जंतर-मंतर रेकी बयान पर विवाद के बाद अमृतसर पुलिस कमिश्नर का तबादला, ISI कनेक्शन वाले बयान से मचा सियासी बवाल

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चंडीगढ़। जंतर-मंतर से जुड़े कथित ISI कनेक्शन पर दिए गए बयान और उसके बाद जारी स्पष्टीकरण के बीच पैदा हुए विवाद के बाद पंजाब सरकार ने अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर का तबादला कर दिया। सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया, जबकि डीआईजी हरमनबीर सिंह गिल को अमृतसर पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

पूरा विवाद 4 अगस्त को शुरू हुआ, जब पंजाब पुलिस ने दो कथित ISI समर्थित सीमा-पार आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में 9 आरोपियों, जिनमें 4 नाबालिग भी शामिल हैं, को गिरफ्तार किया गया। आरोप था कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर स्थानीय युवाओं की भर्ती कर भारत में शांति भंग करने और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तत्कालीन पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने कहा था कि आरोपियों में शामिल एक मॉड्यूल दिल्ली के जंतर-मंतर तक गया था और वहां रेकी (Reconnaissance) की थी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान स्थित हैंडलरों ने उन्हें पेट्रोल बमों के जरिए अशांति फैलाने का काम सौंपा था। हालांकि उसी प्रेस वार्ता में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तार आरोपी जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि कथित तौर पर प्रदर्शन स्थल की निगरानी करने पहुंचे थे।

भुल्लर के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की कुछ वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हुईं। कई पोस्ट में यह दावा किया गया कि पुलिस ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को सीधे ISI से जोड़ दिया है। इसके बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया और विभिन्न दलों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।

विवाद बढ़ने पर 6 अगस्त को पंजाब पुलिस ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे वीडियो संपादित (Edited) थे और उन्हें भ्रामक कैप्शन के साथ साझा किया गया। विभाग ने दोहराया कि पुलिस का दावा यह नहीं था कि आरोपी प्रदर्शनकारी थे, बल्कि जांच के अनुसार वे कथित तौर पर प्रदर्शन स्थल की रेकी करने पहुंचे थे और वहां हमला करने की योजना बना रहे थे। पुलिस ने कहा कि बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया।

पंजाब पुलिस की जांच के अनुसार, गिरफ्तार मॉड्यूल के सदस्यों ने कथित तौर पर जंतर-मंतर पहुंचकर हालात का जायजा लिया था, लेकिन वहां भारी सुरक्षा व्यवस्था होने के कारण वे अपनी योजना को अंजाम नहीं दे सके और वापस लौट गए। पुलिस ने यह भी दावा किया कि मॉड्यूल को पेट्रोल बमों के जरिए हमला करने और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के निर्देश मिले थे। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है।

इन घटनाक्रमों के बीच शुक्रवार को पंजाब सरकार ने गुरप्रीत सिंह भुल्लर का तबादला कर दिया। हालांकि सरकार ने स्थानांतरण का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह फैसला जंतर-मंतर बयान विवाद के तुरंत बाद लिया गया, जिससे इसे उसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। पंजाब पुलिस का कहना है कि आतंकवादी मॉड्यूल से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की विस्तृत तस्वीर सामने आएगी। वहीं जंतर-मंतर रेकी और ISI कनेक्शन को लेकर दिए गए बयान तथा बाद में जारी स्पष्टीकरण ने इस मामले को कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी विषय बना दिया है।

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