‘मुस्लिम विरोधी नहीं थे सावरकर, राहुल गांधी ने बनाई गलत छवि’, परिवार का दावा; पुणे कोर्ट में मानहानि केस की सुनवाई जारी

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‘मुस्लिम विरोधी नहीं थे सावरकर, राहुल गांधी ने बनाई गलत छवि’, परिवार का दावा; पुणे कोर्ट में मानहानि केस की सुनवाई जारी

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे सावरकर मानहानि मामले में मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को पुणे की विशेष MP/MLA अदालत में सुनवाई के दौरान एक बार फिर सावरकर की विचारधारा और राहुल गांधी के 2023 के लंदन भाषण का मुद्दा केंद्र में रहा। सावरकर परिवार की ओर से शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर ने अदालत में दावा किया कि राहुल गांधी ने अपने भाषण के जरिए विनायक दामोदर सावरकर की ऐसी छवि पेश की, जिससे उन्हें मुसलमानों से नफरत करने वाला और हिंसक व्यक्ति समझा जा सकता है।

सत्यकी सावरकर ने अदालत के सामने कहा कि उनके दादा-चाचा यानी विनायक दामोदर सावरकर मुसलमानों से नफरत नहीं करते थे। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने लंदन में दिए गए अपने भाषण में सावरकर से जुड़ी एक ऐसी घटना का उल्लेख किया, जिसका कोई प्रमाण सावरकर की पुस्तकों या लेखन में नहीं मिलता। सत्यकी के मुताबिक, राहुल गांधी के कथित बयान से सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और इसी वजह से उन्होंने आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया।

यह मामला वर्ष 2023 में राहुल गांधी द्वारा लंदन में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उस भाषण में राहुल गांधी ने दावा किया था कि सावरकर ने अपनी एक किताब में अपने कुछ साथियों के साथ एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई किए जाने और उस घटना से खुशी मिलने का उल्लेख किया था। सत्यकी सावरकर का कहना है कि ऐसी कोई घटना सावरकर की किसी पुस्तक में नहीं लिखी गई और राहुल गांधी ने गलत तरीके से सावरकर को पेश किया।

मामले की सुनवाई अभी जारी है और सत्यकी सावरकर से राहुल गांधी के वकील जिरह कर रहे हैं। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों और गवाहियों के आधार पर यह तय किया जाना है कि राहुल गांधी का कथित बयान आपराधिक मानहानि की कानूनी सीमा में आता है या नहीं।

कोर्ट में क्या बोले सत्यकी सावरकर?

मंगलवार की सुनवाई के दौरान जब सत्यकी सावरकर से पूछा गया कि राहुल गांधी के भाषण में उन्हें सबसे आपत्तिजनक और मानहानिकारक बात क्या लगी, तो उन्होंने भाषण के उस हिस्से की ओर इशारा किया जिसमें कथित तौर पर सावरकर की किसी किताब का हवाला दिया गया था।

सत्यकी ने कहा कि राहुल गांधी के कथित बयान से सावरकर को मुसलमानों का “कट्टर विरोधी” और भीड़ के जरिए हिंसा करने वाले व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया।

उनके अनुसार, यह चित्रण गलत है।

सत्यकी ने अदालत में कहा कि सावरकर मुसलमानों से नफरत नहीं करते थे और उन्होंने अपने लेखन में मुसलमानों की प्रगति के लिए विचार और तरीके भी बताए थे।

हालांकि यह शिकायतकर्ता का बयान है। अदालत ने अभी इस दावे को अंतिम रूप से सही या गलत घोषित नहीं किया है। मामले की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर ही अदालत आगे निष्कर्ष पर पहुंचेगी।

राहुल गांधी के लंदन भाषण से शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला 5 मार्च 2023 को लंदन में दिए गए राहुल गांधी के भाषण से जुड़ा है।

राहुल गांधी उस समय विदेश में भारतीय मूल के लोगों और कांग्रेस से जुड़े कार्यक्रम में बोल रहे थे। शिकायत के अनुसार, उन्होंने अपने भाषण में सावरकर से जुड़ा एक कथित प्रसंग सुनाया था।

सत्यकी सावरकर का आरोप है कि राहुल गांधी ने दावा किया कि सावरकर ने एक किताब में लिखा था कि उन्होंने और उनके पांच-छह दोस्तों ने एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और उन्हें इस घटना से खुशी हुई थी।

सत्यकी ने इस दावे को गलत बताया।

उनका कहना है कि सावरकर ने ऐसी कोई किताब नहीं लिखी और न ही ऐसा कोई प्रसंग उनके लेखन में मौजूद है।

इसी आधार पर उन्होंने राहुल गांधी पर जानबूझकर गलत और दुर्भावनापूर्ण बयान देने का आरोप लगाया।

सत्यकी ने इसे मानहानि क्यों माना?

