
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। रांची में लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे छात्र अब केवल परीक्षाओं को रद्द करने और जांच कराने की मांग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठा दी है। आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर स्पष्ट कार्रवाई करनी चाहिए।
JPSC-JSSC सुधार मंच ने आंदोलन के अगले चरण की भी घोषणा की है। मंच के मुताबिक 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। इसके अलावा 16 अगस्त को राज्य के सभी जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम घोषित किया गया है। छात्रों का कहना है कि वे JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। इसी आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल भी जारी रही। उनकी भूख हड़ताल 14वें दिन में पहुंच गई। वह स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण सदर अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अस्पताल में ही अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है।
छात्रों ने पहली बार उठाई मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अब आंदोलन को एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंचा दिया है। पहले उनकी प्रमुख मांगों में परीक्षा रद्द करना, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल थी। अब छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी सामने रख दी है।
आंदोलनकारी छात्रों का तर्क है कि भर्ती परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनके अनुसार, सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले युवाओं ने वर्षों तक मेहनत की है और यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता होती है तो उसका सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों को लंबे समय तक नजरअंदाज किए जाने के कारण अब आंदोलन को और व्यापक बनाने का फैसला लिया गया है। 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव का ऐलान इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग
आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना शामिल है। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं और इसलिए पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
JSSC यानी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग राज्य में विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित करता है। दूसरी ओर JPSC यानी झारखंड लोक सेवा आयोग राज्य की महत्वपूर्ण प्रशासनिक सेवाओं समेत विभिन्न पदों के लिए चयन प्रक्रिया संचालित करता है। इन दोनों संस्थाओं की परीक्षाओं में किसी भी तरह का विवाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को प्रभावित कर सकता है।
छात्रों का कहना है कि वे ऐसी परीक्षा व्यवस्था चाहते हैं जिसमें पारदर्शिता हो और सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिले। इसी वजह से वे JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ-साथ पूरे मामले की CBI से जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र
आंदोलनकारी छात्रों ने मामले की जांच राज्य स्तर की एजेंसियों के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने की मांग रखी है। उनका मानना है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।
छात्रों के अनुसार, परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए। इसमें परीक्षा प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और किसी भी संभावित अनियमितता से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी का पता लगाना शामिल है।
सरकार की ओर से इससे पहले परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में बदलाव करेगी और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाएगी। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी प्रतिभा को कथित अनियमितताओं या किसी भी तरह की गलत व्यवस्था के कारण नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेरने का ऐलान
JPSC-JSSC सुधार मंच ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा की है। मंच के अनुसार, इस कार्यक्रम में राज्यभर के युवा शामिल होंगे और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी।
छात्रों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री आवास के सामने अपनी मांगों को मजबूती से रखने की तैयारी कर रहे हैं। आंदोलन का उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना और परीक्षा से जुड़े विवादों पर ठोस निर्णय की मांग करना है।
20 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन के सामने भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती हो सकती है। इससे पहले रांची में JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन की तैयारियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी।
16 अगस्त को सभी जिलों में पुतला दहन
छात्र संगठनों ने 16 अगस्त को झारखंड के सभी जिलों में पुतला दहन करने का भी ऐलान किया है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी के पुतले जलाने की घोषणा की गई है।
यह आंदोलन के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है क्योंकि अब विरोध केवल राजधानी रांची तक सीमित रखने के बजाय राज्य के अलग-अलग जिलों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें केवल रांची के युवाओं से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि पूरे झारखंड के उन अभ्यर्थियों से संबंधित हैं जो सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
पुतला दहन के कार्यक्रम के जरिए छात्र सरकार और राजनीतिक नेतृत्व के प्रति अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में स्पष्ट होगी।
देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल जारी
आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल भी जारी है। वह पिछले कई दिनों से अनशन पर हैं और 15 अगस्त को उनकी भूख हड़ताल का 14वां दिन था। स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इसके बावजूद महतो ने अपना आंदोलन समाप्त नहीं किया। अस्पताल में उन्होंने अपने कमरे के बजाय कॉरिडोर में भी धरना जारी रखा। इससे यह स्पष्ट है कि आंदोलनकारी नेतृत्व अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाए रखना चाहता है।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देवेंद्र नाथ महतो ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में तिरंगा फहराने और उसके बाद प्रस्तावित तिरंगा यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई थी। इसके लिए उन्होंने पहले जिला प्रशासन को पत्र के माध्यम से अपनी इच्छा की जानकारी दी थी।
