
भारत में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क पिछले एक दशक में जितना खतरनाक और संगठित हुआ है, उतना पहले कभी नहीं रहा। विशेष रूप से लॉरेंस बिश्नोई और अनमोल बिश्नोई के नाम अब केवल किसी गैंग के मुखिया के तौर पर नहीं, बल्कि एक विशाल क्राइम सिंडिकेट के केंद्र के रूप में उभर चुके हैं। इन दोनों के इर्द-गिर्द खड़ा किया गया अपराधी तंत्र इतना विस्तृत हो चुका है कि इसमें देश-विदेश के कई खूंखार अपराधी सक्रिय हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी इस बात की पुष्टि कर चुकी हैं कि यह नेटवर्क सिर्फ दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें कुल 11 से अधिक गैंगस्टर शामिल हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में अपराध को अंजाम देते हैं।
इस विस्तृत क्राइम सिंडिकेट में नौ ऐसे गैंगस्टर शामिल हैं, जिन्होंने हत्या, फिरौती, स्मगलिंग, सुपारी किलिंग, जेल से ऑपरेशन और हथियारों की तस्करी जैसे अनगिनत मामलों में अपनी भूमिका निभाई है। यह सिंडिकेट सिर्फ भारतीय राज्यों तक सीमित नहीं, बल्कि नेपाल, दुबई और कनाडा जैसे देशों से भी संचालित होता है। इस पूरे नेटवर्क को समझने के लिए इन नौ अपराधियों की पृष्ठभूमि, उनकी भूमिका और उनकी कार्यप्रणाली को विस्तार से जानना बेहद जरूरी है।
1. गोल्डी बराड़ – विदेश में बैठा मास्टरमाइंड
गोल्डी बराड़ का नाम पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री से लेकर कई राज्यों में फैले गैंगवार मामलों में शामिल रहा है। विदेश में रहते हुए वह लॉरेंस और अनमोल के नेटवर्क का अहम हिस्सा बना हुआ है।
-
कई मशहूर हस्तियों पर हमले की धमकी देना
-
फिरौती मांगना
-
सोशल मीडिया के जरिए डर फैलाना
बराड़ इस क्राइम सिंडिकेट का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है।
2. सुख त्यागी – हथियारों की बड़ी सप्लाई चेन का प्रभारी
सुख त्यागी इस क्राइम नेटवर्क के हथियार आपूर्ति विभाग को संभालता है। बताया जाता है कि
-
हथियार नेपाल और पाकिस्तान रूट से भारत में प्रवेश कराए जाते हैं
-
इसके बाद इन्हें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिम यूपी में बांटा जाता है
त्यागी की भूमिका इतनी व्यापक है कि कई बड़े ऑपरेशन उसके इशारे पर चलते हैं।
3. गिरीश उर्फ गोगी के करीबी — दिल्ली-एनसीआर के गैंगस्टर
गोगी के करीबी कई अपराधी अब भी बिश्नोई गिरोह के साथ खड़े हैं। ये दिल्ली-एनसीआर में
-
सुपारी किलिंग
-
जमीन कब्जा
-
बिजनेस एक्सटॉर्शन
जैसे अपराधों को अंजाम देते हैं।
इनका नेटवर्क मेट्रो सिटी में बेहद मजबूत और तेजी से फैल रहा है।
4. कमलजीत उर्फ कमला – नेपाल रूट कनेक्शन
कमलजीत इस नेटवर्क का नेपाल लिंक संभालता है। बताया जाता है कि
-
भागे हुए अपराधियों को नेपाल में ठिकाना देना
-
नेपाल-भारत सीमा के जरिए अवैध मूवमेंट
-
हथियार और ड्रग्स की तस्करी
उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं।
इसकी वजह से बिश्नोई गिरोह का सीमा पार संचालित नेटवर्क और भी मजबूत हो गया है।
5. हैप्पी संघेरा – कनाडा कनेक्शन
कैनेडियन गैंग से जुड़ा हैप्पी संघेरा बिश्नोई गिरोह का अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन संभालता है।
-
विदेशों में छुपे गैंगस्टरों की गतिविधियों को समन्वित करना
-
ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर
-
धमकी भरे वीडियो जारी करना
