दोस्ती में चाय की मिठास भूल नहीं पाओगे

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फ्रेंडशिप डे स्पेशल -1

-दोस्ती से ईश्क़ तक का पूरा पैकेज है चाय की चुस्की

चाय! यह शब्द सुनते ही आपके मन में चाय की खुशबू फैल गई होगी दोस्तों है ना! आप जब भी चाय पीते हैं तो जैसे आपके मन में उसके प्रति एक अपनेपन की भावना जाग जाती है। चाहे आप किसी भी उम्र के हों लेकिन फिर भी आजकल चाय पीना हर किसी का जैसे शौक बन गया है। शौक से ज़्यादा अपनेपन का धागा बन गया है। दोस्ती का पहला पड़ाव चाय ही होती है। अब वो दोस्ती अगर कुछ महीनों में मोहब्बत या ईश्क़ की शक्ल लेने वाली होती है तो चाय का किरदार और भी संजीदा हो जाता है।

चाय! यह शब्द सुनकर ही आपको कहीं chai की तलब ना लग जाए दोस्तों! हमारे जीवन में चाय का महत्व ही उतना है, जितना किसी पेड़ को सूरज की आवश्यकता होती है। जैसे सूरज की किरणों के बिना पेड़ की पत्तियां मुरझा जाती है।

ठीक उसी तरह चाय की लत लगे हुए इंसान को चाय के बिना दिन भी अधूरा सा लगता है। और जब यह चाय आपके महबूब के हाथों से बनी हुई हो, तो उसे तो आप बिना शक्कर की भी पी लोगे! सच कहा ना दोस्तों?

आपको अपने दिलबर के साथ, कहीं दूर जाते हुए, और बारिश में भीगते हुए, रास्ते के किनारे पी हुई चाय शायद याद आ रही होगी। उस चाय की मिठास आज तक आपके लबों पर बनी हुई है। क्योंकि वह चाय आपके लिए कुछ खास थी. उसी चाय के साथ आप का दिलबर आप पर फिदा हो गया था। उसी चाय के साथ आपने, अपने यार से प्यार भरी बातें की थी।

आप जब भी किसी के घर जाते हो या फिर आपके घर कोई मेहमान आता है तो उसे सबसे पहले बस चाय के लिए ही पूछा जाता है। और जब भी आपको कोई चाय के लिए पूछता है तो जैसी आपकी दिल की ही बात कर दी है इस प्रकार आपको प्रतीत होता है।

दिलबर के हाथ की चाय!

वैसे तो आपको पता होगा कि चाय की खोज भारत में नहीं हुई थी। लेकिन आज इस बात में कोई शक नहीं है कि दुनिया में सबसे ज्यादा चाय पीने वाले लोग भारत के ही हैं। यहां चाय कोई पेय पदार्थ नहीं बल्कि चाहत का सबब है। चाय से चाह बढ़ती है। तो आइए दोस्तों, इसी चाय, दोस्ती, और मोहब्बत के किस्मत कनेक्शन की गुत्थी को समझने की कोशिश करते हैं।

उसी चाय की बदौलत आपका महबूूूब आपके साथ समय बिताने के लिए तैयार हो गया था। और आज भी वही चाय आपको अपने महबूब के साथ कुछ प्यार भरे पल बिताने पर मजबूर करती है। कितने संजोग की बात है ना! चाय तो एक ही है। उसे पीते वक्त आपके दिल में आ रही भावनाएं भी वहीं हो सकती है। आपका यार भी वही होता है। बस वक्त बदल जाता है। शायद उस बदलते वक्त के साथ चाय का अंदाज बदल गया हो।

जब महबूबा चाय बनाती है, तो वह उसमें जैसे जान डाल देती है..

जब हाथ में चाय का प्याला होता है तो अक्सर वो लोग अधिक संजीदा हो जाते हैं जिन्हें ईश्क़ ने अपने आगोश में कभी न कभी लिया था। वो चाय पीते हुए कभी अपने प्याले को देखते हैं, तो कभी बीते हुए दिन को याद करते हुए आहें भरते हैं। कभी किसी अपने यार को प्यार की बात सुनाते हैं। तो कभी अपनी महबूबा के हाथों की बनी वो चाय का स्वाद ख्यालों में लेते हैं जिसे बनाने के लिए वो अपना मन भी मिला देती थी।

आपके यार की और आपकी मुलाकातें आपको बहुत याद आती है। आप जब भी मिलते थे तो अपने दिलबर को चाय पर जरूर ले जाते थे। और आपकी महबूबा को भी तो चाय पीना बहुत पसंद होता है। इसी वजह से आप हमेशा बस उन्हें ही अपने प्यार की दास्तां सुनाने के लिए बुलाते हो, जिन्हें चाय पीना आता है। वो लोग तो सबसे बुज़दिल होते हैं जो ये कहते हैं कि मैं चाय बिल्कुल भी नहीं पीता/पीती।

आपका और उनके प्यार का बाहर मिलते मिलते ही एक अजीब सा नया रिश्ता जुड़ चुका है। और इसी रिश्ते में एक खुशबू और मिठास मिल गई है। थोड़ी सी तो अब आप हरदम याद करते हुए अपनी माशूका को सपनों से बाहर, अपनी बाहों में बुलाते रहते हो।

और जब भी वह आपके सामने आपके आपसे प्यार भरी मीठी बातें करती है, तो आपका मन खुशियों से भरा महसूस होता है। और यही एहसास आप अपने दिलबर को हमेशा देना चाहते हो।

झूठी चाय की अलग मिठास..