बताया गया कि उन्होंने अस्पताल से बाहर निकलने का प्रयास भी किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें कई बार रोका। घटनाक्रम के दौरान उनके और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की होने की बात भी सामने आई। महतो ने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें चोट लगी और उनके साथ मौजूद कुछ लोगों के साथ भी बल प्रयोग किया गया।
अस्पताल से बाहर निकलने को लेकर विवाद
देवेंद्र नाथ महतो के अस्पताल से निकलने के प्रयास के दौरान स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 8 बजे उन्होंने अस्पताल से बाहर जाने की कोशिश की। उन्हें अलग-अलग अंतराल पर रोका गया और काफी देर तक बाहर नहीं जाने दिया गया।
करीब 9 से 10 बजे के बीच अस्पताल परिसर में पुलिस बल की मौजूदगी बढ़ गई। महतो की ओर से आरोप लगाया गया कि उनके साथ धक्का-मुक्की हुई और उन्हें चोट भी लगी। उनके साथ मौजूद लोगों के साथ भी कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया।
घटना के बाद महतो ने अस्पताल के कमरे के बाहर बैठकर अपना अनशन जारी रखा। उनका कहना था कि वह अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
बाद में विधायक जयराम महतो से भी उनकी बातचीत हुई। जयराम महतो ने स्वतंत्रता दिवस के दिन हुए घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए कहा कि इस मामले को विधानसभा के माध्यम से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा। बाद में दोपहर के समय अस्पताल परिसर से पुलिसकर्मियों के हटने के बाद मीडिया प्रतिनिधियों को अंदर जाने का मौका मिला और उन्होंने घटनाक्रम की जानकारी ली।
सरकार पहले ही परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की बात कह चुकी है
छात्रों के आंदोलन के बीच झारखंड सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 15 अगस्त को कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में बदलाव करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं की चिंताएं और आकांक्षाएं सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों से सुझाव लेने की बात भी कही। सरकार ने इस उद्देश्य से “छात्रों की बात, छात्रों के साथ” पहल शुरू करने की जानकारी दी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार आरोप-प्रत्यारोप में उलझने के बजाय न्याय सुनिश्चित करने पर ध्यान देगी। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ अकादमिक कैलेंडर तैयार करने और परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही।
इससे पहले झारखंड सरकार ने 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की घोषणा भी की थी। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था कि दो अन्य JPSC परीक्षाएं भी रद्द की जाएंगी और TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच की जाएगी। 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करना लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल था।
छात्रों और सरकार के बीच टकराव क्यों बढ़ रहा है?
एक तरफ सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता का भरोसा दे रही है, जबकि दूसरी तरफ आंदोलनकारी छात्र तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी अंतर के कारण विवाद लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
छात्रों की मांग है कि केवल भविष्य में व्यवस्था सुधारने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि जिन परीक्षाओं पर सवाल उठे हैं, उनके बारे में स्पष्ट निर्णय होना चाहिए और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह परीक्षा प्रणाली में बदलाव की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने युवाओं को भरोसा दिलाया है कि उनकी प्रतिभा और भविष्य को किसी भी प्रकार की अनियमितता से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
आंदोलन अब राज्यव्यापी रूप लेने की तैयारी में
रांची से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब झारखंड के अन्य जिलों तक पहुंचाने की तैयारी में है। 16 अगस्त को सभी जिलों में पुतला दहन और 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा से आंदोलन का अगला चरण तय हो गया है।
इस बीच छात्रों की प्रमुख मांगें भी स्पष्ट हैं। इनमें JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना, कथित परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच, दोषियों की जवाबदेही तय करना और अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग शामिल हो गई है।
आंदोलनकारी छात्र यह संदेश देना चाहते हैं कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा केवल एक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि उनके वर्षों के परिश्रम और भविष्य से जुड़ी उम्मीद होती है। इसी वजह से परीक्षा संबंधी विवादों को लेकर छात्रों की प्रतिक्रिया भी लगातार तेज होती जा रही है।
फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच बातचीत तथा समाधान की दिशा में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा। सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया जा चुका है और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने जैसे फैसले भी सामने आए हैं। इसके बावजूद छात्र अपने आंदोलन को जारी रखने और अपनी मांगों को और मजबूती से उठाने की तैयारी में हैं।
रांची में JPSC-JSSC विवाद अब केवल परीक्षा प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है। छात्रों की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग, राज्यभर में विरोध प्रदर्शन की तैयारी, 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेरने का ऐलान और 16 अगस्त को सभी जिलों में पुतला दहन की घोषणा ने आंदोलन को नया रूप दे दिया है। अब आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच संवाद, जांच और ठोस कार्रवाई ही यह तय करेगी कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।