
दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर हुए भयानक धमाके ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस धमाके में अब तक कई जानें जा चुकी हैं और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। जांच एजेंसियां लगातार सुरागों की कड़ियाँ जोड़ने में जुटी हैं। इस बीच, जांच में एक अहम खुलासा हुआ है — मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर ने धमाके से पहले बेहद सुनियोजित तरीके से दिल्ली में प्रवेश किया था, ताकि किसी भी सीसीटीवी या ट्रैफिक सर्विलांस सिस्टम से बचा जा सके।
दिल्ली पुलिस और एनआईए की संयुक्त जांच में यह बात सामने आई है कि उमर ने हरियाणा के मेवात इलाके से जिगजैग रूट लेते हुए राजधानी में प्रवेश किया। इस रूट की मैपिंग करने पर यह साफ हुआ कि यह रास्ता सामान्य ट्रैफिक मार्ग से काफी अलग था — यानी उमर ने पहले से ही ऐसे रास्तों का चयन किया, जहां पुलिस की गतिविधि और सुरक्षा जांच बेहद कम रहती है।
मेवात से दिल्ली तक उमर का सफर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उमर ने मेवात से निकलने के बाद रास्ते में कई छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों से होकर दिल्ली का रुख किया। उसने फरीदाबाद और बदरपुर बॉर्डर के बीच कई बार रूट बदला ताकि उसकी कार ट्रैक न की जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि उमर कई बार गाड़ी पार्क करके कॉल्स करता दिखा, जिनकी लोकेशन दिल्ली की परिधि के आसपास मिली है।
इसके बाद वह लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास उस सड़क पर पहुंचा, जहां विस्फोटक से भरी कार मिली थी। अब पुलिस के पास इस पूरे सफर के लगभग 50 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज है, जिनसे उमर के अंतिम घंटे का पूरा टाइमलाइन तैयार किया जा रहा है।
कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रेल से खुल रहे राज
पुलिस ने उमर के फोन रिकॉर्ड्स और इंटरनेट डेटा का विश्लेषण किया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि धमाके से कुछ घंटे पहले उसने कश्मीर और हरियाणा के कुछ संदिग्ध नंबरों पर बात की थी। एजेंसियों को शक है कि ये कॉल्स आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों को किए गए थे।
इसके अलावा, उमर के मोबाइल में मिले टेलीग्राम और सिग्नल ऐप्स के एन्क्रिप्टेड चैट्स को भी डीक्रिप्ट किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन चैट्स में “फाइनल मूव” और “डिलीवरी ओके” जैसे कोडवर्ड मिले हैं, जिससे यह अंदेशा है कि धमाके की साजिश पहले से तय थी।
CCTV फुटेज में ‘शांत’ दिखा उमर
जांच टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उमर आखिरी घंटों में बेहद शांत और संयमित दिखाई दे रहा था। सीसीटीवी फुटेज में वह गाड़ी चलाते हुए सामान्य व्यक्ति की तरह व्यवहार करता दिखा। उसने कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई और कार पार्क करने के बाद पैदल इलाके से निकला। इस बिंदु के बाद से वह कैमरों में नहीं दिखा, जिससे एजेंसियों को लग रहा है कि किसी ने उसे आगे से मदद की या छिपने में सहायता की।
पुलिस का फोकस अब सहयोगियों पर
दिल्ली पुलिस अब उन संभावित लोगों की पहचान कर रही है, जिन्होंने उमर की मदद की हो सकती है। मेवात और फरीदाबाद से कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें कुछ ऑटो पार्ट्स विक्रेता और गैरेज मालिक भी शामिल हैं, जिनसे यह जांच की जा रही है कि क्या उन्होंने धमाके में इस्तेमाल की गई i20 कार से जुड़ा कोई काम किया था।
एनआईए और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने भी इस केस में अपनी टीमें उतार दी हैं। फिलहाल, एजेंसियां उमर के नेटवर्क और उसके आतंकवादी संबंधों को लेकर विस्तृत पूछताछ कर रही हैं।
सरकार ने माना आतंकी हमला
केंद्र सरकार ने इस धमाके को आतंकी घटना घोषित कर दिया है और जांच एजेंसियों को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों को दिल्ली समेत सभी बड़े शहरों में हाई अलर्ट पर रहने को कहा है।
निष्कर्ष
दिल्ली ब्लास्ट की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है। उमर की आखिरी मूवमेंट, मेवात से दिल्ली तक का सफर, और उसके कॉल रिकॉर्ड — सभी सुराग इस ओर इशारा करते हैं कि यह एक बड़े नेटवर्क द्वारा रची गई साजिश थी। 50 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और डिजिटल साक्ष्य अब इस रहस्य को सुलझाने की दिशा में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।
देशभर में इस मामले को लेकर चिंता है, और सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आखिर उमर के साथ और कौन इस विनाशकारी योजना का हिस्सा था।