रविदास कलश यात्रा को लेकर मायावती का BJP पर हमला, 2019 के तुगलकाबाद मंदिर विवाद की दिलाई याद

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नई दिल्ली। संत गुरु रविदास को लेकर बीजेपी की ओर से निकाली जा रही कलश यात्रा के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने बीजेपी के इस अभियान पर सवाल उठाते हुए दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित गुरु रविदास गुरुघर से जुड़े करीब सात साल पुराने विवाद की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि संत रविदास के नाम पर राजनीतिक कार्यक्रम करने से पहले बीजेपी को यह बताना चाहिए कि 2019 में तुगलकाबाद स्थित रविदास मंदिर के ध्वस्तीकरण के समय उसकी भूमिका क्या थी।

बीजेपी ने हाल ही में संत रविदास की जन्मस्थली वाराणसी से देशभर में 131 कलशों के साथ कलश यात्रा शुरू करने की घोषणा की है। यह अभियान 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के दलित संपर्क अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। बीजेपी की योजना संत रविदास की जन्मस्थली से मिट्टी लेकर अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता का संदेश देने की है।

मायावती ने क्यों उठाया तुगलकाबाद का मुद्दा?

मायावती ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि संत रविदास के प्रति सम्मान की बात करने वाली पार्टी को पहले तुगलकाबाद में रविदास मंदिर के ध्वस्तीकरण से जुड़े पुराने विवाद का जवाब देना चाहिए।

तुगलकाबाद स्थित रविदास गुरुघर को अगस्त 2019 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ध्वस्त किया था। यह कार्रवाई जमीन से जुड़े कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि में हुई थी। मंदिर के ध्वस्तीकरण के बाद दिल्ली समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए और मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील बन गया था।

मायावती का तर्क है कि बीजेपी अगर आज संत रविदास के नाम पर देशभर में कार्यक्रम कर रही है तो उसे पुराने विवाद को भी याद रखना चाहिए। उनका हमला खास तौर पर बीजेपी के दलित आउटरीच अभियान पर केंद्रित है।

2019 में क्या हुआ था?

साल 2019 में तुगलकाबाद स्थित गुरु रविदास मंदिर को लेकर जमीन और निर्माण से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2019 के आदेश के बाद संबंधित क्षेत्र को खाली कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और 10 अगस्त 2019 को मंदिर का ढांचा गिराया गया

मंदिर गिराए जाने के बाद दलित संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से विरोध किया गया। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण भी हुई थी। इस घटना ने संत रविदास के अनुयायियों के बीच काफी नाराजगी पैदा की थी।

बाद में मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर भी कानूनी और राजनीतिक प्रयास हुए। अक्टूबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उसी स्थान पर स्थायी निर्माण की अनुमति देने का रास्ता साफ किया था।

बीजेपी का कलश यात्रा अभियान क्या है?

बीजेपी ने संत रविदास को लेकर देशव्यापी कलश यात्रा और ‘समरसता संकल्प अभियान’ शुरू किया है। इसके तहत वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली के मंदिर से मिट्टी लेकर 131 कलश देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने की योजना है।

बीजेपी के इस अभियान को पार्टी के व्यापक सामाजिक संपर्क कार्यक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में संत रविदास के अनुयायियों और दलित समुदाय के बीच उनकी बड़ी सामाजिक और राजनीतिक पहुंच है।

इस अभियान की शुरुआत वाराणसी से की गई और इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन के शामिल होने की बात सामने आई थी। पार्टी इसे संत रविदास के विचारों और सामाजिक समरसता से जोड़कर पेश कर रही है।

मायावती के लिए क्यों महत्वपूर्ण है रविदास समुदाय?

संत रविदास की विरासत उत्तर भारत की दलित राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों में रविदास समुदाय की अच्छी संख्या है। यही वजह है कि संत रविदास से जुड़े धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का राजनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है।

मायावती लंबे समय से दलित हितों और सामाजिक प्रतिनिधित्व को BSP की राजनीति का प्रमुख आधार बनाती रही हैं। ऐसे में बीजेपी द्वारा रविदास समुदाय के बीच पहुंच बढ़ाने की कोशिश पर BSP प्रमुख की प्रतिक्रिया को राजनीतिक मुकाबले के संदर्भ में देखा जा रहा है।

2027 के चुनावों से पहले बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

उत्तर प्रदेश और पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दल अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी का रविदास कलश यात्रा अभियान भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

दूसरी ओर, मायावती बीजेपी के इस अभियान पर सवाल उठाकर यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि संत रविदास और उनके अनुयायियों के प्रति सम्मान केवल कार्यक्रमों और यात्राओं तक सीमित नहीं होना चाहिए।

पुराने विवाद की राजनीतिक वापसी

2019 का तुगलकाबाद विवाद भले ही कई साल पुराना हो चुका है, लेकिन रविदास समुदाय के संदर्भ में इसकी राजनीतिक संवेदनशीलता बनी हुई है। उस समय मंदिर के ध्वस्तीकरण के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था और अलग-अलग राजनीतिक दलों ने इसे अपने-अपने तरीके से उठाया था।

अब बीजेपी के नए कलश यात्रा अभियान के साथ मायावती ने उसी पुराने विवाद को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। इससे आने वाले दिनों में रविदास समुदाय, दलित राजनीति और बीजेपी के सामाजिक संपर्क अभियान को लेकर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, संत रविदास के नाम पर बीजेपी का देशव्यापी कलश यात्रा अभियान जहां पार्टी के सामाजिक संपर्क और दलित आउटरीच की कोशिश के रूप में सामने आया है, वहीं मायावती ने 2019 के तुगलकाबाद मंदिर विवाद को याद दिलाकर बीजेपी पर निशाना साधा है। ऐसे में संत रविदास की विरासत आने वाले चुनावों से पहले धार्मिक-सामाजिक मुद्दे के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा भी बनती दिखाई दे रही है।

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