बिग बॉस 20 में पहुंचे ‘पंचायत’ के दामाद जी, मिर्जापुर में भी मचा चुके हैं भौकाल, वेटर की नौकरी से यहां तक पहुंचे आसिफ खान

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सलमान खान के चर्चित रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ का ग्रैंड प्रीमियर 6 सितंबर 2026 को हो रहा है और शो शुरू होने से पहले ही इसके कंटेस्टेंट्स को लेकर जबरदस्त चर्चा है। इस सीजन में टीवी, ओटीटी, सोशल मीडिया और मनोरंजन की अलग-अलग दुनिया से जुड़े कई चेहरे नजर आने वाले हैं। इन्हीं में एक ऐसा नाम है, जिसे ओटीटी दर्शक पहले से ही अच्छी तरह पहचानते हैं—आसिफ खान।

आसिफ खान ने ‘पंचायत’ में गणेश यानी फुलेरा के ‘दामाद जी’ का किरदार निभाकर दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। वहीं ‘मिर्जापुर’ में बाबर, ‘पाताल लोक’ और ‘जामताड़ा’ जैसी वेब सीरीज में भी वह अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं। अब वही अभिनेता स्क्रिप्टेड कहानियों की दुनिया से निकलकर एक ऐसे रियलिटी शो में प्रवेश कर रहे हैं, जहां कैमरे हर वक्त उनके साथ रहेंगे और दर्शक उनके व्यक्तित्व का एक बिल्कुल अलग पहलू देख पाएंगे।

आसिफ की बिग बॉस एंट्री इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि उनका सफर सीधे किसी बड़े फिल्मी परिवार या आसान रास्ते से शुरू नहीं हुआ था। राजस्थान के एक छोटे शहर से निकलकर मुंबई पहुंचना, शुरुआती दौर में होटल में वेटर की नौकरी करना, थिएटर से अभिनय सीखना, जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम करना और फिर ओटीटी की चर्चित सीरीज में महत्वपूर्ण किरदार हासिल करना—उनकी कहानी लंबे संघर्ष की कहानी है।

‘पंचायत’ के दामाद जी ने बनाया अलग मुकाम

आसिफ खान को सबसे ज्यादा लोकप्रियता ‘पंचायत’ से मिली। इस सीरीज में उन्होंने गणेश नाम के किरदार की भूमिका निभाई, जिसे फुलेरा गांव का दामाद कहा जाता है।

सीरीज में उनका किरदार बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम वाला नहीं था, लेकिन सीमित मौजूदगी के बावजूद उन्होंने दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी। उनका अंदाज, संवाद बोलने का तरीका और परिस्थितियों के बीच पैदा होने वाली कॉमेडी ने उन्हें दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया।

‘पंचायत’ जैसी सीरीज की खासियत ही यह है कि इसके कई छोटे किरदार भी दर्शकों को याद रह जाते हैं। आसिफ का ‘दामाद जी’ वाला किरदार भी इसी श्रेणी में आता है।

उनका मशहूर अंदाज और ‘गजब बेइज्जती है यार’ जैसे संवादों ने सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रियता हासिल की। इसके बाद लोग उन्हें केवल एक अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि ‘पंचायत के दामाद जी’ के नाम से पहचानने लगे।

अब जब वह बिग बॉस के घर में प्रवेश कर रहे हैं तो उनके फैंस के बीच सबसे बड़ी उत्सुकता यही है कि पर्दे पर शांत, हास्यपूर्ण या परिस्थिति के अनुसार बदलते नजर आने वाले आसिफ असल जिंदगी में कैसे हैं।

‘मिर्जापुर’ में बाबर के किरदार से भी मिली पहचान

‘पंचायत’ से पहले और उसके बाद आसिफ खान ने कई चर्चित प्रोजेक्ट्स में काम किया। उनमें ‘मिर्जापुर’ का बाबर वाला किरदार भी महत्वपूर्ण है।

‘मिर्जापुर’ की दुनिया अपराध, सत्ता और हिंसा के इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसे माहौल में आसिफ ने बाबर का किरदार निभाया और अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का ध्यान खींचा।

यह भूमिका उनके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि इससे उन्हें बड़े ओटीटी दर्शक वर्ग तक पहुंच मिली।

इसके बाद ‘पाताल लोक’, ‘जामताड़ा’ और अन्य प्रोजेक्ट्स में भी उनके काम को देखा गया। यही वजह है कि आज आसिफ खान का नाम उन कलाकारों में लिया जाता है जिन्होंने छोटे लेकिन प्रभावशाली किरदारों के जरिए अपनी जगह बनाई।

राजस्थान के छोटे शहर से शुरू हुआ सफर

आसिफ खान का संबंध राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा कस्बे से बताया जाता है।

उनके परिवार का फिल्म इंडस्ट्री से कोई सीधा संबंध नहीं था। उनके पिता अय्यूब खान जेके सीमेंट में काम करते थे और उनकी मां फिरदौस गृहिणी थीं।

ऐसे परिवार से आने वाले किसी व्यक्ति के लिए अभिनय को करियर बनाना आसान नहीं होता। खासकर उस दौर में जब छोटे शहरों से मुंबई जाकर फिल्म और टेलीविजन की दुनिया में जगह बनाने के लिए आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।

