यादों की आलमारी में सज गए मिल्खा सिंह

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-कोरोना से हुआ निधन
-याद आता है कामनवेल्थ गेम्स का उद्घाटन समारोह

आँख खुलते ही पहली खबर आज़ाद भारत के पहले सितारे के बुझ जाने की मिली।

मिल्खा सिंह आज़ाद भारत के पहले सितारे थे जिन्होंने दुनिया के सीने पर तिरंगा लहराया था। जिनकी दौड़ ने दुनिया को खड़े होकर जन गण मन करने पर मजबूर कर दिया था।

मिल्खा सिंह के बारे में इंटरनेट पर लाखों रिजल्ट मिलते हैं। उनसे उनके जीवन के संघर्ष के बारे में जाना जा सकता है। लेकिन उनके जाने की खबर मुझे व्यक्तिगत रूप से झकझोरा है। कभी कभी किसी इंसान का कद आजीवन फैसिनेट करता है। मिल्खा सिंह जी से मिलने के बाद उनकी जिंदादिली को नजदीक से देखने का मौका मिला था। उनके दिल में हमेशा हिंदुस्तान ही धड़कता रहा।

बात दिल्ली में आयोजित कामनवेल्थ गेम्स के समय की है। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेल का उद्घाटन होना था। उस दौरान दिल्ली में एक संस्थान के अंतर्गत ट्रेनिंग का मौका मिला। उस दिन हमारे खेल सम्पादक वहां नहीं जा सके थे तो हमें भेजा गया।

हमलोग मीडिया कॉरिडोर में बैठे थे। हमारे साथ हमारे मित्र खेल पत्रकार सुनील दुबे थे। उधर मंच पर भारत की महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल कामनवेल्थ की बैटन लेकर शुभंकर की ज्योति जलाई और ‘लेट्स the गेम बिगिन’ बोला।

हमलोग उस हसीन मंज़र को देख आंखों और कैमरों में कैद कर रहे थे। तभी सुनील के कंधों पर एक बुजुर्ग सा हाथ आया। …और सुनील बरखुरदार… रिपोर्टिंग हो रही है..? हमने पीछे देखा तो आज़ाद भारत के पहले सितारे खुद मिल्खा सिंह सामने खड़े थे। हमने बनारस के संस्कार के तहत उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया। सुनील ने मिल्खा पा जी से हमारा परिचय कराया। पा जी ये अभिनव है, बनारस से आया है। हमारा हाथ जुड़ा हुआ ही था। देश के पहले सितारे को देखकर अभिभूत होने की अनुभूति हो रही थी।

मिल्खा सिंह ने कहा कि यार तुम बनारस वाले बहुत मैनर्स दिखाते हो। यार….दोस्तों को हाथ नहीं जोड़ा जाता। मेरी उमर चाहे जितनी हो, मैं आज भी गोल्ड जीत सकता हूँ और तिरंगा लहरा सकता हूँ। इसीलिए हमलोग हाथ नहीं जोड़ते बल्कि हाथ मिलाते हैं और गले मिलते हैं।

मिल्खा सिंह ने हमदोनों को तुरन्त गले लगा लिया। उन्होंने कहा कि भाई तुम लोगों के पास बैठने में बहुत मज़ा आता है। तुमलोग भी मेरी तरह हमेशा दौड़ते रहते हो। और तो और दौड़ना हमदोनों की मजबूरी भी है..! क्यों..!

हमने उनकी बात का मुस्कुराते हुए हाँ में जवाब दिया। बड़े लोग दिल से भी बड़े होते हैं। उद्घाटन समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होने लगीं। मिल्खा सिंह ने कहा कि तुमलोग सुबह से आये होगे..? और एक्सक्लुसिव के चक्कर में कुछ खाया भी नहीं होगा..? क्यों..? हमने कुछ बोला नहीं लेकिन हमारी मौन स्वीकृति भी थी।

वो बोले चलो हमारे साथ। हमने कहा पा जी, कहाँ चलेंगे.! यहां कवरेज का क्या होगा..? उन्होंने कहा आओ पहले तुम्हारी प्रॉब्लम सॉल्व करवाता हूँ। वो हमें लेकर पी आर सेल लेकर गए। वहाँ से प्रेस रिलीज़ दिलाई। अब हमारे पास पूरी न्यूज़ सबसे पहले आ गयी थी।

उसके बाद वो हमें प्लेयर्स कैंटीन में लेकर गए। वहां हमारे लिए उन्होंने दिल्ली के खास छोले कुलचे और केले के पराठे लिये। कॉफी लाई। वो खुद हमलोगों के लिए सर्व किये। हम एकदम शांत बड़े इंसान का बड़प्पन देख रहे थे। सुनील ने कहा कि पा जी ऐसे ही हैं। ये शुक्र है कि उस समय कोरोना नहीं था। अगर होता तो भी पा जी रुकने वाले नहीं थे। वो हमारी ही प्लेट में हमारा साथ देने लगे। हमारे साथ वो भी खाए।

खाने के बाद वो बोले चल भाई अब एक्सक्लुसिव की बारी है। ये कहकर हमें अपने साथ आने को कहा। हम उनके साथ चलने लगे। वो वीआईपी जोन में जाने लगे। और एक कमरे में चले गए। हमें भी बुलाया। अंदर हमारी एक्सक्लुसिव न्यूज़ थी। कमरे में उन्होंने हमारी मुलाकात ऑस्कर विजेता ए आर रहमान से करवाई।

उस दिन ए आर रहमान ही उद्घाटन समारोह का मुख्य और सिग्नेचर सॉन्ग गाने वाले थे। मिल्खा सिंह ने एक घण्टे तक हमारी वार्ता करवाई। हमने वहीं से लाइव एक्सक्लुसिव वार्ता की। उसके बाद हम फिर अपने कॉरिडोर में आ गए। मिल्खा सिंह ने कहा कि ये सब तो ठीक है दोस्तों, लेकिन मत भूलो कि ये कॉमन वेल्थ गेम है। यहाँ खिलाड़ियों से बात करना। अगले जितने भी दिन आना तो खिलाड़ियों से मिलना, मैं तुमलोगों को देश भावी मेडेलियन्स से मिलवाऊंगा। इसी कड़ी में उन्होंने एक दिन बॉक्सर विजेंदर और सुशील कुमार से भी मिलवाया था।

हमने कहा पा जी आप भी तो हमारे लिए एक्सक्लुसिव हो। आप अपना इंटरव्यू कब देंगे। उन्होंने कहा कि अब आने वाले फूलों की बारी है। हमने जो किया सो किया। अब इनकी बारी है। हम प्रेरणा दे सकते हैं लेकिन मेडल तो इनको ही लाना है, न..!

आज जब सुबह की शुरुआत मिल्खा सिंह जी के जाने की खबर से हुई, तब से मन व्यथित है। हमारा इंटरव्यू अब तक अधूरा सा लगता है। मन को मसोस कर रह जाते हैं कि आखिर हमने क्यों नहीं उनका भी इंटरव्यू लिया।

अलविदा हमारे पा जी। हमारे पहले सितारे।

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