घुसपैठियों पर होगी सख्त कार्रवाई: अमित शाह बोले– ‘3D पॉलिसी’ से तय होगा कि देश का PM-CM कौन नहीं चुन सकता

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लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हुई विस्तृत चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए घुसपैठियों के मुद्दे पर स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश की मतदाता सूची में अवैध घुसपैठियों का नाम होना लोकतंत्र की गंभीर समस्या है और इसी कारण सरकार ‘3D पॉलिसी’ पर काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कौन बनेंगे, यह निर्णय केवल देश के नागरिक करेंगे, न कि वे लोग जो अवैध तरीके से भारत में घुस आए हैं।

अमित शाह ने कहा कि कई दशकों से सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ हो रही है और इसका सीधा असर देश की सुरक्षा, संसाधनों और मतदाता सूची पर पड़ा है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कुछ पार्टियां राजनीतिक लाभ के लिए घुसपैठियों को संरक्षण देती रही हैं, जबकि बीजेपी और मोदी सरकार इस समस्या को खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। शाह के अनुसार, ‘3D पॉलिसी’— अर्थात् डिटेक्ट, डिलीट और डीपोर्ट—इस मुद्दे को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

उन्होंने कहा कि पहले चरण Detect (पहचान) में सरकार घुसपैठियों की पहचान करने के लिए कई तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू कर रही है। इसके तहत डिजिटल वोटर लिस्ट, बायोमेट्रिक सत्यापन और विभिन्न सरकारी डाटाबेस को आपस में जोड़ने की प्रक्रिया तेज की गई है ताकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता का दावा करने वालों को पकड़ा जा सके।

दूसरा चरण Delete (नाम हटाना) है। शाह ने बताया कि कानून स्पष्ट कहता है कि केवल भारतीय नागरिक ही वोट देने का अधिकार रखते हैं। ऐसे में जिन घुसपैठियों ने फर्जी दस्तावेज बनवाकर वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया है, उनके नाम हटाना चुनाव सुधार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया राज्यों के सहयोग से तेज की जाएगी।

तीसरा चरण Deport (निर्यात/देश निकाला) है। गृह मंत्री ने कहा कि जिन लोगों की पहचान घुसपैठियों के रूप में हो चुकी है, उन्हें उनके मूल देश वापस भेजा जाएगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बातचीत चल रही है ताकि प्रक्रिया कानूनी रूप से मजबूत और प्रभावी हो।

अमित शाह ने लोकसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह सरकार ना तो अवैध घुसपैठियों से डरती है और ना ही उन्हें वोट बैंक समझती है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार की नीतियों की वजह से पिछले कुछ वर्षों में अवैध प्रवेश के मामलों में बड़ी कमी आई है। साथ ही सीमा सुरक्षा को लेकर भी कई नए कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां वोट एक पवित्र अधिकार है। यदि गैर-नागरिक मतदान करेंगे तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को कमजोर करेगा। इसलिए यह आवश्यक है कि मतदाता सूची शुद्ध और पारदर्शी हो। शाह ने विपक्ष से कहा कि अगर उन्हें वाकई लोकतंत्र की चिंता है तो उन्हें सरकार के इन कदमों का समर्थन करना चाहिए।

चर्चा के दौरान कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार ‘3D पॉलिसी’ का इस्तेमाल नागरिकों को परेशान करने के लिए कर सकती है। इस पर शाह ने जवाब दिया कि सरकार किसी भी भारतीय नागरिक के अधिकारों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता संदेह में होने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे अपनी पहचान साबित करने का मौका दिया जाएगा।

शाह ने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले सभी भारतीय नागरिक निश्चिंत रहें—सरकार की कार्रवाई केवल उन पर है जो अवैध रूप से देश में घुसे हैं। उन्होंने कहा कि NRC, आधार, वोटर लिस्ट और कई डाटाबेस को जोड़ना इसी उद्देश्य के लिए है ताकि फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाई जा सके।

गृहमंत्री ने कहा कि अवैध घुसपैठ का सबसे बड़ा नुकसान उन राज्यों और समुदायों को होता है जहां घुसपैठ ज्यादा होती है। स्थानीय लोगों की नौकरियों, संसाधनों, जमीन और सांस्कृतिक संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा है।

शाह ने विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि चुनावों में घुसपैठियों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने की राजनीति अब बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देश की सुरक्षा से खिलवाड़ है और मोदी सरकार इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।

अपने भाषण के अंत में अमित शाह ने दोबारा स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जैसे पदों का चयन केवल भारतीय नागरिक ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को वोट देने से रोकना लोकतंत्र की रक्षा करने जैसा है। ‘3D पॉलिसी’ इसी दिशा में एक आवश्यक कदम है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार पारदर्शिता के साथ चुनाव प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए काम करती रहेगी और इस प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की उम्मीद करती है। शाह का यह बयान लोकसभा में चुनाव सुधार को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

 

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