तीन पासपोर्ट और तीन पते : डॉक्टर शाहीन का जैश-ए-मोहम्मद से गहरा आतंकवादी संबंध

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लखनऊ-पिछली पृष्ठभूमि वाली डॉक्टर शाहीन शाहिद की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को एक जटिल और खतरनाक आतंकवादी नेटवर्क तक पहुँचाने वाला खुलासा किया है। जांच में यह सामने आया है कि उसके पास तीन अलग-अलग पासपोर्ट थे, जिनमें हर एक में विभिन्न पते दर्ज थे। इस तथ्य ने उसकी गतिविधियों और पहचान को छिपाने की रणनीति की गहराई को उजागर किया है।

गहन पड़ताल में एजेंसियों को पता चला कि शाहीन ने पाकिस्तान की यात्रा तीन बार की थी। तीनों पासपोर्ट में अलग-अलग निवास पते दर्ज थे — एक कानपुर (जहां वह पहले नौकरी करती थी), दूसरा लखनऊ और तीसरा फरीदाबाद। इस विभाजन ने उसे अपनी पहचान बदलने और छुपने में सहायता दी।

जांच टीमों को यह भी जानकारी मिली है कि शाहीन ने अपने फर्जी पते का इस्तेमाल मोबाइल सिम कार्ड प्राप्त करने के लिए किया था। उसका सबसे इस्तेमाल किया गया नंबर उसी समय जारी किया गया था, जब उसने फरीदाबाद के धौज कस्बे में स्थित एक मस्जिद का पत्ता फर्जी आधार के रूप में दे दिया था। ऐसा अनुमान है कि यह उसकी आतंकवादी गतिविधियों और संपर्कों को छिपाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

इसके अलावा, शाहीन की यात्रा इतिहास ने और भी चौंका देने वाले तथ्य पेश किए। उसने 2013 में कानपुर में अपनी नौकरी छोड़ दी थी और उसके बाद थाईलैंड की यात्रा भी की थी, जो खुफिया एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है, क्योंकि दक्षिण-पूर्व एशिया में आतंकी हैंडलर्स की सक्रियता जानी जाती है।

शाहीन के बैंक खातों का विवरण भी जांच का केंद्र बना हुआ है। एजेंसियों के अनुसार, उसके 7 बैंक खाते मिले हैं, जिनमें पिछले कई वर्षों में बड़े लेन-देन हुए हैं। यह वित्तीय पड़ताल यह दर्शाती है कि शाहीन सिर्फ सिम और पहचान छुपाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसने अपने आतंकवादी नेटवर्क को आर्थिक रूप से भी मजबूती देने का काम किया था।

विशेष रूप से, एजेंसियों का मानना है कि शाहीन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग “जमात-ए-मोमिनात” के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही थी। प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिलता है कि उसे सीधे JeM के उच्च नेतृत्व — संभवतः पाकिस्तान स्थित — से संपर्क था।

उसकी पहचान और गतिविधियों की गूढ़ता उसकी पेशेवर पृष्ठभूमि में भी मौजूद है। शाहीन पहले एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर थीं, लेकिन उन्होंने 2013 में नौकरी छोड़ दी थी। यह मोड़ बहुत मायने रखता है क्योंकि उसके उसी समय UAE प्रवास की खबरें सामने आई थीं और विशेषज्ञों का अनुमान है कि वहीं से उसने JeM नेटवर्क में पूरी तरह सक्रिय भूमिका संभाली।

जांचकर्ताओं के मुताबिक, शाहीन की कार से AK-47 राइफल और ज़िंदा कारतूस भी बरामद हुए थे, जो उसकी आतंकवादी भूमिका की गहनता को दर्शाते हैं।  इस तरह का हथियार रखना न सिर्फ खतरनाक है बल्कि यह संकेत देता है कि उसकी भूमिका सिर्फ वित्तीय या नेटवर्किंग तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह वास्तविक, हिंसक आतंकवादी गतिविधियों से भी जुड़ी हुई थी।

उसके परिवार और संपर्क भी जांच की कड़ी में हैं। उसकी आवाजाही और संपर्कों की पड़ताल करते हुए, एजेंसिया उसके भाई डॉ. परवेज अंसारी के नाम पर दर्ज पते को भी देख रही हैं। ऐसी आशंका है कि शाहीन ने परिवार के पते का इस्तेमाल अपनी पहचान को छुपाने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए log-istics तैयार करने में किया था।

शाहीन की गिरफ्तारी और उसके नेटवर्क की पड़ताल उस दिल्ली कार बम विस्फोट मामले से जुड़ी जांच का भी हिस्सा है। एजेंसियों का मानना है कि उसके नेटवर्क ने बड़े पैमाने पर हमला की योजना बनाई थी और उसके अत्याधुनिक छिपे पहचान सक्रिय रूप से उसका उपयोग कर रही थी।

यह मामला सिर्फ एक डॉक्टर की गिरफ़्तारी नहीं है; यह आतंकवाद की महिला भागीदारी, पहचान छिपाने की रणनीतियाँ, और आधुनिक आतंकवादी नेटवर्क की जटिल वित्तीय और लॉजिस्टिक संरचनाओं की एक पूरी कड़ी को उजागर करता है। शाहीन की कहानी दिखाती है कि कैसे पेशेवर जीवन (जैसे चिकित्सा) एक आतंकवादी जीवन का मुखौटा बन सकता है, और कैसे पहचान को बदलकर और छिपाकर आतंकवादी नेटवर्क अधिक सुरक्षित और गहरे रूप में काम कर सकते हैं।

जांच एजेंसियों ने यह भी कहा है कि अब वे उसके पूरे नेटवर्क, फर्जी पते, यात्रा इतिहास, पहचान दस्तावेज़ों और वित्तीय लेनदेन की रूढ़ि गहराई से देख रही हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि शाहीन ने किस हद तक JeM को समर्थन दिया और उसकी गतिविधियों का दायरा कितना व्यापक था। यह मामला यह भी सवाल उठाता है कि आतंकवादी संगठन कैसे उच्च शिक्षा और पेशेवर प्रोफाइल वालों को प्रमुख भूमिका देने के लिए प्रयुक्त करते हैं।

अंत में, डॉक्टर शाहीन की गिरफ्तारी और खुलासे यह स्पष्ट करते हैं कि आतंकवाद अब सिर्फ जमीन स्तर पर सीमित नहीं है — यह पहचान की राजनीति, वित्तीय नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कवर का इस्तेमाल कर आधुनिक रूप ले चुका है। उसके तीन पासपोर्ट, तीन पते, फर्जी SIM, बैंक खाते और यात्रा रिकॉर्ड — यह सभी मिलकर एक रणनीतिक आतंकवादी रणनीति का हिस्सा हैं, जिसे एजेंसियाँ धीरे-धीरे अलग-अलग खोल रही हैं।

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