
हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की मौत ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया है। चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से सोमवार सुबह उनका शव बरामद हुआ। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या की, हालांकि पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है।
कौन थे आईपीएस वाई. पूरन कुमार?
वाई. पूरन कुमार 2001 बैच के हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी थे। उन्होंने अपने करियर में कई अहम पदों पर कार्य किया और हाल के समय में वे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) के पद पर तैनात थे। उनकी पत्नी अमनीत कौर आईएएस अधिकारी हैं और घटना के समय वे जापान में थीं।
अपने सख्त और बेबाक स्वभाव के लिए जाने जाने वाले पूरन कुमार का करियर कई विवादों से भरा रहा। उन्होंने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों और सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे वे लगातार सुर्खियों में रहे।
सिस्टम से टकराव और विवादों का इतिहास
वाई. पूरन कुमार का नाम अक्सर प्रशासनिक संघर्षों से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) मनोज यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि यादव ने उनके साथ जातिगत भेदभाव किया और उन्हें एक मंदिर परिसर में प्रवेश करने से रोका गया। उन्होंने इस मामले में SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन राज्य सरकार ने जांच के बाद आरोपों को निराधार बताया और शिकायत को खारिज कर दिया।
इसके अलावा, पूरन कुमार ने यह भी दावा किया था कि उनकी मोबाइल फोन कॉल और डेटा की निगरानी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों ने अवैध तरीके से उनके फोन की निगरानी कराई, जिस पर राज्य सरकार को जांच शुरू करनी पड़ी।
उन्होंने गृह विभाग के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पर भी पक्षपात और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए। इस शिकायत की जांच के लिए सरकार ने तीन सदस्यीय पैनल गठित किया था, जिसका उन्होंने विरोध किया और उसे चुनौती दी थी।
एक अन्य विवाद में उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें अन्य अधिकारियों की तुलना में निम्न स्तरीय सरकारी वाहन दिया गया, जिसे उन्होंने भेदभाव का उदाहरण बताया।
घटना कैसे हुई?
7 अक्टूबर 2025 की सुबह चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित सरकारी आवास में उनका शव मिला। शुरुआती जांच में सामने आया कि उन्होंने कथित तौर पर अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोली चलाई थी। उनके शरीर पर गोली लगने के निशान मिले हैं, लेकिन कोई आत्महत्या नोट नहीं बरामद हुआ।
सूत्रों के अनुसार, उनका शव घर के साउंडप्रूफ बेसमेंट में मिला। यह बात पुलिस के लिए भी चौंकाने वाली रही। परिवार के सदस्य उस समय घर पर मौजूद नहीं थे।
जांच में क्या सामने आया?
मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कई साक्ष्य जुटाए हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में यह साफ हुआ है कि दरवाजे अंदर से बंद थे, जिससे आत्महत्या की आशंका मजबूत मानी जा रही है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरन कुमार मानसिक तनाव में थे और पिछले कुछ महीनों से वे लगातार कुछ विवादों में उलझे हुए थे। उन्होंने कई बार प्रशासनिक दबाव की शिकायत भी की थी।
पूरन कुमार का व्यक्तित्व और विरासत
वाई. पूरन कुमार को एक ईमानदार, कड़क और नियमप्रिय अधिकारी माना जाता था। वे सिस्टम की कमियों पर खुलकर बोलते थे, जिसके कारण अक्सर वे सत्ता प्रतिष्ठान के निशाने पर भी रहे। उनके सहयोगियों का कहना है कि वे न्यायप्रिय अधिकारी थे, लेकिन अपनी बात रखने में बेहद मुखर थे, जिससे अक्सर टकराव की स्थिति बन जाती थी।
उनकी मौत के बाद पुलिस विभाग और प्रशासनिक हलकों में शोक की लहर है। कई अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें निडर और ईमानदार अधिकारी बताते हुए श्रद्धांजलि दी है।
अब तक का निष्कर्ष और आगे की राह
पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह आत्महत्या का मामला है या किसी अन्य कारण से हुई मौत। चंडीगढ़ पुलिस ने घटनास्थल से एक सर्विस रिवॉल्वर और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
घटना ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला दिया है कि क्या सिस्टम के भीतर के संघर्ष और लगातार बढ़ते प्रशासनिक दबाव अधिकारी वर्ग के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।
वाई. पूरन कुमार की मौत केवल एक वरिष्ठ अधिकारी की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उस गहरे तनाव और संघर्ष की झलक भी दिखाती है जो कभी-कभी सत्ता-तंत्र के भीतर ईमानदारी से काम करने वाले अफसरों को झेलनी पड़ती है। अब यह जांच ही तय करेगी कि पूरन कुमार की मौत के पीछे सच्चाई क्या है — आत्महत्या, दबाव या कोई और साजिश।