आपको अपने दिलबर पर कभी-कभी हद से ज्यादा प्यार आ जाता है। और आप उससे प्यार जताने के लिए बस एक कप चाय की भी मांग कर सकते हो। और जब वह अपने प्यारे हाथों से आपके लिए चाय बना भी दे, तो भी आपका दिल उससे नहीं भरता। और आप एक और नई मांग खड़ी कर देते हो। और इस मांग से तो शायद आपका महबूब भी शर्म से चूर चूर हो जाएगा।  क्योंकि आपकी तमन्ना ही कुछ ऐसी होती है। आप उन पर बेहद खुश होते हो और इस वजह से उन पर अपना प्यार बरसाना चाहते हो। इसके लिए आप उनके साथ बिताया कोई भी पल, कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहते। और इसी वजह से आप उनके सामने एक इच्छा रखते हो।

भले ही उन्होंने चाय में अच्छी तरह से शक्कर मिलाकर मीठी चाय बनाई हो। लेकिन फिर भी आपका शरारती दिल उनकी हाथ से बनी मीठी चाय में और मिठास जोड़ना चाहता है। एक और शरारत करना चाहता है। इसलिए आप उनसे यह गुजारिश करते हो, कि इस चाय को और अधिक मीठा करने के लिए आप इस चाय के कप को अपने होठों से लगा लो। और एक घूंट पीकर इसे झूठा कर दो। इसके बाद आप इस चाय के कप को मेरे हवाले कर दो। तब जाकर ही मेरे दिल को तसल्ली होगी। मुझे मीठी चाय पीने का अनुभव आएगा!

अब तो यही ख्वाहिश है की तुम्हारे हाथों की चाय पीता रहूं और यूं ही खुशी से जीता रहूं..

अपनी महबूबा के हाथों से बनी चाय हो या हर एक बात बहुत प्यारी लगती है। उससे हमेशा आप इस बारे में कुछ ना कुछ बनाने के लिए जरूर कहते रहते हैं।
ऐसी प्यारी और दिल से दिल लगाने वाली महबूबा से जुड़ी हर एक बात आपको हर दम याद आती है। उससे जुड़ी हर एक बात आपको हमेशा पसंद होती है। फिर चाहे वह उसकी हवा में लहराती हुई बालों की लट हो या फिर आंखों में लगाया हुआ है सुरमा हो।

किसी वजह से आपके दिल में बस यही ख्वाहिश रहती है कि जब भी आप नींद से जागे तो अपनी महबूबा के हाथों से बनी चाय ही पियें और कोई आपको प्यार में अपने रहने का ठिकाना पूछे, तो आप हर वक़्त बस एक उसी के दिल का पता दे सकें।

अब तो यही ख्वाहिश है की तुम्हारे हाथों की चाय पीता रहूं और यूं ही खुशी से जीता रहूं..

अपनी माशूका के लिए आपके दिल में आप इतना प्यार उमड़ कर आ रहा है कि आप उन्हें बता नहीं सकते। उसे तो बस आप उनके सामने बैठ कर जताने की ही इच्छा रखते हो। और शायद आपकी महबूबा को भी यही बात पसंद आती है और रास भी आती है।

और इसी वजह से आपके दिल में अब हमेशा यही ख्याल आ रहा है कि आप हरदम उन्हीं की आंखों में बस जाओ। और पूरी तरह से उन्हीं की हो जाओ। जिस तरह से आपकी महबूबा चाय बनाते हुए उसमें लौंग, इलाइची, और अन्य प्रकार के मसालों का मिश्रण डालती है। और इस तरह से चाय में यह सारी चीजें घुलमिल जाती हैं और उस चाय को एक नया और अलग सा स्वाद मिल जाता है। यहां कबीर की बातें याद आती हैं। “सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि” मतलब हरि और मैं जब मिल जाते हैं तो सब ब्रह्म हो जाता है। उसी तरह चाय भी है। जब उसमें सब कुछ मिल जाये और उसके साथ प्रेम का प्रेजेंटेशन हो तो सिर्फ चाय की मोहब्बत ही याद रहती है। बस उसी प्रकार आप अपने यार के होना चाहते हो। उन्हीं के प्यार में अपना सब कुछ खो देना चाहते हो। और उन्हें भी तो आपके साथ कुछ वक्त गुजारने के लिए मिल जाए तो वह खुद को बहुत खुशनसीब महसूस करते हैं।

आप उनके दिल में कुछ इस तरह से बस जाना चाहते हो, जैसे चाय घुल जाती है..

उफ्फ़,
ये तुम जो चाय बनाती हो..
जैसे उसमें अपनी मुलाकातें ही मिला देती हो…

तुम्हारी हाथों की चाय के सिवा
मेरा कोई सवेरा ना हो..

एक तुम्हारी आँखों के सिवा 
मेरा कहीं और बसेरा ना हो…

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