बरेली में एक 60 वर्षीय व्यक्ति ने शादी का झांसा देकर पैसे ऐंठने के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कंसल्टेंसी ने शादी कराने के नाम पर उनसे 9000 रुपये लिए लेकिन वादे पूरे नहीं किए। सबूतों की कमी के कारण आयोग ने दूल्हे का दावा खारिज कर दिया क्योंकि वह अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाया।

जागरण संवाददाता, बरेली। शादी का झांसा देकर रकम ऐंठने का मुद्दा लेकर 60 साल का दूल्हा उपभोक्ता आयोग पहुंच गया। दावे में कहा कि शादी कराने की बात कहकर विपक्षी ने नौ हजार की रकम ऐंठ ली। ना उसकी शादी कराई और ना रकम ही वापस की, हालांकि दूल्हा अपनी बात आयोग में साबित नहीं कर सका और उसका दावा खारिज हो गया।
अमूमन मुकदमा लड़ने के लिए वकीलों की जरूरत होती है। लेकिन 60 साल के इकबाल अहमद ने अपना मुकदमा खुद ही दायर किया। जब अदालत ने सबूत मांगा, तब वह सबूत पेश नहीं कर सके। मामला एक वर्ष पुराना है।
बीते वर्ष 23 अप्रैल को प्रेमनगर निवासी इकबाल ने उपभोक्ता आयोग में दावा दायर किया कि उनकी उम्र करीब 60 साल हो गई है। जवानी तो जैसे-तैसे कट गई, अब बुढ़ापे में एक नेक बीवी की जरूरत थी। अखबार में एक विज्ञापन छपा देखा तो आस बंधी।
बताया कि विपक्षी मेट्रोमोनियल कंसल्टेंसी चलाता है, जिसमें मुसलमानों की शादी कराई जाती हैं। आरोप लगाया कि विपक्षी मैरिज कंसल्टेंसी ने फार्म भरवाने के बाद उनसे पांच हजार रुपए जमा करा लिए। बाद में एक-एक हजार करके चार हजार रुपए और जमा कराए।
इसके बावजूद उनके लिए दुल्हन तलाश नहीं की। परिवादी ने विपक्षी को नोटिस भी दिया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तब उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। परिवादी ने मांग रखी कि उसे जमा रकम के अलावा हर्जाना भी दिलाया जाए।
आयोग ने जब दावे को साबित करने के लिए हलफनामे के साथ सबूत मांगे, तब परिवादी सबूत नहीं दे सका। विपक्षी के अधिवक्ता रामकुमार सारस्वत ने बताया कि जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवादी का दावा खारिज कर दिया।