अंधविश्वास की खूनी परिणति: काले जादू के शक में बुजुर्ग ने दो महिलाओं की बेरहमी से हत्या, गांव में दहशत

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अंधविश्वास जब इंसान की सोच पर हावी हो जाए, तो वह उसे हैवानियत की हद तक ले जा सकता है। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले से सामने आई यह दिल दहला देने वाली घटना इसी सच्चाई का भयावह उदाहरण है। यहां एक 75 वर्षीय बुजुर्ग ने काले जादू के शक में अपनी बहू और बेटे की सास की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी। इस दोहरे हत्याकांड ने न सिर्फ पूरे गांव को दहशत में डाल दिया, बल्कि समाज के सामने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि आज के दौर में भी अंधविश्वास कैसे जानलेवा बन रहा है।

यह वारदात नादिया जिले के एक ग्रामीण इलाके में हुई, जहां आरोपी बुजुर्ग अपने बेटे, बहू और अन्य परिजनों के साथ रहता था। पड़ोसियों के मुताबिक, बुजुर्ग पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से अस्थिर और बेहद शंकालु हो गया था। वह मानने लगा था कि उसके घर में जो बीमारियां और पारिवारिक कलह हो रही हैं, उसके पीछे काले जादू का हाथ है। धीरे-धीरे यह शक इतना गहरा हो गया कि उसने अपनी ही बहू और बेटे की सास को इसका जिम्मेदार मान लिया।

परिवार के लोगों ने कई बार उसे समझाने की कोशिश की कि यह सब उसका भ्रम है, लेकिन बुजुर्ग किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था। गांव वालों का कहना है कि वह अक्सर यह बात दोहराता रहता था कि दोनों महिलाएं उस पर टोना-टोटका कर रही हैं और उसकी जान को खतरा है। यही वह मानसिक स्थिति थी, जिसने अंततः इस भयानक अपराध को जन्म दिया।

घटना वाले दिन सुबह का समय था। घर में रोज़मर्रा की तरह काम चल रहा था। अचानक बुजुर्ग ने घर में रखी कुल्हाड़ी उठाई और बिना किसी चेतावनी के दोनों महिलाओं पर हमला कर दिया। पहली वार में ही दोनों गंभीर रूप से घायल हो गईं। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बुजुर्ग ने कई बार वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों महिलाओं की मौके पर ही मौत हो चुकी थी और आरोपी बुजुर्ग खून से सनी कुल्हाड़ी के साथ वहीं खड़ा था। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और किसी तरह आरोपी को काबू में रखा।

पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोपी बुजुर्ग को हिरासत में ले लिया गया और उससे पूछताछ शुरू की गई। शुरुआती बयान में उसने साफ कहा कि उसे यकीन था कि दोनों महिलाएं काला जादू कर रही थीं और अगर उसने उन्हें नहीं मारा होता, तो वे उसकी जान ले लेतीं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला पूरी तरह अंधविश्वास से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी कई बार इसी तरह की बातें करता था और परिवार के लोगों पर शक जताता था। हालांकि, किसी भी तरह के टोना-टोटके या काले जादू का कोई सबूत अब तक नहीं मिला है।

इस घटना ने पूरे गांव में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि शांत स्वभाव का माना जाने वाला यह बुजुर्ग ऐसा जघन्य अपराध कर सकता है। गांव में मातम का माहौल है और लोग सदमे में हैं कि अंधविश्वास किस हद तक इंसान को अंधा बना सकता है।

मृतक महिलाओं के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि वे किसी भी तरह के अंधविश्वास में विश्वास नहीं करती थीं और सिर्फ एक बुजुर्ग के भ्रम की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। परिवार ने आरोपी के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर उम्र, बीमारी और अकेलेपन की भूमिका अहम होती है। बढ़ती उम्र में कई लोग मानसिक अस्थिरता, भ्रम और भय का शिकार हो जाते हैं। अगर समय रहते ऐसे लोगों की काउंसलिंग और इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति खतरनाक रूप ले सकती है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अंधविश्वास समाज में गहरे तक फैला हुआ है। जब किसी व्यक्ति को बीमारी, पारिवारिक तनाव या असफलता का सामना करना पड़ता है, तो वह वैज्ञानिक कारणों की बजाय टोना-टोटका जैसे विचारों की ओर झुक जाता है। यही सोच धीरे-धीरे हिंसा में बदल सकती है।

इस घटना के बाद प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने गांव में जागरूकता अभियान चलाने की बात कही है। उनका कहना है कि लोगों को यह समझाना जरूरी है कि बीमारी और समस्याओं का समाधान अंधविश्वास नहीं, बल्कि चिकित्सा और संवाद है। साथ ही, मानसिक रूप से अस्वस्थ बुजुर्गों और अकेले रहने वाले लोगों पर परिवार और समाज की निगरानी भी जरूरी है।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दोहरे हत्याकांड का मामला दर्ज कर लिया है। उम्र ज्यादा होने के बावजूद, कानून के तहत उस पर वही कार्रवाई होगी, जो किसी भी अन्य आरोपी पर होती है। साथ ही, उसकी मानसिक स्थिति की भी मेडिकल जांच कराई जाएगी, ताकि यह तय किया जा सके कि अपराध के वक्त वह मानसिक रूप से कितना सक्षम था।

यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। आज के दौर में भी जब विज्ञान और शिक्षा का बोलबाला है, तब भी अंधविश्वास कैसे लोगों की जिंदगी तबाह कर रहा है, यह घटना उसी का प्रमाण है।

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी टोना-टोटका और काले जादू को लेकर डर गहराई से मौजूद है। जब तक इस डर को शिक्षा, जागरूकता और संवाद के जरिए दूर नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना मुश्किल हैं।

कुल मिलाकर, नादिया जिले का यह दोहरा हत्याकांड यह दिखाता है कि अंधविश्वास सिर्फ एक गलत धारणा नहीं, बल्कि एक खतरनाक सामाजिक बीमारी है। इस बीमारी का इलाज कानून से ज्यादा समाज की सोच बदलने में है। अगर समय रहते हम ऐसी मानसिकता को चुनौती नहीं देंगे, तो इसकी कीमत मासूम लोग अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे।

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