
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब एक नया आर्थिक और कूटनीतिक विवाद सामने आ गया है। अमेरिकी प्रशासन कथित तौर पर एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिसके तहत ईरान की विदेशों में जमी या फ्रीज की गई संपत्तियों का इस्तेमाल उन खाड़ी देशों को मुआवजा देने के लिए किया जा सकता है, जिन्हें हालिया संघर्ष और हमलों के दौरान नुकसान हुआ है। इस योजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी ट्रेजरी विभाग इस बात का आकलन कर रहा है कि कुवैत, बहरीन और अन्य सहयोगी देशों को ईरानी हमलों या संघर्ष से कितना नुकसान हुआ है। इसके बाद उन नुकसानों की भरपाई के लिए ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका के पास और विभिन्न देशों में मौजूद ईरानी संपत्तियों की कुल राशि दर्जनों अरब डॉलर तक हो सकती है। कुछ रिपोर्टों में लगभग 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों का उल्लेख किया गया है, जबकि कुछ आकलनों में इससे कहीं अधिक राशि का भी जिक्र है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ताएं पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। ईरानी नेतृत्व लंबे समय से अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई की मांग करता रहा है। ईरान का कहना है कि इन संपत्तियों को वापस करना किसी भी संभावित समझौते के लिए विश्वास बहाली का महत्वपूर्ण कदम होगा।
हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ा है। अमेरिकी और क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन की ओर मिसाइलों और ड्रोन हमलों के प्रयास किए गए, जिनमें अधिकांश को रोक दिया गया। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में ईरानी संपत्तियों को खाड़ी देशों के पुनर्निर्माण या क्षतिपूर्ति के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इसे तेहरान बेहद आक्रामक कदम के रूप में देख सकता है। इससे पहले से रुकी हुई वार्ताएं और अधिक जटिल हो सकती हैं।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क यह हो सकता है कि उसके सहयोगी देशों को हुए नुकसान की भरपाई आवश्यक है और इसके लिए जिम्मेदार पक्ष से आर्थिक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं आलोचकों का कहना है कि किसी देश की फ्रीज की गई संपत्तियों को इस प्रकार पुनर्निर्देशित करना अंतरराष्ट्रीय कानून और भविष्य की कूटनीतिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा आर्थिक पहलू भी है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजारों को प्रभावित किया है। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और दुनिया भर के ऊर्जा आयातक देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
मध्य पूर्व के जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। यदि ईरानी संपत्तियों को जब्त कर मुआवजे के रूप में उपयोग किया जाता है, तो यह भविष्य के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में एक नई मिसाल बन सकता है। दूसरी ओर, यदि अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की संभावना बनती है, तो इन संपत्तियों की रिहाई बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने इस योजना पर कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन प्रस्ताव पर विचार किए जाने की खबर ने तेहरान, खाड़ी देशों और वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल रणनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है या वास्तव में अमेरिकी नीति का हिस्सा बनने जा रहा है।