यादों के मेटाफर्स की बारिश

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-बरसात अपने साथ लाती है यादों की बारात
-हर एक की ज़िंदगी में बारिश की दस्तक होती है अहम

आजकल बारिश का माहौल है। कुछ शब्दों की भी बारिश होनी चाहिए।

ये बारिश अपने आपमें कई मेटाफर्स को समेटे हुए आती है।

कोई खुश होता है। तो कोई रोता है। किसी के लिए बारिश खुशियों और आनंद की बहार लेकर आती है तो कोई बारिश की हर बूँद में अपने जीवन के सुखद पल को याद करते हुए मन को भिगोता है।

वियोगी के लिए बारिश विरह की आग होती है। योद्धा के लिए खून, शायर के लिए महबूब के आँसू होते हैं।

चलिए आज बारिश की ही बात करते हैं।

अपनी बात से बात शुरू करते हैं। हम और ईशान बीएचयू में बीए सेकेंड ईयर में थे। यही जुलाई का महीना था। ईशान उस समय सिविल की तैयारी में लगे थे। शाम को क्लास सलटाकर घर लौटे। उस समय मेरे घर तक बाइक नहीं जा पाती थी। इसीलिए ईशान ने अपनी बाइक थोड़ी दूर गली में खड़ी कर दी। उसी समय कुछ शैतान बच्चों ने उस बाइक की key hole में लकड़ी डालकर फँसा दी। दिन ढल गया था।

हमलोगों का प्लान था कि घर पर बैग रखकर फिर लंकेटिंग करने निकलेंगे। लेकिन गाड़ी के साथ दिक्कत हो गयी। तय हुआ कि चलो बगल में ही मनीष भगत रेंट पर रूम लेकर रह रहा है, उससे बाइक माँगते हैं। उसकी बाइक से ईशान हमें छोड़ते हुए अपने घर निकल जायेगा। फिर सुबह बाइक बनवाया जाएगा।

हमलोग मनीष की बाइक लिए। जैसे ही उसके रूम से सड़क पर आए तो गज़ब की बारिश शुरू हो गई। हमने कहा कि जल्दी चलो नहीं तो भीग जाएंगे। तो ईशान गुरु का अलमस्त जवाब था कि अब तो लंकेटिंग बहुत जरूरी हो गया है। उसने कहा कि चलो पहिले लंका रोल वगैरह खाते हैं। कितनी मस्त बारिश हो रही है, घरवा जा के का करबा..! हमने कहा कि करब त कुछो नाही, चला रोल खायल जाए। फिर कुछ देखल जाई।

हमारा कारवाँ भीगते हुए लंका गया। जो खाना था खाया गया। फिर रात आठ बजे तक बीएचयू में चक्कर मारा गया। बारिश अपने जवानी पर थी। हमलोग भीगे, और खूब भीगे।
हो गई अपनी बात। अब बात बारिश की..!

बारिश.! बादलों की गरज, बूँदों की टपकन.! बारिश हमारे जीवन और हमारे वातावरण में सबसे अहम किरदार है। वास्तव में ये प्रकृति के अद्भुत अजूबों में से एक है।

चाहे मौसम फल देने वाली वसंत के आगमन का हो, या गर्मी से सर्दी के आने का सबके बीच का मजबूत पुल बारिश है। वसंत और पतझड़ से लेकर परिवर्तन की सर्द हवाओं तक हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रही है। ये बारिश मौसमी जादू के पीछे घूमने वाली जादू की छड़ी है।

बारिश की हर बूँद कुछ भूले हुए बरसात के दिनों की यादें जगा देती है। वो यादें जो अब हमारे दिलों को झकझोर देती हैं। और फिर हमारी आँखों को नम कर देती हैं। लेकिन इन अनगिनत बूंदों, इन बेनाम यादों को कोई कैसे बताए? अगर हर एक याद वर्षा की बूँद है, तो प्रत्येक का एक नाम होना चाहिए, क्यों, है न?

खैर, अगर ऐसा है तो साहित्य निश्चित रूप से आपकी बरसात की हर याद को सार्थक साबित हो सकता है।

हम सभी की तरह कवि भी बारिश को मानते हैं। किसी के लिए यह बारिश आँसू के समान है। दूसरे के लिए यह बेहतर समय की दस्तक है। लेकिन सभी के लिए ये बरसात सर्वमान्य और यादों की बारात है। 

हिंदी साहित्य, इसे आप जो चाहें कहें, दुनिया की सबसे समृद्ध भाषाओं में से एक है, यहां तक ​​कि सबसे रोज़मर्रा के भावों के लिए भी कई एक्सप्रेशन हैं। और बारिश के भी कई नाम हैं जो इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं और मनोदशाओं को बताते हैं।

यह देखते हुए कि हम सभी अपने घरों तक ही सीमित हैं, मानसून का आनंद लेने में असमर्थ हैं। तो साहित्य की छोटी सी बूंदा बांदी का आनंद कैसे लें?

कौन जानता है कि आप इसके अंत में बरसात के शब्दों की बौछार में भीग जाएंगे! 

लेकिन सभी पाठकों से एक विनम्र अनुरोध है कि कृपया हर बारिश के इन जज़्बातों को तर्क के तराजू पर मत तौलिएगा। क्योंकि बात को तर्क की कसौटी पर कसा जा सकता है लेकिन जज़्बात को बिल्कुल नहीं।

रविन्द्र जैन साहब कहते हैं कि

ईश्क़ हो जाए किसी से कोई चारा तो नहीं,
सिर्फ मुस्लिम का मोहम्मद पे इजारा तो नहीं।।

तो बस जज़्बात के साथ साहित्य के रास्ते बारिश की हर बूँद की बौछारों का आनंद लीजिए।

आइए सबसे सामान्य से शुरू करते हैं, बरिश!

बरिश  : बारिश, बौछार..

धूप ने गुज़ाइश की,
एक बूँद बारिश की।।

बारान : मूसलाधार बारिश

अगर रात कट जाए तो
खुशनसीब कहो
फ़ज़ाओं में
अंदेशा ए बाद ओ बारान भी है।।

बरसात : एक बारिश
घटा देखकर खुश हैं लड़कियाँ,
छतों पर खिले हैं फूल बरसात के।।
मेन्ह : रिमझिम बारिश

बड़ा ही ज़ोर है इस बार मेन्ह के क़तारों में,
कि पत्थरों पे भी घाव लगाए जाते हैं।।

झाला : ऐसी बरसात जो एक जगह पर और उसके ठीक पड़ोस के इलाके में बारिश का नामोनिशान न हो।

डोंगडा : हल्की बारिश
रो रहा हूँ मिस्ल ए अब्र ए बहार,
डोंगडा मेन्ह का है ना झाला है।।

वर्षा : आँधी के साथ बारिश

क्या जाने कब धरती पर सैलाब का मंज़र हो जाये,
हरदम ये मजबूर निग़ाहें वर्षा करती रहती हैं।।

तराशशोह : झिसी
बूँदा बाँदी : मतलब आप सभी समझते ही होंगे..!
फुहार : इसका भी मतलब जानते होंगे।

बूंदाबांदी यही तराशशोह है,
जैसे है आज नन्ही नन्हीं फुहार।।

बारिश के और नाम जानिए? 

कमेंट बॉक्स में उनकी बौछार करें, और सभी के साथ साझा करें!

और, यदि आप इसे बारिश के समय पढ़ रहे हैं, तो हम आपको एक गोल्डन गीत के साथ छोड़े जा रहे हैं। गाने के तराने को सुनें और……
हैप्पी रेनी डे!

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