
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। हालत यह है कि अब लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) गंभीर श्रेणी (Severe Category) में पहुंच गया है, जिससे स्कूलों से लेकर निर्माण कार्यों तक पर असर पड़ा है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कई सख्त प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं।
नोएडा और गाजियाबाद में अब स्कूलों को हाइब्रिड मोड (Hybrid Mode) यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से चलाने का निर्देश दिया गया है। वहीं, सभी गैर-जरूरी निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगा दी गई है।
दिल्ली-NCR की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंची
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और SAFAR के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 480 से ऊपर दर्ज किया गया है, जो खतरनाक स्तर है। नोएडा में यह 462 और गाजियाबाद में 454 के पार पहुंच गया है।
यह स्तर “Severe” श्रेणी में आता है, जिसका मतलब है कि हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व (PM2.5 और PM10) इतने ज्यादा हैं कि स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में मौजूद धूल, धुआं, वाहन उत्सर्जन और पराली के धुएं ने मिलकर इस संकट को और गंभीर बना दिया है। सुबह और शाम के समय लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई जैसी शिकायतें हो रही हैं।
नोएडा-गाजियाबाद में प्रशासन ने उठाए सख्त कदम
स्थिति बिगड़ने के बाद गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद प्रशासन ने GRAP-3 (Graded Response Action Plan) लागू कर दिया है। इस योजना के तहत कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं—
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स्कूलों में कक्षाएं हाइब्रिड मोड में: 8वीं तक के बच्चों के लिए स्कूलों को ऑनलाइन क्लासेज शुरू करने का निर्देश दिया गया है। 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं के लिए स्कूल चाहें तो हाइब्रिड मोड में पढ़ाई करवा सकते हैं।
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निर्माण कार्यों पर रोक: सभी गैर-जरूरी निर्माण गतिविधियों जैसे सड़क निर्माण, बिल्डिंग साइट्स पर कार्य और धूल उड़ाने वाली गतिविधियों को फिलहाल रोक दिया गया है।
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सड़क पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन: नगर निगम और नोएडा अथॉरिटी की टीमें लगातार सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रही हैं ताकि धूल कम हो सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि वर्तमान प्रदूषण स्तर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषित हवा से फेफड़ों की कार्यक्षमता घटती है, खांसी-बुखार बढ़ता है और लंबे समय में दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
AIIMS के पल्मोनोलॉजी विभाग के एक डॉक्टर ने कहा,
“यह स्थिति आपातकाल जैसी है। लोगों को सुबह की वॉक या जॉगिंग से परहेज करना चाहिए और N-95 मास्क पहनना अनिवार्य करना चाहिए।”
दिल्ली सरकार और आयोग की सख्त निगरानी
दिल्ली सरकार ने पहले ही GRAP-4 लागू करने के संकेत दे दिए हैं, जिसमें स्कूल, कॉलेज और ऑफिस पूरी तरह ऑनलाइन मोड में जाने, ट्रक प्रवेश पर रोक और वाहनों की संख्या सीमित करने (Odd-Even सिस्टम) जैसे कदम शामिल हैं।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने NCR के सभी जिलों को प्रदूषण नियंत्रण की रिपोर्ट प्रतिदिन भेजने का आदेश दिया है। साथ ही, जो निर्माण कंपनियां नियमों का उल्लंघन करेंगी, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
लोगों से की गई ये अपीलें
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि—
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निजी वाहनों की बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें।
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घरों में एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करें।
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बाहर जाते समय N-95 मास्क जरूर पहनें।
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बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषित वातावरण से यथासंभव दूर रखें।
निष्कर्ष
दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर जहरीली हो चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी सर्दियों की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण ने सांस रोक देने वाला संकट खड़ा कर दिया है। प्रशासनिक सख्ती के बावजूद, जब तक प्रदूषण के स्रोतों—जैसे पराली जलाना, वाहन उत्सर्जन और निर्माण की धूल—पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह समस्या हर साल दोहराई जाती रहेगी।