सत्यकी सावरकर का तर्क है कि किसी ऐतिहासिक और सार्वजनिक व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करना जो किसी समुदाय के व्यक्ति के साथ हिंसा करके खुश हुआ हो, उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है।

उनके अनुसार, राहुल गांधी का कथित बयान केवल राजनीतिक आलोचना तक सीमित नहीं था बल्कि सावरकर के चरित्र और विचारों के बारे में एक ऐसा आरोप था जो तथ्यात्मक रूप से गलत था।

शिकायत में कहा गया है कि राहुल गांधी ने यह जानते हुए भी ऐसा बयान दिया कि इसका असर सावरकर की सार्वजनिक छवि पर पड़ेगा।

यही आरोप आपराधिक मानहानि की शिकायत का मुख्य आधार है।

पुलिस ने भी दी थी प्रथम दृष्टया रिपोर्ट

इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मई 2024 में सामने आया था।

पुणे पुलिस ने अदालत में अपनी जांच रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट के बारे में शिकायतकर्ता पक्ष ने बताया था कि पुलिस को राहुल गांधी के कथित बयान और शिकायत में प्रथम दृष्टया सच्चाई दिखाई दी।

पुलिस जांच में यह बात सामने आने का दावा किया गया था कि सावरकर की पुस्तकों में उस कथित मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई से संबंधित प्रसंग नहीं मिला, जबकि राहुल गांधी ने अपने भाषण में ऐसा उल्लेख किया था।

हालांकि पुलिस की प्रथम दृष्टया रिपोर्ट अंतिम न्यायिक फैसला नहीं है।

मानहानि का अपराध साबित हुआ या नहीं, इसका अंतिम निर्णय अदालत को साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर करना होगा।

राहुल गांधी ने आरोपों से इनकार किया

राहुल गांधी ने इस मामले में दोष स्वीकार नहीं किया है।

उनकी ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया है कि मामले के कई पहलू अभी परीक्षण के स्तर पर हैं।

राहुल गांधी के वकील मिलिंद डी. पवार लगातार सत्यकी सावरकर से जिरह कर रहे हैं।

बचाव पक्ष का उद्देश्य यह दिखाना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों को किस तरह साबित किया जा सकता है और कथित भाषण तथा मानहानि के बीच कानूनी संबंध क्या है।

वॉइस सैंपल का मुद्दा भी उठा

मामले में हाल के दिनों में राहुल गांधी के वॉइस सैंपल को लेकर भी विवाद सामने आया।

सत्यकी सावरकर की ओर से अदालत में आवेदन देकर राहुल गांधी की आवाज का नमूना लेने की मांग की गई थी।

शिकायतकर्ता पक्ष का तर्क था कि राहुल गांधी का वॉइस सैंपल लेकर अदालत के सामने मौजूद इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग से उसकी फॉरेंसिक तुलना की जा सकती है।

इससे यह पुष्टि की जा सकेगी कि रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाज राहुल गांधी की ही है या नहीं।

लेकिन राहुल गांधी के वकील ने इस मांग का विरोध किया।

राहुल गांधी के वकील ने कहा- अभी वॉइस सैंपल की जरूरत नहीं

राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने तर्क दिया कि मामले की सुनवाई अभी उस चरण पर नहीं पहुंची है जहां बचाव पक्ष यह दलील पेश कर रहा हो कि कथित भाषण वास्तव में राहुल गांधी ने दिया था या उसमें मानहानि का इरादा था।

उनका कहना था कि जब तक बचाव पक्ष की वह दलील अदालत के सामने नहीं आती, तब तक वॉइस सैंपल लेने की मांग समय से पहले है।

अदालत ने बचाव पक्ष को इस आवेदन पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट में परिवार और RSS का मुद्दा भी आया

इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान सावरकर परिवार और नाथूराम गोडसे परिवार के रिश्ते तथा RSS से जुड़े सवाल भी अदालत में उठे हैं।

सत्यकी सावरकर की मां हिमानी सावरकर, गोपाल गोडसे की बेटी थीं।

गोपाल गोडसे, नाथूराम गोडसे के भाई थे।

इस तरह सत्यकी का संबंध सावरकर परिवार के साथ-साथ गोडसे परिवार से भी है।

राहुल गांधी के वकील ने जिरह के दौरान इस पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े कई सवाल पूछे हैं।

नाथूराम और गोपाल गोडसे के RSS से संबंध पर सवाल

हाल की जिरह में सत्यकी सावरकर से पूछा गया कि क्या नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे RSS से जुड़े हुए थे।

सत्यकी ने इस बात को स्वीकार किया कि दोनों RSS के सक्रिय सदस्य रहे थे।

यह बयान मामले की मुख्य शिकायत से अलग एक ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ में सामने आया।

सत्यकी ने साथ ही कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि वर्तमान RSS सावरकर की विचारधारा का अनुसरण करता है या नहीं।

गांधी हत्या का मुद्दा भी अदालत में उठा

राहुल गांधी के वकील ने सावरकर परिवार की पृष्ठभूमि से जुड़े सवाल पूछते हुए महात्मा गांधी की हत्या के मामले का भी संदर्भ दिया।

सत्यकी से पूछा गया कि क्या उनके नाना और नाथूराम गोडसे ने गांधी की हत्या के मामले में भूमिका निभाई थी।

सत्यकी ने स्वीकार किया कि नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या की थी।

अदालत में यह भी चर्चा हुई कि गांधी हत्या के मामले में सावरकर आरोपी बनाए गए थे लेकिन बाद में उन्हें पर्याप्त सबूत न होने के कारण बरी कर दिया गया था। वहीं नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे को दोषी ठहराया गया था।

हालांकि, सावरकर मानहानि मामले का मुख्य प्रश्न गांधी हत्या नहीं बल्कि राहुल गांधी के 2023 के लंदन भाषण में सावरकर को लेकर की गई कथित टिप्पणी है।

कोर्ट ने पहले भी कहा था- पारिवारिक संबंध जरूरी मुद्दा नहीं

2025 में पुणे की विशेष अदालत ने राहुल गांधी की एक अर्जी खारिज की थी जिसमें सावरकर और गोडसे परिवार के बीच पारिवारिक संबंधों से संबंधित दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड पर लाने की मांग की गई थी।

अदालत ने उस समय कहा था कि मामला लंदन में विनायक दामोदर सावरकर के बारे में दिए गए कथित मानहानिकारक भाषण से जुड़ा है।

अदालत के मुताबिक, शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर, सावरकर के भाई के पोते हैं और इसलिए यह तय करना कि उनके मातृ पक्ष का पारिवारिक संबंध किससे है, इस मानहानि मामले के मुख्य मुद्दे के लिए आवश्यक नहीं था।

शिकायतकर्ता कौन हैं?

सत्यकी अशोक सावरकर, विनायक दामोदर सावरकर के भाई नारायण दामोदर सावरकर के पोते हैं।

इस लिहाज से वे वी. डी. सावरकर के ग्रैंड-नेफ्यू यानी भाई के पोते हैं।

उनके पिता अशोक सावरकर थे और मां हिमानी सावरकर थीं।

हिमानी सावरकर, गोपाल गोडसे की बेटी थीं।

इसी वजह से अदालत में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि चर्चा का विषय बनी है।

‘हर घर सावरकर’ अभियान से भी जुड़े हैं सत्यकी

जिरह के दौरान सत्यकी ने यह भी स्वीकार किया है कि वे ‘हर घर सावरकर’ अभियान से जुड़े हुए हैं।

उनके अनुसार, इस अभियान की एक समिति है और इसमें सावरकर की किताबें तथा उनसे संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने सावरकर से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता या मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की बात भी स्वीकार की है।

हालांकि उन्होंने इस आरोप से इनकार किया कि मानहानि का मुकदमा उन्होंने राजनीतिक लाभ या राहुल गांधी को निशाना बनाने के लिए दायर किया है।

राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत कब हुई?

