
महाराष्ट्र के पुणे से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने एक बार फिर समाज में बेटियों के प्रति भेदभाव और अवैध भ्रूण लिंग जांच के गंभीर मुद्दे को उजागर कर दिया है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है, जो कथित रूप से हर महीने 50 से अधिक अवैध भ्रूण लिंग जांच कर रहा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसके तार कई जिलों तक फैले हुए हो सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार इस रैकेट का मुख्य उद्देश्य गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग बताना था, जो भारतीय कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी गर्भवती महिलाओं को गुप्त रूप से अलग-अलग स्थानों पर ले जाते थे और वहां अवैध तरीके से लिंग जांच करवाई जाती थी। इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी।
जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में एजेंटों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। ये एजेंट ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ऐसे परिवारों की तलाश करते थे जो गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग जानना चाहते थे। इसके बाद उन्हें नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचाया जाता था। अधिकारियों का मानना है कि इसी वजह से यह अवैध कारोबार लंबे समय तक बिना किसी बड़ी बाधा के चलता रहा।
पुलिस को इस नेटवर्क के बारे में सूचना मिलने के बाद विशेष योजना तैयार की गई। इसके तहत निगरानी बढ़ाई गई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई। बाद में की गई कार्रवाई में कई अहम सबूत हाथ लगे, जिनके आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड से कई और नाम सामने आ सकते हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांचकर्ताओं को संदेह है कि रैकेट केवल लिंग जांच तक सीमित नहीं था। कुछ मामलों में अवैध गर्भपात से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और मेडिकल रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही सामने आएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रूण लिंग जांच पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत में प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) कानून लागू है। इस कानून का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना और लिंगानुपात को संतुलित बनाए रखना है। इसके बावजूद समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे रैकेट सामने आते रहते हैं।
महाराष्ट्र लंबे समय से भ्रूण लिंग जांच के खिलाफ अभियान चलाता रहा है। राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से निगरानी अभियान और स्टिंग ऑपरेशन चलाते हैं। हाल के वर्षों में कई जिलों में ऐसी अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद कुछ गिरोह लगातार नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती देने की कोशिश करते रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों का सामने आना केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि समाज में मौजूद लैंगिक भेदभाव की मानसिकता को भी उजागर करता है। बेटियों को लेकर नकारात्मक सोच और पुत्र प्राप्ति की इच्छा ही ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती है। इसलिए केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।
पुणे और आसपास के क्षेत्रों में लिंगानुपात को लेकर पहले भी चिंता व्यक्त की जाती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे अपराधों पर सख्ती से रोक नहीं लगाई गई तो समाज में महिलाओं की संख्या पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग और महिला अधिकार संगठनों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ से कई और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या अन्य जिलों में भी इसी नेटवर्क की शाखाएं सक्रिय थीं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ PCPNDT कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है। इस कानून में जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों की संलिप्तता साबित होने पर उनके लाइसेंस भी रद्द किए जा सकते हैं।
फिलहाल इस कार्रवाई को महाराष्ट्र में अवैध भ्रूण लिंग जांच के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए लगातार निगरानी, कठोर कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता तीनों जरूरी हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।