
कम उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वाली युवा उद्यमी कनिका टेकरीवाल ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए भावुक खुलासा किया है। ‘Shark Tank India’ में नजर आ चुकीं कनिका ने बताया कि जब वे महज 21 साल की थीं, तब उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा था। डॉक्टरों ने उस समय उनकी हालत को बेहद नाजुक बताया था और कहा था कि उनके पास सिर्फ कुछ दिन ही बचे हैं।
आज वही कनिका न सिर्फ एक सफल एंटरप्रेन्योर हैं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी बन चुकी हैं।
जब जिंदगी ने लिया अप्रत्याशित मोड़
कनिका ने बताया कि 21 साल की उम्र में जब उनका करियर शुरू ही हुआ था, तभी उन्हें कैंसर का पता चला। शुरुआती लक्षणों को उन्होंने सामान्य कमजोरी समझा, लेकिन जांच के बाद सामने आया कि बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी है।
डॉक्टरों ने परिवार को साफ शब्दों में कहा कि हालत नाजुक है और स्थिति नियंत्रण से बाहर जा सकती है। यह सुनना किसी भी युवा के लिए बेहद कठिन होता है।
‘सिर्फ चार दिन जिंदा’ की चेतावनी
कनिका ने साझा किया कि एक समय ऐसा आया जब डॉक्टरों ने कहा कि उनकी जिंदगी के सिर्फ चार दिन बचे हैं। यह वाक्य उनके लिए झकझोर देने वाला था।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इलाज, कीमोथेरेपी और मानसिक मजबूती के सहारे उन्होंने बीमारी का डटकर सामना किया। उनका कहना है कि उस कठिन समय ने उन्हें जीवन की असली कीमत समझाई।
परिवार और दोस्तों का साथ
कनिका ने बताया कि उस दौर में उनके परिवार और दोस्तों का समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। लगातार इलाज, दर्द और मानसिक तनाव के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी।
उनका मानना है कि सकारात्मक सोच और मजबूत इच्छाशक्ति किसी भी चुनौती से लड़ने में अहम भूमिका निभाती है।
बीमारी से बाहर निकलकर नई उड़ान
कैंसर से उबरने के बाद कनिका ने अपने करियर पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने एविएशन सेक्टर में अपनी पहचान बनाई और एक सफल कंपनी खड़ी की।
‘शार्क टैंक इंडिया’ में उनकी मौजूदगी ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। शो में उनकी कहानी और संघर्ष ने निवेशकों और दर्शकों दोनों को प्रभावित किया।
मानसिक ताकत की मिसाल
कनिका का कहना है कि कैंसर से लड़ाई ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद मजबूत बनाया। उन्होंने सीखा कि जिंदगी में चुनौतियां कभी भी आ सकती हैं, लेकिन उनसे भागने के बजाय उनका सामना करना चाहिए।
आज वे युवाओं को संदेश देती हैं कि कठिन परिस्थितियां भी आपको मजबूत बना सकती हैं, यदि आप हार मानने के बजाय आगे बढ़ने का फैसला करें।
प्रेरणा बनी उनकी कहानी
कनिका टेकरीवाल की कहानी सिर्फ बीमारी से जंग की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और साहस की कहानी है। उन्होंने साबित किया कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, हिम्मत और विश्वास से उन्हें पार किया जा सकता है।
उनका सफर आज कई लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है।
निष्कर्ष
21 साल की उम्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझना किसी भी इंसान के लिए कठिन परीक्षा होती है। लेकिन कनिका टेकरीवाल ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। ‘सिर्फ चार दिन जिंदा’ जैसी चेतावनी के बावजूद उन्होंने जिंदगी से हार नहीं मानी और आज एक सफल एंटरप्रेन्योर के रूप में उभरकर सामने आईं।
उनकी कहानी यह सिखाती है कि असली जीत वही है, जब इंसान विपरीत परिस्थितियों में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ता।