सत्यकी सावरकर ने 2023 में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में भारतीय दंड संहिता की मानहानि से संबंधित धाराओं का सहारा लिया गया था।

बाद में मामले की सुनवाई विशेष MP/MLA अदालत में होने लगी।

राहुल गांधी ने आरोपों से इनकार किया और खुद को दोषी नहीं माना।

2024 की पुलिस जांच ने बढ़ाया विवाद

मई 2024 में पुणे पुलिस ने अदालत में अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल की।

शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान सावरकर की किताबों में उस कथित घटना का उल्लेख नहीं मिला जिसका राहुल गांधी ने अपने भाषण में हवाला दिया था।

पुलिस की रिपोर्ट में शिकायत को प्रथम दृष्टया सही बताए जाने की बात सामने आई थी।

हालांकि, अदालत में किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए सिर्फ पुलिस की प्रथम दृष्टया राय पर्याप्त नहीं होती।

अंतिम फैसला अदालत के सामने पेश किए गए सबूतों पर निर्भर करता है।

मामला अब किस चरण में है?

वर्तमान में शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर की जिरह चल रही है।

राहुल गांधी के वकील उनसे उनके बयानों, पारिवारिक पृष्ठभूमि और सावरकर से संबंधित उनके दावों पर सवाल कर रहे हैं।

यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है क्योंकि जिरह के जरिए बचाव पक्ष शिकायतकर्ता की गवाही की विश्वसनीयता और उसके दावों के आधार को चुनौती दे सकता है।

सावरकर की विचारधारा पर बहस

मामले में एक बड़ा सवाल सावरकर की विचारधारा और उनके लेखन की व्याख्या को लेकर भी है।

सत्यकी का कहना है कि सावरकर को मुसलमान विरोधी बताना गलत है।

उनका दावा है कि सावरकर ने अपने लेखन में मुसलमानों की प्रगति और उनके भविष्य को लेकर भी विचार व्यक्त किए थे।

दूसरी ओर, राहुल गांधी और उनके समर्थकों ने अतीत में सावरकर की राजनीतिक विचारधारा को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाया है।

इसी वैचारिक मतभेद का एक कानूनी रूप अब पुणे की अदालत में चल रहे मानहानि मामले में दिखाई दे रहा है।

क्या अदालत सावरकर की पूरी विचारधारा पर फैसला करेगी?

नहीं।

इस मामले में अदालत का मुख्य काम यह तय करना है कि राहुल गांधी का कथित बयान कानून के अनुसार मानहानि की श्रेणी में आता है या नहीं।

अदालत को यह भी देखना होगा कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप किस हद तक सबूतों से साबित होते हैं।

सावरकर की पूरी राजनीतिक और वैचारिक विरासत का मूल्यांकन इस मुकदमे का मुख्य विषय नहीं है।

कथित किताब का सवाल क्यों अहम है?

सत्यकी सावरकर के मामले में सबसे महत्वपूर्ण दावा यही है कि राहुल गांधी ने जिस कथित पुस्तक या प्रसंग का हवाला दिया, वह सावरकर के लेखन में मौजूद नहीं है।

अगर शिकायतकर्ता इस तथ्य को दस्तावेजों के जरिए स्थापित कर पाता है तो यह मुकदमे की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

लेकिन इसके साथ यह भी देखना होगा कि राहुल गांधी के भाषण का वास्तविक रिकॉर्ड क्या था और उसमें किस संदर्भ में वह बात कही गई थी।

भाषण की रिकॉर्डिंग भी महत्वपूर्ण

यही वजह है कि वॉइस सैंपल का मुद्दा सामने आया है।

अगर अदालत में उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता पर सवाल उठता है तो आवाज की फॉरेंसिक जांच उपयोगी हो सकती है।

लेकिन राहुल गांधी के वकील का कहना है कि अभी यह प्रक्रिया आवश्यक नहीं है।

उनका कहना है कि मुकदमा अभी ऐसे चरण में नहीं पहुंचा है जहां इस तरह की जांच की जरूरत हो।

मानहानि मामले में क्या साबित करना होगा?

