इंडिगो को DGCA की 24 घंटे की चेतावनी: जवाब नहीं दिया तो तय है सख्त कार्रवाई

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देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो एक बार फिर गंभीर संकट में घिरती नजर आ रही है। लगातार उड़ानें रद्द होने, यात्रियों की परेशानी और संचालन में भारी लापरवाही के बाद अब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इंडिगो को अंतिम चेतावनी दे दी है। DGCA ने इंडिगो के जवाबदेह प्रबंधक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए सिर्फ 24 घंटे की मोहलत दी है। साफ शब्दों में कहा गया है कि अगर तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो एयरलाइन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

लगातार उड़ानें रद्द, यात्रियों का टूटा भरोसा

बीते कई दिनों से इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। कभी तकनीकी खराबी का बहाना तो कभी ऑपरेशनल कारणों का हवाला देकर फ्लाइट्स कैंसिल की जा रही हैं। इससे पूरे देश में हजारों यात्री बुरी तरह फंसे हुए हैं। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों के एयरपोर्ट पर भारी अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है।

यात्रियों को न तो समय पर कोई जानकारी मिल पा रही है और न ही संतोषजनक रिफंड या वैकल्पिक व्यवस्था। कई यात्रियों को होटल, खाने और ट्रांसपोर्ट के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

DGCA ने क्यों जारी किया शो-कॉज नोटिस?

DGCA ने इंडिगो को यह शो-कॉज नोटिस बार-बार नियमों के उल्लंघन, ऑपरेशनल फेलियर, यात्रियों को सही जानकारी न देने और सुरक्षा मानकों से समझौता करने के आरोपों में जारी किया है।

DGCA के मुताबिक इंडिगो न सिर्फ उड़ानों का संचालन प्रभावित कर रही है, बल्कि यात्रियों के अधिकारों का भी खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। एविएशन रेगुलेटर का कहना है कि किसी भी एयरलाइन के लिए इतनी बड़ी संख्या में उड़ानों को बिना ठोस वैकल्पिक प्लान के रद्द करना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है।

पहले भी दी गई थी समय-सीमा

DGCA ने पहले इंडिगो को जवाब देने के लिए एक समय-सीमा तय की थी, लेकिन उस अवधि में कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद अब दोबारा सिर्फ 24 घंटे का अंतिम मौका दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक यह विस्तार इसलिए दिया गया है ताकि इंडिगो अपना पक्ष रख सके, पूरी स्थिति स्पष्ट कर सके और यह बता सके कि आने वाले दिनों में वह यात्रियों की परेशानी कैसे कम करेगी।

जवाब नहीं मिला तो क्या होगी कार्रवाई?

DGCA ने साफ संकेत दिया है कि अगर इंडिगो समय पर जवाब नहीं देती या उसका जवाब असंतोषजनक पाया जाता है, तो एयरलाइन पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें शामिल हो सकता है:

  • उड़ानों की संख्या सीमित करना

  • कुछ रूट्स पर ऑपरेशन पर रोक

  • भारी जुर्माना

  • शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई

  • सुरक्षा ऑडिट और विशेष जांच

यह कार्रवाई न सिर्फ इंडिगो की साख को बड़ा झटका दे सकती है, बल्कि शेयर बाजार में भी कंपनी को नुकसान झेलना पड़ सकता है।

सरकार भी सख्त मूड में

नागरिक उड्डयन मंत्रालय पहले ही इंडिगो की लगातार लापरवाही पर नाराजगी जता चुका है। सरकार की ओर से भी यह साफ किया गया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

मंत्रालय का कहना है कि इंडिगो को अपनी ऑपरेशनल क्षमता, मेंटेनेंस सिस्टम और ग्राउंड स्टाफ की जिम्मेदारी तय करनी होगी। सिर्फ तकनीकी कारण बताकर लगातार उड़ानें रद्द करना स्वीकार्य नहीं है।

इंडिगो का पक्ष

इंडिगो की ओर से अब तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान नहीं आया है। हालांकि कंपनी इससे पहले यह कह चुकी है कि कुछ विमानों की तकनीकी जांच, ग्राउंडिंग और वैश्विक सप्लाई चेन समस्याओं के कारण संचालन प्रभावित हुआ है।

कंपनी यह भी दावा कर रही है कि स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है और जल्दी ही उड़ानों का शेड्यूल पटरी पर लौट आएगा।

यात्रियों का फूटा गुस्सा

इस पूरे संकट के बीच सबसे ज़्यादा नुकसान यात्रियों को झेलना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर यात्रियों का गुस्सा साफ नजर आ रहा है। कई यात्रियों ने आरोप लगाया है कि इंडिगो का कस्टमर केयर न फोन उठाता है और न ही ईमेल का सही जवाब देता है।

कुछ यात्रियों ने यह भी कहा कि उन्हें फ्लाइट कैंसिल होने की सूचना तब मिली, जब वे एयरपोर्ट पहुंच चुके थे। इससे उनका समय, पैसा और मानसिक शांति तीनों बर्बाद हुए।

एविएशन सेक्टर पर असर

इंडिगो देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन है और उसका बाजार में बड़ा हिस्सा है। ऐसे में उसकी ओर से लगातार उड़ानों का रद्द होना पूरे एविएशन सेक्टर को प्रभावित कर रहा है। दूसरी एयरलाइंस पर भी दबाव बढ़ गया है, क्योंकि यात्री वैकल्पिक विकल्प खोजने को मजबूर हो रहे हैं।

टिकटों की कीमतों में भी तेजी आई है क्योंकि सप्लाई कम और डिमांड ज्यादा हो गई है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि मैनेजमेंट फेलियर का भी नतीजा है। बड़े स्तर पर ऑपरेशन चलाने वाली एयरलाइन को बैकअप प्लान, स्टाफ ट्रेनिंग और मेंटेनेंस पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

अगर एक एयरलाइन बार-बार ऐसी स्थिति में फंस रही है, तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं उसकी आंतरिक व्यवस्था कमजोर है।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर इंडिगो के अगले 24 घंटे के जवाब पर टिकी है। DGCA का फैसला इस जवाब के आधार पर तय होगा। अगर कंपनी ठोस रोडमैप, यात्रियों को राहत देने की स्पष्ट योजना और ऑपरेशनल सुधार का भरोसा देती है, तो शायद उसे कुछ समय की राहत मिल सकती है। अन्यथा बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

निष्कर्ष

इंडिगो फिलहाल अपने सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही है। DGCA की 24 घंटे की मोहलत कंपनी के लिए आखिरी मौका साबित हो सकती है। अगर समय रहते हालात नहीं संभाले गए, तो इसका असर सिर्फ एक एयरलाइन पर नहीं, बल्कि पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर पर पड़ सकता है। यात्रियों के लिए यह संकट सब्र की बड़ी परीक्षा बन चुका है, वहीं सरकार और रेगुलेटर अब किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।

 

 

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