रतलाम में 7.5 करोड़ के सोने की लूट की गुत्थी उलझी, 300 ग्राम सोना मिलने से पुलिस के सामने नए सवाल

3

रतलाम में करीब 7.5 करोड़ रुपये कीमत के सोने की कथित लूट का मामला लगातार पेचीदा होता जा रहा है। मामला एक सराफा व्यापारी के बस से रतलाम लौटने के दौरान करीब 5 किलो सोना लूटे जाने से जुड़ा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, व्यापारी बड़नगर में कई कारोबारियों से लेन-देन करने के बाद बस से वापस रतलाम लौट रहा था। इसी दौरान फोरलेन पर रेन फंटे के पास बस को रुकवाया गया और कथित तौर पर व्यापारी का सोने से भरा बैग लेकर बदमाश फरार हो गए।

घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बैग में मौजूद सोने का कुल वजन करीब 5 किलो बताया जा रहा है और उसकी कीमत लगभग 7.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह मामला केवल सामान्य लूट की घटना नहीं रह गया है। पुलिस को जांच के दौरान व्यापारी के एक दोस्त के पास से करीब 300 ग्राम सोना मिलने की जानकारी मिली है। इस बरामदगी ने पूरे घटनाक्रम को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह 300 ग्राम सोना कहां से आया और क्या इसका कथित लूट से कोई संबंध है।

बड़नगर से शुरू हुई कहानी

यह पूरा मामला सराफा व्यापारी अर्पित चौरडिया से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार अर्पित बड़नगर में आधा दर्जन से अधिक व्यापारियों से कारोबार करने के बाद रतलाम वापस लौट रहे थे। उनके साथ सोना भी था। पुलिस के मुताबिक, उनके पास मौजूद सोने का कुल वजन लगभग 5 किलो था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 7.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

अर्पित बस के जरिए रतलाम की ओर जा रहे थे। सफर सामान्य तरीके से चल रहा था, लेकिन रास्ते में फोरलेन पर रेन फंटे के पास घटनाक्रम अचानक बदल गया। आरोप है कि बस में पहले से दो से तीन लोग सवार थे, जिन्होंने मौका देखकर व्यापारी का बैग छीन लिया। इसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गए।

घटना के बाद पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू की गई। इतनी बड़ी मात्रा में सोने की कथित लूट होने के कारण पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती घटना की वास्तविक परिस्थितियों को समझना है। जांच केवल आरोपियों की तलाश तक सीमित नहीं रखी जा रही, बल्कि पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले और बाद में वास्तव में क्या हुआ था।

बस में क्या हुआ था?

इस मामले का सबसे अहम हिस्सा बस के अंदर और बस रुकने के दौरान हुई गतिविधियों को समझना है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि बस में कौन-कौन लोग मौजूद थे, व्यापारी किस सीट पर बैठे थे, उनके आसपास कौन लोग बैठे थे और बस को रेन फंटे के पास किस परिस्थिति में रोका गया।

पुलिस के अनुसार, घटना का रीक्रिएशन भी कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य उस पूरे घटनाक्रम को दोबारा समझना है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित लूट किस तरह हुई। पुलिस यह भी देख रही है कि व्यापारी का बैग किस समय और किस तरह छीना गया तथा घटना में कितने लोग शामिल हो सकते हैं।

बस में मौजूद यात्रियों और घटना से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका तथा जानकारी भी जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस मामले के हर पहलू को जोड़कर घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।

300 ग्राम सोने की बरामदगी ने बढ़ाई उलझन

जांच के दौरान व्यापारी के एक दोस्त के पास से करीब 300 ग्राम सोना मिलने की बात सामने आई है। यही बरामदगी अब इस मामले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। पुलिस इस सोने के बारे में जानकारी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर यह सोना उस व्यक्ति के पास कैसे पहुंचा।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बरामद 300 ग्राम सोने का कथित लूट की घटना से कोई संबंध है या नहीं। पुलिस जांच के बाद ही इस संबंध में स्थिति साफ हो सकेगी। इसलिए इस बरामदगी को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।

जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल हैं। मसलन, 300 ग्राम सोना किस कारोबारी से संबंधित है? इसे व्यापारी के दोस्त के पास क्यों रखा गया था? क्या यह वही सोना है जो बड़नगर से कारोबार के दौरान प्राप्त हुआ था? या फिर इसका कथित लूट से अलग कोई संबंध है? इन सभी सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आने हैं।

