ओडिशा में 12 वर्षीय बालक पर 4 साल की रिश्तेदार के यौन उत्पीड़न का आरोप, पुलिस ने बाल अपचारी को संरक्षण में लिया

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ओडिशा के नबरंगपुर जिले से बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। जिले के डाबुगांव थाना क्षेत्र में चार वर्षीय बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में 12 वर्षीय बालक को पुलिस ने संरक्षण में लिया है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित बच्ची और आरोपित बालक आपस में रिश्तेदार हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल संरक्षण से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब दोनों बच्चे परिवार के अन्य सदस्यों की अनुपस्थिति में घर के पास मौजूद थे। कुछ समय बाद बच्ची के परिजनों को उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई दिया। पूछताछ और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद कथित यौन उत्पीड़न की आशंका सामने आई, जिसके आधार पर परिवार ने डाबुगांव थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। चूंकि आरोपित की आयु 18 वर्ष से कम है, इसलिए उसके साथ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नाबालिग आरोपित को वयस्क अपराधी की तरह नहीं माना जाता और पूरी प्रक्रिया किशोर न्याय बोर्ड की निगरानी में आगे बढ़ती है।

पुलिस ने आरोपित बालक को हिरासत में लेने के बजाय बाल संरक्षण संबंधी नियमों के तहत संरक्षण में लिया है। इसके बाद उसे आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के लिए किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं पीड़ित बच्ची का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है और उसकी काउंसलिंग की व्यवस्था भी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सभी आवश्यक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य पहलू भी जुड़े हुए हैं। पुलिस परिवार के सदस्यों और आसपास मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर रही है। साथ ही फोरेंसिक और चिकित्सकीय रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है, जो जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी मामले में आरोपित भी नाबालिग हो, तो जांच के दौरान दोहरे दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। एक ओर पीड़ित बच्चे की सुरक्षा, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता सुनिश्चित करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर आरोपित नाबालिग के अधिकारों और पुनर्वास संबंधी कानूनी प्रावधानों का भी पालन किया जाता है। इसी उद्देश्य से किशोर न्याय कानून वयस्क आपराधिक न्याय प्रणाली से अलग प्रक्रिया निर्धारित करता है।

POCSO Act के तहत बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की जांच संवेदनशील तरीके से करने का प्रावधान है। कानून के अनुसार पीड़ित बच्चे की पहचान गोपनीय रखी जाती है और उसकी निजता की रक्षा करना सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी होती है। इसी कारण पुलिस ने मामले में पीड़ित और आरोपित दोनों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। जांच पूरी होने तक मामले से जुड़े कई विवरण गोपनीय रखे जाएंगे ताकि बच्चों के हितों की रक्षा की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं केवल कानूनी कार्रवाई का विषय नहीं हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, अभिभावकों की जागरूकता और समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता को भी रेखांकित करती हैं। बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श, व्यक्तिगत सुरक्षा और किसी भी अनुचित व्यवहार की तुरंत जानकारी परिवार या भरोसेमंद वयस्क को देने के बारे में जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही परिवारों और विद्यालयों को भी बच्चों के व्यवहार में होने वाले अचानक बदलावों पर संवेदनशीलता से ध्यान देना चाहिए।

फिलहाल नबरंगपुर पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रशासन ने कहा है कि पीड़ित बच्ची को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं संवेदनशील तरीके से जांच सुनिश्चित की जाएगी।

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