस

-स्व0 रामधारी मिश्र का ऐतिहासिक बगीचा जहाँ खींचा गया था आज़ादी का ख़ाका आज हमारे देश के इतिहास में एक और अध्याय की शताब्दी होने जा रही है। देखने में यह एक दिन घटना थी। बहुत छोटी घटना थी। बहुत छोटे जगह की घटना थी। लेकिन उस घटना ने देश के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक […]

भाजपा के बड़प्पन की मजबूरी

बिहार चुनाव : एक विश्लेषण बिहार चुनाव के परिणाम इस बार कई मायनों के साथ बेहद महत्वपूर्ण शक्ल लिए सबके सामने आए हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत में एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रॉक स्टार की तरह देखा जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर बिहार में चेहरा बने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार […]