
दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार IED धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने का दावा किया है। NIA के अनुसार यह हमला सुसाइड ब्लास्ट की तरह योजना बनाकर किया गया था, और इसके पीछे एक संगठित कश्मीरी टेरर मॉड्यूल काम कर रहा था।
धमाके में इस्तेमाल की गई i20 कार के मालिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। NIA की ये गिरफ्तारी और खुलासे यह संकेत देते हैं कि इस हमले की तैयारी काफी पहले से की जा रही थी और इसमें कई लोग शामिल थे।
सुसाइड अटैक की थी तैयारी
NIA को जांच में पता चला है कि धमाके को अंजाम देने के लिए आतंकियों ने एक सुसाइड मिशन तैयार किया था। इसके पीछे मौजूद मॉड्यूल ने IED तैयार किया था जो रिमोट और टाइमर दोनों तरीकों से ट्रिगर हो सकता था।
एजेंसी के अनुसार, यह हमला सिर्फ डर फैलाने के लिए नहीं था, बल्कि दिल्ली में एक बड़े पैमाने पर सीरियस टेरर ऑपरेशन शुरू करने की साजिश थी।
कार में लगा था हाई-इंटेंसिटी IED
तलाशी में NIA को कार से कई महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं।
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IED डिवाइस
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इलेक्ट्रॉनिक सर्किट
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बैटरी पैक
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डेटोनेटर
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लोहे के टुकड़े और बॉल बेयरिंग
इन सभी सामग्री से पता चलता है कि धमाका अधिक नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से प्लान किया गया था।
प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि IED को कार की डिक्की और सीटों के नीचे छुपाया गया था, ताकि किसी सुरक्षा जांच में भी यह आसानी से पकड़ में न आए।
कश्मीर टेरर मॉड्यूल का कनेक्शन पक्का
NIA ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के फोन, चैट, बैंक डिटेल और यात्रा रिकॉर्ड की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि सभी आरोपी कश्मीर आधारित मॉड्यूल से जुड़े हुए थे।
मॉड्यूल का नेतृत्व उमर-उन-नबी नाम का शख्स कर रहा था, जो कश्मीर में कई कट्टरपंथी तत्वों के संपर्क में था। माना जा रहा है कि उमर को टेरर ट्रेनिंग भी दी गई थी और वह दिल्ली में एक बड़े हमले की साजिश रच रहा था।
NIA ने उमर के सहयोगियों की तलाश तेज कर दी है और कश्मीर के कई इलाकों में छापेमारी जारी है।
i20 कार मालिक गिरफ्तार – किराने के बहाने किया इस्तेमाल
NIA ने IED कार के मालिक को भी गिरफ्तार किया है। शुरुआती पूछताछ में बताया गया है कि कार मालिक ने दावा किया कि उसने गाड़ी को ‘किराए पर’ दिया था और उसे पता नहीं था कि इसमें ब्लास्ट की तैयारी हो रही है।
लेकिन NIA के पास मिले इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत बताते हैं कि कार मालिक की भूमिका संदिग्ध और सक्रिय थी। उसके बैंक लेनदेन और संपर्क सूची से भी कई अहम जानकारियां मिली हैं।
दिल्ली में बड़े नेटवर्क की आशंका
एजेंसी का मानना है कि यह हमला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था जो राजधानी में लगातार कई जगह विस्फोट की तैयारी कर रहा था।
NIA अधिकारियों के अनुसार:
“यह मामला सिर्फ एक कार ब्लास्ट का नहीं है। यह एक संगठित आतंक नेटवर्क की नेपाल, कश्मीर और दिल्ली में फैली गतिविधियों का हिस्सा है।”
दिल्ली पुलिस और NIA अब इस केस को हाई-प्रोफाइल टेरर नेटवर्क के रूप में देख रही हैं।
आगे क्या?
NIA अब यह जांच कर रही है कि:
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इस मॉड्यूल ने पहले किन लोगों से संपर्क किया?
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फंडिंग कहां से हो रही थी?
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क्या दिल्ली में और भी IED प्लांट किए गए थे?
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कौन-कौन इस कार ऑपरेशन में शामिल था?
आने वाले दिनों में और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।