आपराधिक मानहानि के मामले में शिकायतकर्ता को यह स्थापित करना होता है कि आरोपी द्वारा किया गया कथित बयान किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला था और वह कानूनी रूप से मानहानि की श्रेणी में आता है।

साथ ही परिस्थितियों, कथन की प्रकृति, उसके संदर्भ और आरोपी की मंशा जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इस मामले में शिकायतकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी का कथित बयान जानबूझकर गलत और दुर्भावनापूर्ण था।

राहुल गांधी की ओर से इन आरोपों का विरोध किया जा रहा है।

‘मुस्लिम विरोधी’ टिप्पणी पर विवाद

सत्यकी के मुताबिक, राहुल गांधी के कथित बयान ने सावरकर को मुसलमानों से नफरत करने वाले व्यक्ति के रूप में पेश किया।

उन्होंने अदालत में इस चित्रण को गलत बताया।

सत्यकी का दावा है कि सावरकर ने कभी मुसलमानों से नफरत नहीं की और उनके लेखन में मुसलमानों की प्रगति के लिए विचार मौजूद हैं।

यह दावा फिलहाल शिकायतकर्ता की गवाही का हिस्सा है और इसका अंतिम न्यायिक मूल्यांकन अभी बाकी है।

क्या राहुल गांधी का भाषण ही पूरा मामला है?

हां, मूल रूप से मानहानि की शिकायत इसी भाषण से जुड़ी है।

हालांकि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने सावरकर और गोडसे परिवार के संबंधों, गांधी हत्या और RSS से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।

इन सवालों के जरिए बचाव पक्ष शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि और उसके दावों की विश्वसनीयता को अदालत के सामने परखने की कोशिश कर रहा है।

सावरकर की 10 दया याचिकाओं पर भी हुई थी जिरह

इस मामले की पिछली सुनवाइयों में सावरकर की ब्रिटिश शासन के दौरान दायर दया याचिकाओं का मुद्दा भी उठा था।

जून 2026 में सत्यकी ने अदालत में स्वीकार किया था कि सावरकर ने ब्रिटिश सरकार के सामने 10 दया याचिकाएं दाखिल की थीं।

हालांकि उन्होंने कहा था कि इन याचिकाओं की भाषा को ब्रिटिश सरकार के प्रति आत्मसमर्पण या वफादारी की अभिव्यक्ति बताना गलत होगा।

उनका कहना था कि याचिकाओं की भाषा प्रशासनिक और औपचारिक प्रकृति की थी।

बचाव पक्ष ने ‘वीर’ उपाधि पर भी सवाल किया

राहुल गांधी के वकील ने सावरकर को ‘वीर’ कहे जाने के संदर्भ में भी सत्यकी से सवाल किए थे।

जिरह में भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त और अशफाकउल्ला खान जैसे क्रांतिकारियों का भी उल्लेख हुआ।

सत्यकी ने कहा था कि सावरकर को ‘वीर’ कहे जाने की परंपरा दया याचिकाओं से पहले की है।

उन्होंने यह भी कहा कि सावरकर ने भगत सिंह सहित अन्य क्रांतिकारियों की प्रशंसा अपने लेखों और कविताओं में की थी।

अदालत में इतिहास और राजनीति का टकराव

यह मुकदमा केवल कानूनी विवाद नहीं बल्कि भारतीय राजनीति और इतिहास से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों को भी सामने ला रहा है।

सावरकर भारतीय राजनीति में एक अत्यंत प्रभावशाली और विवादित ऐतिहासिक व्यक्तित्व रहे हैं।

एक पक्ष उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण क्रांतिकारी और हिंदुत्व विचारधारा के प्रमुख विचारक के रूप में देखता है।

दूसरा पक्ष उनके राजनीतिक विचारों और कुछ ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर गंभीर आलोचना करता है।

राहुल गांधी ने कई मौकों पर सावरकर की आलोचना की है।

वर्तमान मामला इसी व्यापक राजनीतिक विवाद के एक विशेष बयान पर केंद्रित है।

परिवार की प्रतिष्ठा का सवाल

सत्यकी सावरकर का कहना है कि राहुल गांधी के कथित बयान का असर केवल ऐतिहासिक व्यक्तित्व की छवि पर नहीं बल्कि उनके परिवार की प्रतिष्ठा पर भी पड़ा।

उन्होंने अदालत में कहा कि सावरकर के बारे में गलत तथ्य पेश किए जाने से परिवार को मानसिक पीड़ा हुई।