जिन कारोबारियों से हुई थी डील, उनसे भी पूछताछ

अर्पित चौरडिया बड़नगर में आधा दर्जन से अधिक व्यापारियों से कारोबार करने के बाद रतलाम लौट रहे थे। इसलिए पुलिस अब उन व्यापारियों से भी जानकारी जुटा रही है, जिनके साथ उस दिन अर्पित का कारोबारी संपर्क हुआ था।

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता करना है कि अर्पित ने किस व्यापारी से कितना सोना लिया था और रतलाम के लिए रवाना होते समय उनके पास वास्तव में कितनी मात्रा में सोना था। इससे पुलिस कथित तौर पर गायब हुए सोने की मात्रा और उसके स्रोत को समझने की कोशिश कर रही है।

यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामले में करीब 5 किलो सोना होने की बात सामने आई है। पुलिस के लिए यह जरूरी है कि कथित लूट से पहले व्यापारी के पास मौजूद सोने की मात्रा और उसके कारोबारी रिकॉर्ड का मिलान किया जाए। इससे घटना की जांच को एक स्पष्ट दिशा मिल सकती है।

पुलिस हर कड़ी को जोड़ने में जुटी

इस मामले में पुलिस केवल सड़क पर हुई कथित लूट को अलग घटना के तौर पर नहीं देख रही है। घटना से पहले व्यापारी कहां-कहां गए, किन लोगों से मिले, किन कारोबारियों के साथ लेन-देन हुआ और बस में उनके साथ कौन-कौन लोग मौजूद थे, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि क्या कथित लूट अचानक हुई या इसके पीछे पहले से किसी तरह की जानकारी या योजना थी। हालांकि इस संबंध में फिलहाल कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच अभी जारी है।

घटना के रीक्रिएशन का उद्देश्य भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है। पुलिस वास्तविक परिस्थितियों को दोबारा सामने रखकर यह समझने का प्रयास कर रही है कि बस किस स्थान पर रुकी, व्यापारी की स्थिति क्या थी और कथित तौर पर बैग छीनने के बाद आरोपी किस दिशा में भागे।

7.5 करोड़ रुपये के सोने की वजह से मामला बेहद गंभीर

करीब 5 किलो सोने और लगभग 7.5 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत से जुड़ा होने के कारण यह मामला सामान्य चोरी या लूट से कहीं बड़ा है। इतनी बड़ी कीमत के सोने के परिवहन और उसके गायब होने की परिस्थितियां जांच का अहम हिस्सा हैं।

हालांकि अभी यह मामला पुलिस जांच के चरण में है और कथित लूट की पूरी तस्वीर सामने आना बाकी है। पुलिस को यह भी तय करना है कि घटना में वास्तव में कितने लोग शामिल थे और उनकी भूमिका क्या थी। साथ ही 300 ग्राम सोने की बरामदगी से जुड़े सवालों का जवाब भी जांच के बाद ही मिल पाएगा।

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि पुलिस अभी किसी एक संभावना को अंतिम सत्य मानकर आगे नहीं बढ़ रही है। घटना की शुरुआत बड़नगर से होती है, जहां व्यापारी कई कारोबारियों से लेन-देन करने के बाद रतलाम लौट रहे थे। इसके बाद बस का सफर, फोरलेन पर रुकना, कथित तौर पर बैग छीना जाना और करीब 5 किलो सोने के गायब होने की बात सामने आती है। अब जांच के दौरान 300 ग्राम सोना मिलने से कहानी में एक और कड़ी जुड़ गई है।

आगे की जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल पुलिस का मुख्य उद्देश्य घटना की वास्तविकता और पूरी परिस्थितियों को स्पष्ट करना है। व्यापारी के कारोबारी संपर्कों, सोने की मात्रा, बस में मौजूद लोगों और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित तौर पर 5 किलो सोना आखिर किस तरह गायब हुआ और क्या 300 ग्राम सोने की बरामदगी इस मामले की कोई महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना में शामिल बताए जा रहे लोगों की पहचान और भूमिका क्या थी।

जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक 300 ग्राम सोने की बरामदगी या घटना की किसी अन्य कड़ी को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल पुलिस घटना का रीक्रिएशन कर रही है और बड़नगर से लेकर रतलाम तक पूरे घटनाक्रम को जोड़ने की कोशिश में लगी है।

रतलाम की इस कथित सोना लूट ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि इसमें एक तरफ करोड़ों रुपये मूल्य के सोने की लूट का दावा है, वहीं दूसरी तरफ जांच के दौरान सामने आई 300 ग्राम सोने की बरामदगी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि उस रात बस में वास्तव में क्या हुआ था, करीब 5 किलो सोना कहां गया और 300 ग्राम सोने की इस कहानी से क्या संबंध है।

Share it :

End