
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र सरकार के साथ सहमति बनने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से चल रहे अपने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा कर दी है। हालांकि धरना समाप्त हो गया है, लेकिन आंदोलन स्थल पर अब भी बड़ी संख्या में छात्र, युवा और आम लोग पहुंच रहे हैं। कई लोग इस आंदोलन को नजदीक से देखने और इसमें शामिल युवाओं से बातचीत करने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे। इस दौरान छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस आंदोलन ने उनकी सोच बदल दी और उन्हें लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाने का महत्व समझाया।
आंदोलन स्थल पर मौजूद कई छात्रों ने कहा कि यह केवल एक परीक्षा या किसी मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा नहीं था, बल्कि युवाओं के अधिकार, जवाबदेही और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग का आंदोलन था। एक छात्र ने बातचीत के दौरान कहा, “Gen-Z ने हमें सिखाया कि सवाल पूछना लोकतंत्र का सबसे बड़ा अधिकार है। अगर हम चुप रहेंगे तो बदलाव संभव नहीं होगा।” वहीं दूसरे छात्रों का कहना था कि सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुई यह आवाज देशव्यापी जनआंदोलन में बदल गई और लाखों युवाओं ने बिना किसी डर के अपनी बात रखी।
जंतर-मंतर पर रविवार सुबह भी माहौल सामान्य दिनों से अलग दिखाई दिया। जहां कुछ छात्र अपने पोस्टर और बैनर समेटते नजर आए, वहीं कई लोग आंदोलन स्थल की तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते रहे। अनेक छात्र उन जगहों को दिखाते रहे जहां पिछले कई दिनों तक धरना, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। उनके अनुसार यह स्थान अब केवल एक विरोध स्थल नहीं, बल्कि युवाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी का प्रतीक बन गया है।
आंदोलन में शामिल युवाओं ने बताया कि पिछले एक महीने से अधिक समय के दौरान उन्होंने गर्मी, बारिश, पुलिस कार्रवाई और कई अन्य कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इसके बावजूद आंदोलन जारी रहा क्योंकि उनका मानना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। कई छात्रों ने कहा कि इस पूरे अभियान ने उन्हें यह एहसास कराया कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने से भी बड़े बदलाव संभव हैं।
CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा करते हुए कहा है कि अब संगठन अपनी ऊर्जा परीक्षा सुधारों को लागू कराने, फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना, सरकार द्वारा किए गए वादों की निगरानी और आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित करेगा। संगठन का कहना है कि धरना खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि अभियान समाप्त हो गया है, बल्कि अब संघर्ष का अगला चरण संस्थागत सुधारों और जवाबदेही सुनिश्चित करने का होगा।
जंतर-मंतर पहुंचे कई आम नागरिकों ने भी छात्रों के धैर्य और अनुशासन की सराहना की। उनका कहना था कि लंबे समय तक शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना आसान नहीं होता और इस आंदोलन ने युवाओं को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया। कुछ अभिभावकों ने भी अपने बच्चों के साथ आंदोलन स्थल का दौरा किया और कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने का अवसर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन हाल के वर्षों में युवाओं की सबसे प्रभावशाली जनभागीदारी में से एक बनकर उभरा है। हालांकि धरना समाप्त हो चुका है, लेकिन शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और युवाओं की भागीदारी जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। जंतर-मंतर से लौटते हुए कई छात्रों के हाथों में अब भी तख्तियां थीं, लेकिन उनके संदेश में विरोध से अधिक उम्मीद दिखाई दे रही थी। उनका कहना था कि यह आंदोलन खत्म नहीं हुआ, बल्कि अब बदलाव की दिशा में एक नई शुरुआत हुई है।