भारत कभी बाहरी दबाव में नहीं झुकता’: पुतिन का बड़ा बयान, ट्रंप और पश्चिमी देशों को दिया स्पष्ट संदेश

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रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र विदेश नीति की खुलकर सराहना की। अपने संबोधन और मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है जो अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है और किसी बाहरी दबाव या निर्देश के आगे झुकने की परंपरा नहीं रखता।

पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत के रूस के साथ संबंधों और रूसी तेल आयात को लेकर पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है तथा किसी भी तरह का बाहरी दबाव उस नीति को बदल नहीं सकता।

अपने संबोधन में पुतिन ने संकेत दिया कि भारत और रूस के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच दशकों पुराना भरोसा और रणनीतिक साझेदारी मौजूद है। उन्होंने भारत को रूस का “विश्वसनीय साझेदार” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।

रूसी राष्ट्रपति ने भारत की आर्थिक प्रगति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकास कर रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। पुतिन ने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और पश्चिमी देशों के लिए संदेश माना जा रहा है। हाल के वर्षों में भारत ने एक ओर अमेरिका के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत किए हैं, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ रक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक सहयोग भी जारी रखा है। पुतिन ने कहा कि भारत की अमेरिका के साथ बढ़ती साझेदारी रूस-भारत संबंधों के लिए कोई खतरा नहीं है।

SPIEF 2026 के दौरान पुतिन ने BRICS समूह की भी चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर BRICS देशों की आर्थिक हिस्सेदारी G7 देशों से आगे निकल चुकी है। इस संदर्भ में उन्होंने भारत को एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भागीदार बताया, खासकर सूचना प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में उसकी उपलब्धियों का उल्लेख किया।

रक्षा सहयोग का जिक्र करते हुए पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच सैन्य संबंध विश्वास की नींव पर बने हैं। उन्होंने संयुक्त परियोजनाओं, मिसाइल कार्यक्रमों और उन्नत रक्षा तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की। SPIEF के दौरान उन्होंने भारत को Su-57 फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट के संयुक्त विकास और उत्पादन की पेशकश दोहराई।

पुतिन ने यह भी कहा कि किसी भी देश के प्रधानमंत्री या नेतृत्व पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश अपने निर्णय स्वयं लेते हैं और बाहरी शक्तियों द्वारा उन्हें प्रभावित करना आसान नहीं है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार पुतिन का यह बयान केवल भारत-रूस संबंधों की प्रशंसा नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का भी संकेत है। रूस यह संदेश देना चाहता है कि पश्चिमी प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत उसके लिए एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार बना हुआ है।

फिलहाल पुतिन के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, रूस के साथ उसके संबंध और अमेरिका के साथ बढ़ते सहयोग के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गई है।

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