
झारखंड के गढ़वा जिले से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के दौरान कथित वसूली का एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में एक व्यक्ति, जिसे स्थानीय लोग बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) बता रहे हैं, कथित तौर पर लोगों से SIR फॉर्म भरने के बदले 50 रुपये की मांग करता दिखाई दे रहा है। वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया है कि पैसे नहीं देने पर नागरिकता या मतदाता सूची में नाम बने रहने को लेकर डराया जा रहा है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला झारखंड के गढ़वा जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में कुछ ग्रामीण कथित रूप से यह आरोप लगाते हुए दिखाई देते हैं कि SIR फॉर्म भरने के लिए उनसे प्रति व्यक्ति 50 रुपये मांगे गए। वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और स्थानीय प्रशासन से कार्रवाई की मांग उठने लगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया और उसमें दिखाई देने वाला व्यक्ति वास्तव में संबंधित क्षेत्र का BLO है या नहीं। जांच के बाद ही इसकी आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर चलाया जाने वाला अभियान है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन रखना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना तथा नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना होता है। इस प्रक्रिया के दौरान BLO घर-घर जाकर आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करते हैं और निर्धारित फॉर्म भरवाते हैं। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया निःशुल्क होती है और इसके लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा सकता। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी पैसे की मांग करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और चुनाव विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है और वीडियो की सत्यता की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि वीडियो वास्तविक है या नहीं, उसमें दिखाई देने वाला व्यक्ति सरकारी कर्मचारी है या नहीं, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
इस मामले ने ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि लोगों को उनके अधिकारों और निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी दी जानी चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति उन्हें भ्रमित या भयभीत कर आर्थिक लाभ न उठा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह के आरोपों की निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक है।
निर्वाचन आयोग पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधित करने या हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है। नागरिकों को किसी भी प्रकार की फीस देने की आवश्यकता नहीं होती। यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति फॉर्म भरने या दस्तावेज सत्यापन के नाम पर पैसे मांगता है, तो इसकी शिकायत संबंधित निर्वाचन पदाधिकारी या जिला प्रशासन से की जा सकती है। ऐसे मामलों में जांच के बाद दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि यदि वसूली के आरोप सही हैं तो यह मतदाता पुनरीक्षण अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। वहीं प्रशासन का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल युग में वायरल वीडियो कई बार महत्वपूर्ण सूचनाएं सामने लाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में भ्रामक या अधूरी जानकारी भी तेजी से फैलती है। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जांच और तथ्यों की पुष्टि जरूरी होती है। यही कारण है कि प्रशासन इस मामले में वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान और लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच कर रहा है।
फिलहाल गढ़वा जिले में सामने आए इस कथित वसूली प्रकरण की जांच जारी है। यदि जांच में यह साबित होता है कि SIR फॉर्म के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूले गए, तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि वीडियो भ्रामक या संदर्भ से हटकर पाया जाता है, तो उसके अनुसार भी उचित कदम उठाए जाएंगे। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।