
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर दमघोंटू हवा के आगोश में है। शुक्रवार रात से शुरू हुआ प्रदूषण का कहर शनिवार सुबह तक भयावह रूप ले चुका है। शहर के कई हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया, जिससे दिल्ली ‘रेड जोन’ में आ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्थिति गंभीर श्रेणी (Severe Category) में आती है और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
दिल्ली की हवा हुई जहरीली
दिल्ली के आनंद विहार, जहांगीरपुरी, वजीरपुर, और बवाना जैसे इलाकों में AQI 450 के पार दर्ज किया गया। वहीं, साउथ दिल्ली के कई पॉश इलाकों जैसे ग्रीन पार्क और ग्रेटर कैलाश में भी वायु गुणवत्ता 390 से ऊपर रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह 8 बजे औसत AQI 412 दर्ज किया गया — जो “Severe” श्रेणी में आता है।
इस स्तर पर हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि वे सांस के जरिए फेफड़ों में घुसकर रक्त प्रवाह तक पहुंच जाते हैं।
NCR में भी हालात खराब
दिल्ली ही नहीं, उसके आसपास के शहर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है।
नोएडा में AQI 425, गाजियाबाद में 430 और फरीदाबाद में 410 तक पहुंच गया। गुरुग्राम में हल्की राहत रही, जहां इंडेक्स 380 के आसपास दर्ज हुआ।
CPCB के मुताबिक, यह सीजनल ट्रेंड हर साल अक्टूबर-नवंबर में देखने को मिलता है, लेकिन इस बार हवा की गुणवत्ता और तेजी से गिरी है।
बढ़ते प्रदूषण के कारण
विशेषज्ञों ने इसके पीछे कई प्रमुख कारण बताए हैं:
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पराली जलाना: पंजाब और हरियाणा में खेतों में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले हफ्ते 20% की वृद्धि हुई है।
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वाहन उत्सर्जन: दिल्ली की सड़कों पर लगभग 1.4 करोड़ वाहन हैं, जिनसे भारी मात्रा में धुआं निकल रहा है।
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निर्माण कार्य: कई इलाकों में निर्माण और ध्वंस कार्य जारी रहने से धूल प्रदूषण बढ़ा है।
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मौसमी परिवर्तन: हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक कण वातावरण में फंस गए हैं।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई सख्त कदम उठाए हैं।
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स्कूलों में छुट्टियां: प्राथमिक कक्षाओं तक के स्कूलों में छुट्टियां घोषित की गई हैं।
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निर्माण पर रोक: बड़े निर्माण और तोड़फोड़ वाले कामों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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डस्ट कंट्रोल: सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का प्रयोग तेज किया गया है।
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वाहनों पर निगरानी: पेट्रोल और डीजल वाहनों की चेकिंग के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा,
“दिल्ली सरकार हर संभव कदम उठा रही है। हम पड़ोसी राज्यों से भी अपील करते हैं कि पराली जलाने पर सख्त नियंत्रण करें।”
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली की यह जहरीली हवा बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।
AIIMS के पल्मोनरी विभाग के प्रमुख डॉक्टर राजेश चावला ने बताया,
“AQI 400 से ऊपर होने पर सामान्य व्यक्ति को भी सांस लेने में दिक्कत होती है। लंबे समय तक एक्सपोजर फेफड़ों में स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।”
उन्होंने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बाहर जाते समय N95 या N99 मास्क पहनें, और सुबह या देर शाम टहलने से बचें जब प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा होता है।
स्कूल और ऑफिस पर असर
प्रदूषण का असर अब दिल्लीवासियों के रोजमर्रा के जीवन पर भी दिख रहा है।
कई निजी स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी हैं। आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर की कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे कारपूलिंग या सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या घटे।
केंद्र सरकार की बैठक
केंद्र सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक आपात बैठक बुलाई है।
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा,
“हमने राज्यों से कहा है कि GRAP के सभी चरणों का कड़ाई से पालन किया जाए।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण सिर्फ एक राज्य का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय समस्या है, जिसका समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर चिंता जताई है।
WHO के अनुसार, दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में फिर से शीर्ष पांच में आ गई है।
संस्थान ने चेतावनी दी कि लंबे समय तक इस तरह की हवा में रहना कैंसर, हृदय रोग, और श्वसन तंत्र की बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है।
दिल्लीवासी क्या करें
विशेषज्ञों ने नागरिकों को कुछ एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है:
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बाहर जाते समय मास्क जरूर पहनें।
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बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर ही रखें।
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घर में एयर प्यूरिफायर का उपयोग करें।
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वाहन की सर्विसिंग समय पर करवाएं।
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पेड़-पौधे लगाएं और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचें।
निष्कर्ष
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम वास्तव में इससे निपटने के लिए तैयार हैं?
हर साल वही कहानी दोहराई जाती है — सर्दियां शुरू होते ही हवा जहरीली हो जाती है, सरकारें मीटिंग करती हैं, और कुछ हफ्तों बाद सब शांत हो जाता है।
लेकिन अब वक्त आ गया है कि प्रदूषण को सिर्फ “मौसमी समस्या” न मानकर एक राष्ट्रीय आपदा के रूप में देखा जाए।
दिल्ली और एनसीआर में जीवन की गुणवत्ता लगातार गिर रही है, और जब तक प्रदूषण के मूल कारणों — पराली, वाहन, और धूल — पर स्थायी नियंत्रण नहीं होता, तब तक यह संकट हर साल लौटता रहेगा।