
देश में RE-NEET 2026 परीक्षा से ठीक पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram को बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली Telegram की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार का फैसला उचित आधार पर लिया गया था और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों को गलत नहीं माना जा सकता।
केंद्र सरकार ने Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध RE-NEET 2026 परीक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाया था। सरकार का दावा था कि प्लेटफॉर्म पर सक्रिय कुछ चैनलों और समूहों के माध्यम से कथित पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्र और परीक्षा से जुड़ी भ्रामक जानकारियां फैल रही थीं। अधिकारियों का कहना था कि इससे लाखों छात्रों को गुमराह किए जाने का खतरा था।
Telegram ने अदालत में दलील दी थी कि पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करना अनुपातहीन कार्रवाई है और इससे भारत के करोड़ों वैध उपयोगकर्ता प्रभावित हो रहे हैं। कंपनी ने दावा किया कि उसने परीक्षा से जुड़े अवैध कंटेंट वाले सैकड़ों लिंक और चैनल पहले ही हटा दिए थे। इसके बावजूद सरकार ने प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगा दी।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि Telegram का इस्तेमाल संगठित नकल गिरोहों और फर्जी पेपर लीक नेटवर्क द्वारा किया जा रहा था। सरकार ने यह भी कहा कि प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई अंतिम विकल्प के रूप में की गई और इससे पहले कई अन्य उपायों पर विचार किया गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रतिबंध लगाने का आदेश उचित कारणों पर आधारित था। अदालत ने यह माना कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और इस उद्देश्य से उठाए गए कदमों को कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
सरकार द्वारा लगाया गया यह प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहने की बात कही गई है, ताकि 21 जून को होने वाली RE-NEET परीक्षा और उसके तुरंत बाद की अवधि में किसी भी तरह की धोखाधड़ी, फर्जी लीक या गलत सूचना के प्रसार को रोका जा सके।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू Telegram के “Message Edit” फीचर से जुड़ा रहा। सरकारी एजेंसियों का दावा था कि कुछ लोग पुराने संदेशों को संपादित करके परीक्षा के बाद फर्जी तौर पर यह दिखाने की कोशिश करते थे कि प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो गया था। इसी कारण इस फीचर पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे।
Telegram के संस्थापक Pavel Durov ने प्रतिबंध की आलोचना करते हुए कहा था कि इस फैसले से 15 करोड़ से अधिक भारतीय उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंचा है। उनका तर्क था कि कुछ गलत तत्वों की गतिविधियों के कारण पूरे प्लेटफॉर्म को दंडित करना उचित नहीं है।
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं बल्कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। सरकार के अनुसार RE-NEET 2026 को लेकर पहले से ही देशभर में संवेदनशील माहौल है और किसी भी प्रकार की अफवाह या फर्जी लीक लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल Telegram को कोई राहत नहीं मिली है। अब प्लेटफॉर्म के सामने या तो उच्च न्यायालय के बाहर अन्य कानूनी विकल्प तलाशने या सरकार के साथ समाधान निकालने की चुनौती है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार इस फैसले को परीक्षा सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही के लिए बड़ी जीत के रूप में देख रही है।