इसी आधार पर उन्होंने आपराधिक मानहानि की कार्रवाई की मांग की है।

राहुल गांधी के लिए मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

राहुल गांधी के खिलाफ पहले भी कई मानहानि से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं।

यह मामला विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें देश के एक प्रमुख राजनीतिक नेता और एक ऐतिहासिक राजनीतिक व्यक्तित्व के परिवार के बीच कानूनी विवाद चल रहा है।

मामले का फैसला भविष्य में सार्वजनिक जीवन में ऐतिहासिक व्यक्तियों के बारे में राजनीतिक भाषणों की कानूनी सीमाओं को लेकर भी चर्चा का विषय बन सकता है।

क्या अदालत भाषण को गलत घोषित कर चुकी है?

अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा।

पुणे पुलिस की 2024 की जांच रिपोर्ट में शिकायत को प्रथम दृष्टया सही बताए जाने की बात सामने आई थी।

लेकिन यह अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं है।

वर्तमान में अदालत में साक्ष्य और जिरह चल रही है।

अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।

अगली सुनवाई कब?

1 सितंबर की कार्यवाही के बाद मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अगली बहस 3 सितंबर को जारी रहने वाली है।

इस दौरान अदालत शिकायतकर्ता की जिरह और दोनों पक्षों की कानूनी दलीलों को आगे सुनेगी।

आगे क्या होगा?

अब अदालत के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं।

पहला, राहुल गांधी के भाषण की वास्तविक सामग्री क्या थी?

दूसरा, जिस पुस्तक या कथित प्रसंग का हवाला दिया गया, उसका वास्तविक स्रोत क्या है?

तीसरा, क्या वह बयान तथ्यात्मक रूप से गलत था?

चौथा, क्या वह बयान सावरकर की प्रतिष्ठा को कानूनी अर्थों में नुकसान पहुंचाता है?

और सबसे महत्वपूर्ण, क्या आपराधिक मानहानि के लिए आवश्यक कानूनी तत्व इस मामले में साबित होते हैं?

इन सभी सवालों का जवाब मुकदमे के आगे बढ़ने के साथ मिलेगा।

निष्कर्ष

पुणे की विशेष MP/MLA अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे सावरकर मानहानि मामले में मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान सावरकर परिवार की ओर से एक बार फिर राहुल गांधी के 2023 के लंदन भाषण पर सवाल उठाए गए। शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर ने अदालत में कहा कि राहुल गांधी ने अपने भाषण के जरिए विनायक दामोदर सावरकर की ऐसी छवि पेश की, जिससे उन्हें मुसलमानों से नफरत करने वाला और हिंसक व्यक्ति समझा जा सकता है। सत्यकी ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया।

सत्यकी के मुताबिक, राहुल गांधी ने लंदन में एक कथित पुस्तक का हवाला देते हुए कहा था कि सावरकर और उनके कुछ साथियों ने एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और सावरकर को इस घटना से खुशी हुई थी। सावरकर परिवार का कहना है कि सावरकर ने ऐसी कोई किताब नहीं लिखी और उनके किसी लेखन में इस तरह की घटना का उल्लेख नहीं मिलता। इसी आधार पर सत्यकी ने राहुल गांधी पर जानबूझकर गलत और दुर्भावनापूर्ण बयान देकर सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।

मई 2024 में पुणे पुलिस ने भी मामले में एक जांच रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की थी। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, पुलिस जांच में सावरकर की पुस्तकों में उस कथित घटना का उल्लेख नहीं मिला और पुलिस ने शिकायत में प्रथम दृष्टया सच्चाई होने की बात कही थी। हालांकि, पुलिस की ऐसी प्रारंभिक रिपोर्ट किसी व्यक्ति को मानहानि का दोषी साबित नहीं करती। अंतिम फैसला अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर करना होगा।

वर्तमान में सत्यकी सावरकर से राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार जिरह कर रहे हैं। जिरह के दौरान सावरकर परिवार की पृष्ठभूमि, नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे से पारिवारिक संबंध, RSS से जुड़ाव और महात्मा गांधी की हत्या जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं। सत्यकी ने अदालत में स्वीकार किया कि नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे RSS से सक्रिय रूप से जुड़े थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि मौजूदा RSS सावरकर की विचारधारा का अनुसरण करता है या नहीं।

