
कई दशकों से लोगों को यही बताया जाता रहा है कि फुल क्रीम दूध और फुल फैट डेयरी उत्पाद दिल के लिए नुकसानदायक होते हैं। डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट अक्सर इसे कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाला और हार्ट डिजीज का कारण बताते रहे हैं। लेकिन अब एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने इस धारणा को आधे से ज्यादा गलत साबित कर दिया है।
नवीनतम अध्ययन के अनुसार, फुल फैट दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन न केवल हानिकारक नहीं है, बल्कि यह दिल की सेहत में सुधार ला सकता है और कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) के जोखिम को कम भी कर सकता है। यह अध्ययन अमेरिका और यूरोप की प्रमुख हेल्थ यूनिवर्सिटीज़ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, जिसमें 20,000 से अधिक प्रतिभागियों पर करीब 10 वर्षों तक रिसर्च की गई।
फुल क्रीम दूध पर नया नजरिया
अब तक यह माना जाता रहा था कि फुल फैट दूध में मौजूद सैचुरेटेड फैट (Saturated Fat) रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाता है, जिससे ब्लॉकेज और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन रिसर्च में पाया गया कि सैचुरेटेड फैट का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता।
शोधकर्ताओं ने बताया कि दूध में मौजूद फैटी एसिड्स कई बार शरीर के लिए लाभदायक भूमिका निभाते हैं — ये इंफ्लेमेशन कम करने, विटामिन D को अवशोषित करने और हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं।
अध्ययन के मुताबिक, जो लोग नियमित रूप से फुल फैट डेयरी उत्पाद जैसे कि दूध, दही, घी या पनीर का सेवन नियंत्रित मात्रा में करते हैं, उनमें हार्ट डिजीज का खतरा 18-25% तक कम पाया गया।
रिसर्च में कैसे हुआ खुलासा
यह अध्ययन अमेरिका के National Heart, Lung, and Blood Institute और यूरोप की University of Copenhagen के सहयोग से किया गया। शोध में प्रतिभागियों के ब्लड फैट लेवल, आर्टरी कैल्सिफिकेशन और हार्ट हेल्थ इंडेक्स की लगातार निगरानी की गई।
परिणाम चौंकाने वाले थे —
जिन लोगों ने लो-फैट मिल्क या स्किम्ड मिल्क लिया, उनके मुकाबले फुल फैट दूध पीने वालों में आर्टरी कैल्सिफिकेशन (धमनियों में जमे कैल्शियम का स्तर) काफी कम था। इसका अर्थ यह है कि फुल फैट दूध ब्लॉकेज बनने से रोकने में सहायक हो सकता है।
युवा पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण संदेश
आजकल फिटनेस ट्रेंड में कई युवा केवल स्किम्ड मिल्क या प्लांट-बेस्ड मिल्क (जैसे बादाम या सोया दूध) को ही हेल्दी विकल्प मानते हैं। लेकिन यह रिसर्च बताती है कि प्राकृतिक दूध, खासकर फुल क्रीम, में ऐसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और मिनरल्स मौजूद हैं जो प्लांट बेस्ड विकल्पों में नहीं होते।
वैज्ञानिकों का कहना है कि दूध से मिलने वाला कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन K2 और ओमेगा फैटी एसिड्स दिल और हड्डियों दोनों के लिए फायदेमंद हैं। हां, अगर किसी को लैक्टोज इनटॉलरेंस या हाई कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत है, तो उन्हें डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
क्या बदलना चाहिए आपकी आदतें?
रिसर्चर्स का सुझाव है कि फुल फैट दूध या डेयरी उत्पादों को पूरी तरह छोड़ने की बजाय, मात्रा नियंत्रित रखकर रोजाना सेवन किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए —
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दिन में एक गिलास फुल क्रीम दूध
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सप्ताह में दो बार दही या पनीर
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सीमित मात्रा में देसी घी (1-2 चम्मच प्रति दिन)
इन सबका सेवन करने से न केवल हृदय की सेहत सुधरती है, बल्कि शरीर को आवश्यक विटामिन A, D, E और K भी पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
भारत के कई हृदय रोग विशेषज्ञों ने भी इस रिपोर्ट को लेकर अपनी राय दी है। उनका कहना है कि “हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से फैट प्रोसेस करता है। अगर जीवनशैली संतुलित है और व्यायाम नियमित किया जाता है, तो फुल फैट दूध से कोई खतरा नहीं है।”
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि ज्यादा मात्रा में फैट सेवन, चाहे किसी भी रूप में हो, नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए, हर व्यक्ति को बैलेंस्ड डाइट और मॉडरेशन पर ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष
नई रिसर्च ने वर्षों से चली आ रही उस मिथक को तोड़ दिया है जिसमें फुल क्रीम दूध को “दिल का दुश्मन” बताया जाता था। अब वैज्ञानिक तौर पर यह साबित हो चुका है कि प्राकृतिक दूध के फैट तत्व शरीर के लिए लाभदायक हो सकते हैं, बशर्ते उनका सेवन संयमित रूप में किया जाए।
युवा पीढ़ी के लिए यह संदेश खास है — हर नई ट्रेंड पर आंख मूंदकर भरोसा करने की बजाय, विज्ञान और संतुलन पर भरोसा करें।