संघेरा की वजह से यह सिंडिकेट भारत के बाहर भी सक्रिय बना हुआ है।
6. रोहित गोगी ग्रुप – दिल्ली का खतरनाक गठजोड़
रोहित और उसके साथी बिश्नोई नेटवर्क में इसलिए शामिल हुए क्योंकि दोनों का दुश्मन एक ही था—दुश्मन गैंग।
-
कई शूटआउट घटनाओं में इनकी भूमिका सामने आ चुकी है
-
दिल्ली में जमीन विवादों में इनकी सक्रिय भागीदारी रहती है
-
पुलिस को कई बार इनकी लोकेशन ट्रैक करने में कठिनाई हुई है
7. दीपक “बॉक्सर” – जेल से संचालित किलिंग मॉड्यूल
दीपक बॉक्सर एक समय दिल्ली पुलिस के टॉप मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था।
वर्तमान में भी वह
-
जेल से ही गैंग ऑपरेशन
-
फिरौती
-
शूटर्स की टीम तैयार करना
जैसे काम करता है।
उसकी चतुराई और तकनीकी जानकारी के कारण उसका मॉड्यूल बेहद खतरनाक और कठिनाई से पकड़ में आने वाला है।
8. प्रणव ठाकुर – छोटे शहरों में तेजी से फैलता नेटवर्क
प्रणव ठाकुर का काम बड़े शहरों में नहीं, बल्कि छोटे जिलों में बिश्नोई नेटवर्क का विस्तार करना है।
-
नई भर्ती
-
स्थानीय अपराधियों का साथ
-
छोटे व्यवसायियों से उगाही
इन जिम्मेदारियों की वजह से यह गिरोह उत्तर भारत के हर छोटे क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है।
9. अर्श डल्ला – इंटरनेशनल गैंगवार का खिलाड़ी
अर्श डल्ला का नाम कई भारतीय खुफिया रिपोर्टों में सामने आया है।
-
वह कई इंटरनेशनल गैंगस्टरों से जुड़ा हुआ है
-
विदेशी हथियार सप्लाई
-
विदेशी इकाइयों से फंडिंग
उसके प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है।
उसका इंटरनेशनल नेटवर्क बिश्नोई सिंडिकेट को ग्लोबल स्तर पर ताकत देता है।
कैसे काम करता है यह पूरा सिंडिकेट?
यह क्राइम नेटवर्क बेहद संगठित और आधुनिक तरीके से काम करता है।
-
विदेश में बैठे मास्टरमाइंड
सुरक्षित जगहों से सोशल मीडिया, VOIP कॉल और कोड भाषा में आदेश भेजते हैं। -
स्थानीय ग्रुप
जमीन कब्जा, फिरौती वसूलने और शूटर्स को तैनात करने का काम संभालते हैं। -
डिजिटल मोड्यूलेशन
वर्चुअल नंबर, क्रिप्टो करेंसी और VPN का इस्तेमाल बढ़ गया है। -
सीमा पार नेटवर्क
नेपाल और दुबई जैसे स्थान सुरक्षित ठिकानों में गिने जाते हैं।
पुलिस और खुफिया एजेंसियों की चुनौती
इस नेटवर्क के फैलाव की वजह से
-
कई राज्यों की पुलिस को समन्वय करना पड़ता है
-
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद लेनी पड़ती है
-
कई अपराधी अलग-अलग देशों में छिपे हैं
-
शूटर्स को ट्रेनिंग देना और उन्हें बदले गए नामों से छिपाना भी आम बात हो गई है
यह सिंडिकेट अब केवल एक गिरोह नहीं बल्कि एक संगठित अपराध संरचना बन चुका है।
निष्कर्ष
लॉरेंस और अनमोल बिश्नोई इस बड़े अपराधी नेटवर्क के केंद्र जरूर हैं, लेकिन यह सिंडिकेट केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि 9 और बेहद खतरनाक गैंगस्टरों के संयुक्त संचालन से चल रहा है।
इनका फैलता नेटवर्क भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगातार इनकी गतिविधियों पर नज़र रख रही हैं, लेकिन इनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और टेक्नोलॉजी के आधुनिक इस्तेमाल ने इनकी पकड़ को और मुश्किल बना दिया है। यह समझना जरूरी है कि यह सिंडिकेट अब किसी एक राज्य या देश की समस्या नहीं, बल्कि एक बहुस्तरीय अपराध ढांचा है, जिसे खत्म करने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है।