रांची वनडे में मिली जीत पर भी छाया मोहम्मद शमी की कमी का साया, पूर्व दिग्गज ने सेलेक्टर्स पर उठाए सवाल

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भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच रांची में खेले गए पहले वनडे मैच में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी तक कई खिलाड़ियों ने बेहतरीन योगदान दिया, लेकिन इसके बावजूद टीम की इस जीत पर एक कमी का एहसास जरूर नजर आया—तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की अनुपस्थिति। इसी मुद्दे पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और अनुभवी क्रिकेट विश्लेषक मोहम्मद कैफ ने चयनकर्ताओं को निशाने पर लिया है। उनका कहना है कि शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज को नजरअंदाज करना समझ से परे है, खासकर तब जब उन्होंने अपने हालिया प्रदर्शन से यह साबित किया है कि वे अभी भी भारत के सबसे प्रभावी पेसरों में से एक हैं।

कैफ ने अपने बयान में यह भी कहा कि चैंपियंस ट्रॉफी में शमी के प्रदर्शन को ध्यान में रखे बिना टीम चयन करना किसी बड़ी चूक से कम नहीं है। उन्होंने माना कि रांची वनडे में टीम इंडिया ने भले ही जीत हासिल की हो, लेकिन तेज गेंदबाजी के मोर्चे पर जो घनत्व और अनुभव चाहिए होता है, उसकी कमी साफ महसूस हुई। भुवनेश्वर, हर्षित और अर्शदीप जैसे गेंदबाजों ने अपनी क्षमताओं के अनुसार अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन शमी के अनुभव और उनकी विकेट लेने की क्षमता की बराबरी कोई और अभी नहीं कर पा रहा।

कैफ ने आगे यह भी कहा कि रांची की पिच पर शुरुआत में तेज गेंदबाजों के लिए अच्छा खासा मूवमेंट मिल रहा था। अगर उस समय शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज आक्रमण में होते, तो दक्षिण अफ्रीका की टीम और भी ज्यादा दबाव में आ सकती थी। उन्होंने कार्रवाई करते हुए कहा कि भारत की टीम को बड़े टूर्नामेंटों और महत्वपूर्ण दौरों के लिए सिर्फ युवाओं पर निर्भर होकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। अनुभव और युवा जोश का संतुलन ही टीम को जीत के करीब ले जाता है। हालांकि चयनकर्ता अलग सोच रखते हैं और शायद भविष्य को ध्यान में रखते हुए युवा गेंदबाजों पर भरोसा कर रहे हैं, लेकिन कैफ का मानना है कि इससे टीम को नुकसान हो सकता है।

मोहम्मद शमी ने हाल के बड़े टूर्नामेंटों में बेजोड़ प्रदर्शन किया है। चैंपियंस ट्रॉफी में उन्होंने जितने भी मौके मिले, उनमें अगुवाई करते हुए विकेट चटकाए। उनकी सटीक लाइन-लेंथ और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग कराने की कला ने कई बार विपक्षी टीमों का संतुलन बिगाड़ा है। इसीलिए कैफ मानते हैं कि शमी का टीम में न होना भारत के लिए एक बड़ी कमजोरी है। उन्होंने यह भी कहा कि शमी बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं। जब भी टीम मुश्किल में होती है या किसी ब्रेकथ्रू की जरूरत होती है, तब शमी ने हमेशा भारत को राहत दिलाई है।

रांची वनडे में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए एक अच्छा स्कोर बोर्ड पर लगाया। कोहली और रोहित ने शानदार साझेदारी की। मध्य क्रम ने भी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। गेंदबाजी में कुलदीप यादव और हर्षित राणा का प्रदर्शन काबिल-ए-तारीफ रहा। कुलदीप ने अपनी फिरकी से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया, जबकि हर्षित ने अपनी तेज रफ्तार और अच्छी लाइन-लेंथ से विकेट चटकाए। लेकिन इन सभी के बावजूद कैफ को लगता है कि अगर शमी उपलब्ध होते, तो भारतीय गेंदबाजी और भी प्रभावी हो सकती थी।

उन्होंने चयनकर्ताओं को यह संदेश भी दिया कि खिलाड़ियों को रोटेशन पॉलिसी के नाम पर लंबे समय तक बाहर बैठाना सही नहीं है। फिट और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को नियमित रूप से प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनाए रखना चाहिए, खासकर तब जब उनके अनुभव की टीम को सख्त जरूरत हो। शमी की फिटनेस को लेकर भी कैफ ने कहा कि वह पूरी तरह से तैयार हैं और उन्हें मैदान पर उतरने का मौका मिलना चाहिए।

कैफ ने यह भी कहा कि टीम संयोजन में बदलाव करते समय चयनकर्ताओं को खिलाड़ियों के हालिया प्रदर्शन और बड़े मैचों की मानसिक मजबूती को भी देखना चाहिए। युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा पर किसी को शक नहीं है, लेकिन जब बड़े टूर्नामेंटों में दबाव बढ़ता है, तब अनुभवी खिलाड़ी ही टीम को सही दिशा दिखाते हैं। शमी का यह अनुभव टीम इंडिया के लिए एक अनमोल संपत्ति है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारतीय क्रिकेट में यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है कि किसी एक बड़े टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को अगले सीरीज़ में आराम दे दिया जाता है। इससे खिलाड़ी की लय प्रभावित होती है और उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित हो सकता है। कैफ का कहना है कि शमी को लगातार बाहर बैठाना टीम और खिलाड़ी दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

रांची की जीत के बाद भी कैफ की आलोचना इस बात को दर्शाती है कि टीम इंडिया में बदलाव की जरूरत है, लेकिन यह बदलाव सोच-समझकर होना चाहिए। उन्होंने चयनकर्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि विश्व स्तरीय टीम बनाने के लिए हर खिलाड़ी का सही उपयोग आवश्यक है। अनुभवी खिलाड़ियों की अनदेखी करना लंबे समय में टीम की कमजोरी बन सकता है।

अंत में कैफ ने उम्मीद जताई कि आने वाले मुकाबलों में चयनकर्ता अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करेंगे और शमी जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को टीम में शामिल कर संतुलित गेंदबाजी आक्रमण तैयार करेंगे। आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में भारत को बेहतरीन प्रदर्शन करना है और उसके लिए अनुभवी, फिट और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों का साथ जरूरी है। रांची में मिली जीत भले ही शानदार थी, लेकिन शमी की कमी ने यह साफ कर दिया कि टीम इंडिया को अपनी रणनीति को और मजबूत बनाने की ज़रूरत है।

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