आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा रूस, तालिबान से रिश्तों पर पुतिन ने दिया बड़ा बयान

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़े रहने का बड़ा संदेश दिया है। एक खास इंटरव्यू में पुतिन ने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में रूस और भारत एक ही पक्ष में खड़े हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान के संदर्भ में तालिबान से पूरी तरह दूरी बनाना समाधान नहीं है, बल्कि संवाद के जरिए ही हालात को बेहतर बनाया जा सकता है।

पुतिन के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ी कूटनीतिक सोच के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पूरी दुनिया आतंकवाद, कट्टरपंथ और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।


🔹 भारत-रूस की आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई

पुतिन ने कहा कि भारत और रूस लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ एक समान सोच रखते आए हैं। दोनों देशों ने न सिर्फ संयुक्त बयान दिए हैं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर आतंकवाद की कड़ी निंदा भी की है। उनका कहना था कि—

  • आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है

  • यह पूरी मानवता के लिए खतरा है

  • इससे निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बेहद जरूरी है

उन्होंने भारत की नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत हमेशा आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सख्त रुख अपनाता रहा है।


🔹 तालिबान को लेकर पुतिन की संतुलित सोच

पुतिन ने तालिबान को लेकर एक संतुलित और व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में सरकार अब उसी की है, ऐसे में पूरी तरह से संवाद तोड़ लेना हालात को और खराब कर सकता है। उनके मुताबिक—

  • तालिबान से बातचीत जरूरी है

  • अफगानिस्तान के अंदर स्थिरता के लिए संवाद अहम है

  • बातचीत के जरिए ही आतंकियों पर लगाम लगाई जा सकती है

पुतिन ने यह भी कहा कि अफगान सरकार ने अब तक कई ऐसे कदम उठाए हैं जिससे यह संकेत मिलता है कि वे अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को समझ रहे हैं।


🔹 अफगानिस्तान में आतंकवाद पर लगाम का दावा

रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि वर्तमान अफगान सरकार ने आतंकियों पर नियंत्रण के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि—

  • कई आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगी है

  • कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति पहले से बेहतर हुई है

  • सीमा पार आतंकी गतिविधियों को रोकने की कोशिशें तेज हुई हैं

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं और इसमें समय लगेगा।


🔹 भारत के हितों को लेकर रूस की प्रतिबद्धता

पुतिन ने इंटरव्यू में यह भी स्पष्ट किया कि भारत के सुरक्षा हित रूस के लिए बेहद अहम हैं। उन्होंने कहा कि—

  • भारत रूस का भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है

  • रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है

  • आतंकवाद के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करने पर भी दोनों देशों के बीच तालमेल मजबूत हुआ है

उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में इस सहयोग को और अधिक मजबूत किया जाएगा।


🔹 पाकिस्तान और वैश्विक राजनीति पर भी असर

पुतिन के इस बयान को केवल भारत और अफगानिस्तान तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका असर पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों की रणनीति पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • रूस का यह रुख पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ा सकता है

  • आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और ज्यादा सख्त रुख अपना सकता है

  • अफगानिस्तान में बैठकर आतंकी गतिविधियां चलाने वालों पर वैश्विक नजर तेज होगी


🔹 संवाद क्यों जरूरी है—पुतिन की दलील

पुतिन ने यह भी समझाया कि किसी भी देश को पूरी तरह अलग-थलग कर देने से हालात और बिगड़ सकते हैं। उनका कहना था कि—

  • अलगाव नीति से कट्टरपंथ बढ़ता है

  • संवाद से जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों बढ़ती हैं

  • बातचीत के जरिए ही सुधार की उम्मीद की जा सकती है

उन्होंने कहा कि रूस किसी भी सरकार को उसके कर्मों के आधार पर आंकता है, न कि केवल राजनीति के आधार पर।


🔹 भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति को मिली वैश्विक मजबूती

पुतिन के इस बयान के बाद भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिली है। भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि—

  • आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए

  • आतंकवाद और उसे पनाह देने वालों को एक ही नजर से देखा जाना चाहिए

  • दोहरे मापदंड खत्म होने चाहिए

रूस जैसे बड़े वैश्विक शक्ति का खुलकर समर्थन करना भारत की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।


🔹 रूस-भारत रिश्तों में नया आयाम

पुतिन के बयान से यह भी साफ हो गया है कि भारत और रूस के रिश्ते केवल रक्षा सौदों या व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब यह साझेदारी आतंकवाद, वैश्विक शांति और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे बड़े मुद्दों तक भी फैल चुकी है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि—

  • आने वाले समय में संयुक्त सैन्य अभ्यास और बढ़ेंगे

  • आतंकवाद से निपटने के लिए साझा रणनीति मजबूत होगी

  • अफगानिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं


🔹 वैश्विक संदेश: आतंक के खिलाफ एकजुटता जरूरी

पुतिन के इस बयान को एक वैश्विक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी एक देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है। उन्होंने परोक्ष रूप से यह संकेत भी दिया कि—

  • धर्म, राजनीति या क्षेत्र के नाम पर आतंक को जायज ठहराना खतरनाक है

  • आतंकवाद से कोई देश सुरक्षित नहीं है

  • केवल सख्त कार्रवाई और संवाद—दोनों का संतुलन ही समाधान है


निष्कर्ष

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह बयान साफ करता है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत और रूस एक मजबूत रणनीतिक साझेदार बने रहेंगे। साथ ही तालिबान को लेकर संवाद की नीति अपनाने का उनका नजरिया यह भी दिखाता है कि रूस केवल टकराव नहीं, बल्कि समाधान के रास्ते पर चलना चाहता है।

भारत के लिए यह बयान कूटनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि इससे न सिर्फ उसकी आतंकवाद विरोधी नीति को समर्थन मिला है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति और मजबूत हुई है।

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