इससे पहले अदालत ने राहुल गांधी की उस मांग को भी खारिज किया था जिसमें सत्यकी सावरकर के मातृ पक्ष की पारिवारिक वंशावली को रिकॉर्ड पर लाने की बात कही गई थी। अदालत ने कहा था कि मामला राहुल गांधी द्वारा लंदन में विनायक दामोदर सावरकर के बारे में कथित मानहानिकारक भाषण से जुड़ा है और शिकायतकर्ता के मातृ पक्ष की पारिवारिक जानकारी इस मामले के मुख्य प्रश्न को तय करने के लिए आवश्यक नहीं है।

मामले में राहुल गांधी की आवाज के नमूने को लेकर भी विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता पक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाज की फॉरेंसिक जांच के लिए वॉइस सैंपल लेने की मांग की है। राहुल गांधी के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मुकदमा अभी उस चरण पर नहीं पहुंचा है जहां ऐसी जांच जरूरी हो। उनका कहना है कि बचाव पक्ष की ओर से अभी यह मुद्दा उठाया जाना बाकी है कि कथित भाषण वास्तव में किस संदर्भ में दिया गया था और उसमें मानहानि का कानूनी इरादा था या नहीं।

सुनवाई के दौरान सावरकर की ब्रिटिश शासन के समय दायर दया याचिकाओं का मुद्दा भी पहले उठ चुका है। जून में सत्यकी ने स्वीकार किया था कि सावरकर ने 10 दया याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन उन्होंने यह तर्क खारिज किया कि इनका अर्थ ब्रिटिश शासन के प्रति वफादारी या आत्मसमर्पण था। उनके अनुसार, याचिकाओं की भाषा प्रशासनिक और औपचारिक प्रकृति की थी। इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के बीच ऐतिहासिक व्याख्या को लेकर मतभेद सामने आया।

हालांकि वर्तमान मुकदमे का मूल प्रश्न सावरकर की पूरी राजनीतिक विचारधारा या उनके स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का फैसला करना नहीं है। अदालत को मुख्य रूप से यह देखना है कि राहुल गांधी के 2023 के लंदन भाषण में कही गई कथित बात कानूनी रूप से मानहानि की श्रेणी में आती है या नहीं और शिकायतकर्ता इस आरोप को आवश्यक साक्ष्यों के साथ साबित कर पाता है या नहीं।

सत्यकी सावरकर का कहना है कि सावरकर को मुसलमानों से नफरत करने वाले व्यक्ति के रूप में पेश करना गलत है। उनका दावा है कि सावरकर के लेखन में मुसलमानों की प्रगति को लेकर भी विचार मिलते हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी के पक्ष ने मामले में सावरकर के राजनीतिक विचारों और ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए हैं।

यही कारण है कि यह मुकदमा कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस का भी केंद्र बन गया है।

फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। सत्यकी सावरकर की जिरह जारी है और दोनों पक्षों को अपने-अपने दावों और बचाव को साक्ष्यों के जरिए साबित करना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले की अगली कार्यवाही 3 सितंबर को जारी रहने वाली है।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि राहुल गांधी को दोषी ठहरा दिया गया है या सावरकर परिवार के सभी दावे अदालत ने स्वीकार कर लिए हैं। वर्तमान स्थिति में इतना ही स्पष्ट है कि सावरकर परिवार ने राहुल गांधी के 2023 के लंदन भाषण को मानहानिकारक बताते हुए आपराधिक शिकायत की है और अदालत में इस मामले की सुनवाई जारी है।

आने वाली सुनवाइयों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कथित भाषण की रिकॉर्डिंग, उसमें इस्तेमाल किए गए संदर्भ और जिस पुस्तक का हवाला दिया गया था, उसके संबंध में अदालत के सामने कौन से दस्तावेज और साक्ष्य रखे जाते हैं। साथ ही यह भी अहम होगा कि बचाव पक्ष शिकायतकर्ता की गवाही और उसके दावों को किस तरह चुनौती देता है।

फैसले तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है। लेकिन वर्तमान सुनवाई ने एक बार फिर सावरकर की ऐतिहासिक छवि, राहुल गांधी की राजनीतिक टिप्पणियों और सार्वजनिक जीवन में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर टिप्पणी की कानूनी सीमाओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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