ईरान-कतर की गैस डील से दुनिया में मच सकता था ऊर्जा संकट, लेकिन तेहरान ने ठुकराया प्रस्ताव

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ईरान-इजरायल संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कतर ने ईरान के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर चाहता था कि ईरान कुछ ऐसे कदम उठाए जिससे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो और वैश्विक गैस बाजार में स्थिरता बनी रहे। हालांकि तेहरान ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और अपने रणनीतिक हितों पर कायम रहने का फैसला किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता नहीं होता और तनाव बढ़ता रहता, तो इसका सबसे बड़ा असर प्राकृतिक गैस की वैश्विक सप्लाई पर पड़ सकता था। कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी (LNG) निर्यातकों में शामिल है और उसकी गैस आपूर्ति यूरोप, एशिया तथा अन्य कई क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पहले भी संघर्ष के दौरान कतर की ऊर्जा अवसंरचना को नुकसान पहुंचने और उत्पादन क्षमता प्रभावित होने की खबरें सामने आ चुकी हैं।

पश्चिम एशिया में ऊर्जा कारोबार का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए जीवनरेखा माना जाता है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ बनाए रखने पर जोर देता रहा है और उसने कई मौकों पर स्पष्ट किया है कि वह अपने हितों से समझौता नहीं करेगा।

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की चर्चाएं भी तेज हुई हैं। विभिन्न रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि दोनों पक्ष किसी व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कतर की गैस आपूर्ति में बड़ा व्यवधान आता, तो दुनिया भर में गैस और बिजली की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता था। इसका असर उद्योगों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक पड़ता और कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता था। यही वजह है कि कतर और अन्य खाड़ी देश क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं।

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