
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने जहां NDA को स्पष्ट बहुमत दिलाया, वहीं विपक्षी खेमे में असंतोष और संदेह के स्वर गूंजने लगे हैं। सबसे मुखर आवाज़ कांग्रेस से जुड़े कारोबारी और नेता रॉबर्ट वाड्रा की रही, जिन्होंने चुनाव नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह परिणाम “स्वाभाविक नहीं” दिखते और “पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता संदेह में है।”
वाड्रा ने सोशल मीडिया और बयानबाज़ी के ज़रिए यह मांग उठाई कि राज्य में “दोबारा मतदान” कराया जाए, ताकि जनता का भरोसा मजबूत हो सके और प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित रहे।
वाड्रा का आरोप— ‘नतीजों में गड़बड़ी एकदम साफ़ दिखती है’
रॉबर्ट वाड्रा का कहना है कि इस चुनाव में जो परिणाम सामने आए, वे “भौतिक वास्तविकताओं से परे” और “चौंकाने वाले” हैं। उन्होंने कहा कि कई सीटों पर वोटिंग प्रतिशत और आंकड़े मेल नहीं खाते, जबकि राजनीतिक हवा भी अलग दिशा में बह रही थी। उनके अनुसार, जिस तरह NDA ने राज्यों में अपना प्रदर्शन किया, उससे कहीं अधिक चौंकाने वाला बिहार का फाइनल रिज़ल्ट रहा।
वाड्रा का दावा है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम से आए आंकड़े और बूथ स्तर की वोटिंग रिपोर्ट के बीच “बड़ा विरोधाभास” था। उन्होंने कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाती है।
वाड्रा की मांग— ‘निष्पक्षता के लिए जरूरी है पुनर्मतदान’
रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि जनता का भरोसा टूटना नहीं चाहिए। अगर लोगों के मन में यह संदेह रह जाए कि चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए, तो यह लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा:
“बिहार जैसे बड़े राज्य में चुनाव अगर निष्पक्ष प्रक्रिया के साथ न हों, तो यह पूरे देश के लोकतांत्रिक तंत्र को प्रभावित करता है। इसलिए दोबारा मतदान ही उचित विकल्प है।”
उनका कहना है कि अगर दोबारा चुनाव होंगे तो राजनीतिक दल भी संतुष्ट होंगे और जनता भी यह समझ पाएगी कि अंतिम फैसले में उनकी आवाज़ साफ़-साफ़ झलकती है।
विपक्ष में बढ़ रहा आक्रोश, NDA की जीत पर संदेह गहराया
केवल रॉबर्ट वाड्रा ही नहीं, बल्कि कई विपक्षी दलों ने भी इस चुनाव के परिणामों पर असंतोष जताया है। कई नेताओं ने इसे “अनपेक्षित” और “अस्वाभाविक” करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि राज्य में बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और क्षेत्रीय असंतोष जैसे मुद्दों पर जनता का मूड एनडीए के खिलाफ था, लेकिन परिणाम इसके विपरीत आए।
हालाँकि अभी तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं, लेकिन विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि वोटिंग प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जाए।
NDA की प्रतिक्रिया— ‘विपक्ष हार नहीं पचा पा रहा’
NDA नेताओं ने वाड्रा के आरोपों को “बेकार” और “राजनीतिक हताशा” बताया है। उनके अनुसार बिहार की जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है और इसे चुनौती देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान है।
एनडीए नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता से काम करता है और यह कहना कि चुनाव “फिक्स” था, एक तरह से संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश है।
चुनाव आयोग क्या करेगा?
विपक्ष की लगातार उठ रही चिंताओं और रॉबर्ट वाड्रा जैसे हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों की मांग ने चुनाव आयोग पर भी सवालिया दबाव बना दिया है। हालांकि आयोग ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सामान्य रूप से आयोग इसी प्रकार के आरोपों को निराधार मानता है, जब तक कि कोई ठोस साक्ष्य न मिले।
अगर विरोध बढ़ता है तो आयोग कुछ सीटों पर पुनर्गणना या तकनीकी जांच का आदेश दे सकता है, लेकिन पूरे राज्य में पुनर्मतदान की संभावना काफी कम है।
जमीनी स्तर पर जनता क्या सोचती है?
बिहार में आम मतदाताओं की राय मिश्रित है। कुछ लोग मानते हैं कि चुनाव प्रक्रिया सामान्य थी और परिणाम जनता की इच्छा को दर्शाते हैं। वहीं कई लोग यह भी कहते हैं कि उम्मीदों के विपरीत आए नतीजों ने संदेह की जगह छोड़ी है।
राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि जब चुनाव किसी के पक्ष में अप्रत्याशित रूप से झुके हों, तो राजनीतिक बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होना स्वाभाविक है।