
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के ठीक एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को समर्थन देने का ऐलान किया है। शनिवार को सुखबीर बादल ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने के पक्ष में है और लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया भी निष्पक्ष एवं समान तरीके से होनी चाहिए। उनके इस रुख के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर BJP और अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
सुखबीर बादल का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे एक दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद ही SAD की ओर से महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर समर्थन का ऐलान हुआ। इस घटनाक्रम को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या लंबे समय से अलग चल रहे BJP और SAD एक बार फिर साथ आने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, अभी दोनों दलों के बीच गठबंधन की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
महिला आरक्षण पर क्या बोले सुखबीर बादल?
सुखबीर सिंह बादल ने महिला आरक्षण को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। SAD ने केंद्र सरकार से महिला आरक्षण संबंधी संवैधानिक प्रावधानों को बिना अनावश्यक देरी के लागू करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि देश की आधी आबादी को राजनीतिक व्यवस्था में उचित हिस्सेदारी मिलना जरूरी है।
महिला आरक्षण से जुड़ा संवैधानिक प्रावधान पहले ही संसद से पारित हो चुका है। 2023 के 106वें संविधान संशोधन में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए करीब एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था। हालांकि इसका प्रभाव जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
परिसीमन पर भी SAD का समर्थन
सुखबीर बादल ने परिसीमन को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। SAD का कहना है कि लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया निष्पक्ष, संतुलित और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर होनी चाहिए। पार्टी ने केंद्र के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसके तहत सीटों की संख्या में बढ़ोतरी और राज्यों के बीच सीटों के पुनर्वितरण की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही जा रही है।
परिसीमन का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। खासकर दक्षिणी राज्यों की ओर से यह चिंता जताई जाती रही है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से उन राज्यों का संसद में सापेक्ष राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी वजह से परिसीमन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है।
क्या फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल?
सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात तथा इसके अगले ही दिन SAD के इन महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर केंद्र के रुख के करीब आने से BJP-SAD गठबंधन की संभावित वापसी की चर्चा तेज हो गई है। दोनों दल पंजाब में लंबे समय तक सहयोगी रहे हैं। हालांकि कृषि कानूनों को लेकर 2020 में दोनों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ी और SAD ने NDA से अलग होने का फैसला किया था।
अब पंजाब में अगले विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक समीकरणों पर नए सिरे से नजर रखी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि दोनों दल फिर साथ आते हैं तो राज्य की चुनावी राजनीति पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि मौजूदा घटनाक्रम के आधार पर गठबंधन की वापसी को निश्चित मानना जल्दबाजी होगी।
BJP की ओर से क्या संकेत?
सुखबीर बादल के बयान के बाद BJP की ओर से भी इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक दिलचस्पी दिखाई गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने SAD के समर्थन का स्वागत किया और कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी दलों को सहयोग करना चाहिए। इससे संसद में सरकार की रणनीति को लेकर भी चर्चा बढ़ गई है।
इसी बीच महिला आरक्षण को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच भी राजनीतिक बहस तेज है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल उठाया है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है, जबकि सरकार इसे पहले लागू कर सकती है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
पंजाब की राजनीति में बढ़ेगी हलचल
सुखबीर बादल के ताजा बयान ने फिलहाल पंजाब की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एक ओर SAD ने केंद्र के दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी के साथ सुखबीर बादल की मुलाकात ने दोनों दलों के रिश्तों को लेकर चर्चाओं को हवा दी है।
हालांकि अभी तक न BJP ने और न ही SAD ने किसी नए गठबंधन या सीट-बंटवारे को लेकर आधिकारिक घोषणा की है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक नजदीकी और संभावित रणनीतिक समन्वय के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेताओं के बीच होने वाली बैठकों और बयानों से ही स्पष्ट होगा कि यह समर्थन केवल विधायी मुद्दों तक सीमित है या पंजाब में BJP-SAD की पुरानी राजनीतिक साझेदारी फिर से आकार ले रही है।