
बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में नाबालिग बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में वांछित आरोपी मोनू पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी पर ₹50 हजार का इनाम घोषित किया गया था। रविवार तड़के गुलावठी इलाके में पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें आरोपी को गोली लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में तलाशी अभियान भी तेज कर दिया है।
घर के बाहर से गायब हुई थी बच्ची
पुलिस के अनुसार, बुलंदशहर के ककोड़ क्षेत्र में रहने वाली 12 वर्षीय कक्षा 4 की छात्रा 31 जुलाई की दोपहर करीब 3 बजे अपने घर के बाहर से लापता हो गई थी। परिजनों ने बच्ची की तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पाया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामले की जांच शुरू हुई।
अगले दिन शनिवार शाम स्थानीय लोगों ने वैर रेलवे स्टेशन के पास झाड़ियों में बच्ची का शव देखा और इसकी जानकारी पुलिस को दी। शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए कई टीमें गठित कीं।
CCTV फुटेज से आरोपी तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान सामने आई फुटेज में कथित तौर पर आरोपी बच्ची को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दिया। इसी डिजिटल सबूत के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान करने और उसकी तलाश शुरू की।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी की तलाश के लिए SWAT और स्थानीय पुलिस की टीमों को लगाया गया था। शनिवार को पुलिस ने आरोपी के ऊपर ₹50,000 का इनाम घोषित किया था। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए अभियान और तेज कर दिया गया।
तड़के पुलिस से हुआ सामना
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रविवार सुबह करीब 4 बजे गुलावठी इलाके में SWAT और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को बिना नंबर प्लेट वाली बाइक पर दो संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया।
पुलिस का दावा है कि संदिग्धों ने रुकने के बजाय पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ के दौरान मोनू को गोली लगी। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दूसरा संदिग्ध अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें अभियान चला रही हैं।
मुठभेड़ में पुलिसकर्मी भी घायल
पुलिस और संदिग्धों के बीच हुई गोलीबारी में पुलिस के SOG उपनिरीक्षक संदीप कुमार और कांस्टेबल नरेंद्र कुमार भी गोली लगने से घायल हुए। इसके अलावा सिकंदराबाद और गुलावठी थाने के दो निरीक्षकों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोली लगी, हालांकि वे सुरक्षित रहे।
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने मौके से एक पिस्तौल, दो मैगजीन, कारतूस और बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा किया है। बरामद सामान को जांच का हिस्सा बनाया गया है।
आरोपी की तलाश में पुलिस ने झोंकी थी पूरी ताकत
बच्ची का शव मिलने के बाद पुलिस पर आरोपी को जल्द पकड़ने का दबाव बढ़ गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह और स्थानीय विधायक लक्ष्मी राज सिंह ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें आरोपी की जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया था।
इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और CCTV फुटेज की मदद से आरोपी की तलाश तेज की। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आए सुरागों के आधार पर संदिग्ध की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। आखिरकार रविवार तड़के पुलिस टीम का सामना आरोपी से हो गया।
दूसरा आरोपी अभी फरार
पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान मोनू के साथ मौजूद दूसरा व्यक्ति अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गया। उसकी तलाश के लिए इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरार व्यक्ति की मामले में क्या भूमिका थी और वह आरोपी के संपर्क में कब से था।
मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, CCTV फुटेज, घटनास्थल से बरामद सामान और अन्य उपलब्ध सबूतों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
बुलंदशहर की इस घटना ने एक बार फिर नाबालिगों की सुरक्षा और अपराध के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल पुलिस का कहना है कि फरार संदिग्ध को पकड़ने के लिए अभियान जारी है और जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का भी खुलासा किया जाएगा।