
कड़ी मेहनत और लंबे इंतजार के बाद जब परीक्षा का दिन आता है, तो एक छोटी सी तकनीकी चूक भी हजारों युवाओं के सपनों को झकझोर देती है। कानपुर के महाराजपुर इलाके में स्थित एमजीए कॉलेज में आयोजित दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के साथ ठीक यही हुआ। सर्वर खराबी के चलते परीक्षा को बीच में ही रद्द करना पड़ा, जिसके बाद परीक्षा केंद्र पर भारी हंगामा हुआ और हालात तनावपूर्ण हो गए।
यह परीक्षा दिल्ली पुलिस में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। दूर-दराज के इलाकों से आए सैकड़ों अभ्यर्थी सुबह से ही परीक्षा केंद्र पर पहुंच चुके थे। कई ने रात भर यात्रा कर समय पर पहुंचने की कोशिश की थी, तो कई ने परीक्षा के लिए महीनों की तैयारी की थी। लेकिन परीक्षा शुरू होने से पहले ही तकनीकी खामी ने पूरे आयोजन को ठप कर दिया।
परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी और जैसे ही अभ्यर्थी लॉग-इन करने लगे, सिस्टम में दिक्कतें सामने आने लगीं। कुछ कंप्यूटरों पर सर्वर कनेक्ट नहीं हो रहा था, तो कुछ में स्क्रीन फ्रीज हो जा रही थी। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें लॉग-इन आईडी और पासवर्ड डालने के बाद भी प्रश्न पत्र नहीं खुल पाया।
शुरुआत में केंद्र प्रशासन ने तकनीकी टीम को बुलाकर समस्या दूर करने की कोशिश की। अभ्यर्थियों को इंतजार करने के लिए कहा गया और परीक्षा शुरू होने का समय कई बार टाल दिया गया। लेकिन एक घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी सर्वर की समस्या ठीक नहीं हो सकी।
धीरे-धीरे अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब देने लगा। बाहर खड़े परीक्षार्थियों ने नारेबाजी शुरू कर दी और परीक्षा रद्द करने या दोबारा कराने की मांग उठने लगी। कई छात्रों का कहना था कि यह सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही है।
केंद्र के बाहर देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई। कुछ अभ्यर्थी रोते नजर आए, तो कुछ गुस्से में प्रशासन पर सवाल उठाने लगे। उनका कहना था कि वे किराया, रहना-खाना और समय खर्च करके यहां पहुंचे थे, लेकिन एक सर्वर खराबी ने उनका पूरा दिन बर्बाद कर दिया।
स्थिति बिगड़ती देख केंद्र प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि हालात नियंत्रण में रहें। इसी बीच आधिकारिक रूप से यह घोषणा की गई कि तकनीकी कारणों से परीक्षा रद्द की जा रही है और नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
यह ऐलान होते ही हंगामा और तेज हो गया। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि हर बार तकनीकी कारणों का बहाना बनाकर परीक्षाएं या तो रद्द कर दी जाती हैं या फिर टाल दी जाती हैं, जिससे छात्रों का मानसिक और आर्थिक नुकसान होता है।
कुछ छात्रों का कहना था कि उन्होंने नौकरी की उम्मीद में अन्य मौके छोड़ दिए थे और यह परीक्षा उनके लिए बेहद अहम थी। बार-बार परीक्षा रद्द होने से उनका आत्मविश्वास टूट रहा है और सिस्टम पर भरोसा खत्म होता जा रहा है।
केंद्र प्रशासन की ओर से बताया गया कि सर्वर पूरी तरह डाउन हो गया था और बैकअप सिस्टम भी समय पर काम नहीं कर सका। उनके मुताबिक, परीक्षा निष्पक्ष तरीके से कराना संभव नहीं था, इसलिए रद्द करने का फैसला लिया गया।
हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि यह समस्या अचानक नहीं आई होगी। अगर पहले से सिस्टम की जांच ठीक से की जाती, तो इतनी बड़ी अव्यवस्था से बचा जा सकता था। उन्होंने मांग की कि परीक्षा एजेंसी और केंद्र प्रशासन की जवाबदेही तय की जाए।
इस घटना ने एक बार फिर देश में ऑनलाइन परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते कुछ वर्षों में कई बड़ी परीक्षाओं में सर्वर फेल, बिजली कटौती और सॉफ्टवेयर खराबी जैसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षा व्यवस्था को लागू करने से पहले मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्याप्त बैकअप और प्रशिक्षित तकनीकी टीम होना जरूरी है। सिर्फ कागजों पर डिजिटल सिस्टम बना देने से समस्या हल नहीं होती, बल्कि जमीनी स्तर पर उसकी नियमित जांच भी जरूरी है।
कानपुर की इस घटना में कई अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र पर व्यवस्थाएं पहले से ही कमजोर थीं। कंप्यूटर पुराने थे, नेटवर्क धीमा था और तकनीकी स्टाफ की संख्या भी कम थी। ऐसे में किसी भी समय सिस्टम फेल होना लगभग तय था।
परीक्षा रद्द होने के बाद कई छात्र देर तक केंद्र के बाहर बैठे रहे और अधिकारियों से बात करने की कोशिश करते रहे। उनका कहना था कि नई तारीख जल्दी घोषित की जाए और उन्हें यात्रा खर्च या नुकसान की भरपाई के लिए कोई ठोस आश्वासन दिया जाए।
प्रशासन की ओर से फिलहाल सिर्फ इतना कहा गया है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और सभी अभ्यर्थियों को इसकी सूचना आधिकारिक माध्यम से दी जाएगी। लेकिन नई तारीख, प्रक्रिया और संभावित मुआवजे को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
यह मामला सिर्फ एक परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है। यह उस बड़ी समस्या की ओर इशारा करता है, जिसमें लाखों युवाओं का भविष्य तकनीकी व्यवस्था की कमजोरी पर टिका हुआ है। हर साल करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं, और एक दिन की चूक उनके पूरे करियर की दिशा बदल सकती है।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी घटनाएं युवाओं में तनाव, निराशा और असुरक्षा की भावना को बढ़ाती हैं। लगातार असफल व्यवस्थाएं उन्हें यह महसूस कराने लगती हैं कि मेहनत के बावजूद सिस्टम उनके साथ न्याय नहीं कर पा रहा।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी नाराजगी देखने को मिली। कई यूजर्स ने ऑनलाइन परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और मांग की कि जब तक तकनीकी ढांचा मजबूत न हो, तब तक बड़े स्तर पर ऐसी परीक्षाएं आयोजित न की जाएं।
कुल मिलाकर, महाराजपुर के एमजीए कॉलेज में परीक्षा रद्द होना सिर्फ एक तकनीकी घटना नहीं है, बल्कि यह चेतावनी है कि डिजिटल व्यवस्था को बिना पुख्ता तैयारी लागू करना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बन सकता है। अगर प्रशासन ने इस बार भी इसे मामूली घटना मानकर छोड़ दिया, तो आने वाले समय में ऐसे हंगामे और निराशा बार-बार देखने को मिलेंगे।
अब सबकी नजर इस पर है कि परीक्षा दोबारा कब आयोजित होती है, क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है, और क्या इस घटना से सीख लेकर भविष्य में व्यवस्था को सच में सुधारा जाएगा या नहीं।