
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। ईरान पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात से बातचीत के पश्चात अब दो और खाड़ी देशों के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साधा। उन्होंने बहरीन और सऊदी अरब के नेताओं से फोन पर चर्चा कर क्षेत्रीय हालात पर चिंता जताई।
क्षेत्रीय शांति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति वैश्विक हित में है। भारत ने हर प्रकार की हिंसा और सैन्य कार्रवाई के बजाय संवाद और कूटनीति के रास्ते को ही समाधान बताया।
भारत का रुख साफ है—किसी भी तरह का युद्ध या व्यापक संघर्ष न केवल क्षेत्र बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करेगा।
क्यों अहम है यह पहल?
मध्य पूर्व भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है:
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ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है
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लाखों भारतीय प्रवासी इन देशों में कार्यरत हैं
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व्यापार और निवेश संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं
ऐसे में तनाव बढ़ने की स्थिति में भारत के हित सीधे प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से नई दिल्ली ने तुरंत उच्चस्तरीय संपर्क साधा।
यूएई से भी हुई थी चर्चा
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व से भी बात की थी और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की थी। भारत और यूएई के बीच हाल के वर्षों में रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग तेजी से बढ़ा है।
भारत की संतुलित नीति
भारत पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया के मुद्दों पर संतुलित और व्यावहारिक नीति अपनाता रहा है। एक ओर उसके ईरान से ऊर्जा और कनेक्टिविटी के संबंध हैं, तो दूसरी ओर खाड़ी देशों और इजरायल के साथ भी मजबूत साझेदारी है।
इस परिस्थिति में भारत की प्राथमिकता है:
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तनाव कम कराना
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अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
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ऊर्जा और व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखना
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले दिनों में और भी देशों से संपर्क कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर भी शांति की अपील दोहराई जा सकती है।
भारत की कोशिश रहेगी कि स्थिति नियंत्रण में रहे और कोई बड़ा क्षेत्रीय युद्ध न छिड़े।
निष्कर्ष
ईरान हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी की त्वरित कूटनीतिक पहल यह संकेत देती है कि भारत पश्चिम एशिया की स्थिति को गंभीरता से ले रहा है। बहरीन और सऊदी अरब के साथ बातचीत से यह स्पष्ट है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
अब नजर इस बात पर होगी कि वैश्विक और क्षेत्रीय शक्तियां इस संकट को किस दिशा में ले जाती हैं।