लेकिन आसिफ के भीतर अभिनय का शौक काफी पहले से था।

स्कूल के नाटक से जगा अभिनय का सपना

आसिफ के अभिनय सफर की शुरुआत किसी बड़े स्टूडियो या फिल्म सेट से नहीं हुई थी।

रिपोर्टों के मुताबिक साल 2001 में उन्होंने अपने स्कूल के वार्षिक समारोह में ‘किस्सा कुर्सी का’ नामक नाटक में एक नौकर की भूमिका निभाई थी।

यह भूमिका भले ही छोटी रही हो, लेकिन मंच पर अभिनय करने का अनुभव उनके लिए खास था।

यही वह समय था जब उनके भीतर कलाकार बनने की इच्छा मजबूत होने लगी।

बाद में उन्हें कॉमेडी शो ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ से भी प्रेरणा मिली। राजू श्रीवास्तव के लोकप्रिय ‘शादीवाला’ एक्ट ने उन्हें काफी प्रभावित किया और उन्होंने अपने शहर में आयोजित एक स्टैंड-अप कॉमेडी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।

इस प्रतियोगिता में जीत हासिल करने के बाद उनका आत्मविश्वास और बढ़ा।

इसके बाद मनोरंजन की दुनिया में जाने का सपना धीरे-धीरे एक गंभीर लक्ष्य में बदल गया।

पिता की मौत के बाद बदल गई जिंदगी

आसिफ की जिंदगी में साल 2008 बेहद मुश्किल रहा। इसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया।

पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारियां उनके सामने आ गईं। ऐसे समय में अभिनय का सपना पूरा करने के बजाय प्राथमिकता परिवार को संभालना थी।

उन्होंने अलग-अलग छोटे-मोटे काम किए और अपनी पढ़ाई भी पूरी की।

यह दौर उनके लिए आर्थिक और व्यक्तिगत दोनों स्तर पर चुनौतीपूर्ण था। लेकिन इसी संघर्ष ने उन्हें आगे बढ़ने की जिद भी दी।

कुछ समय बाद उन्होंने तय किया कि वह मुंबई जाकर अभिनय की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाएंगे।

मुंबई पहुंचे तो नहीं था कोई आसान रास्ता

साल 2010 में आसिफ मुंबई पहुंचे।

मुंबई फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा केंद्र है, लेकिन किसी नए व्यक्ति के लिए यहां शुरुआत करना आसान नहीं होता। खासकर तब, जब उसके पास फिल्मी परिवार का समर्थन या मजबूत संपर्क न हो।

मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें अपने खर्चों के लिए काम करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने शुरुआत में होटल में वेटर के रूप में नौकरी की।

यह वही व्यक्ति था जो आगे चलकर बड़े ओटीटी प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाला था, लेकिन उस समय उसे अपने सपनों के साथ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा था।

बाद में उन्होंने मॉल में भी काम किया और साथ-साथ फिल्मों के ऑडिशन देते रहे।

जूनियर आर्टिस्ट से शुरू हुई फिल्मी पारी

ऑडिशन के दौरान उन्हें यह सलाह दी गई कि अगर उन्हें अभिनय में गंभीर करियर बनाना है तो उन्हें थिएटर से प्रशिक्षण लेना चाहिए।

उन्होंने इस सलाह को गंभीरता से लिया।

शुरुआती दिनों में उन्हें फिल्मों में छोटे रोल मिले। ‘रेडी’ और ‘अग्निपथ’ जैसी फिल्मों में उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम किया।

ऐसे रोल में स्क्रीन टाइम बेहद कम होता है और कई बार कलाकार का नाम भी दर्शकों तक नहीं पहुंचता। लेकिन आसिफ के लिए यह अनुभव महत्वपूर्ण था।

उन्हें फिल्म सेट के माहौल को समझने, कैमरे के सामने काम करने और इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली देखने का मौका मिला।

जयपुर जाकर थिएटर सीखा

अभिनय को लेकर गंभीरता बढ़ने के बाद आसिफ साल 2011 में जयपुर चले गए।

वहां उन्होंने ‘सार्थक’ और ‘उजागर’ जैसे थिएटर समूहों के साथ काम किया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने करीब पांच साल तक साबिर खान के थिएटर समूहों में भी काम किया।

थिएटर ने उन्हें अभिनय की बुनियादी तकनीकों को समझने में मदद की।

कैमरे के सामने अभिनय और मंच पर अभिनय में काफी अंतर होता है। थिएटर कलाकार को अपनी आवाज, शरीर और भावनाओं का इस्तेमाल बड़े स्तर पर करना पड़ता है।

इस दौरान आसिफ ने अभिनय को केवल नौकरी के रूप में नहीं, बल्कि एक कला के रूप में समझने की कोशिश की।

अंतरराष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल तक पहुंचे

थिएटर के इसी सफर के दौरान आसिफ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी काम करने का मौका मिला।

साल 2015 में उन्होंने पाकिस्तान नेशनल एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के जरिए कराची में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल में हिस्सा लिया।

वहां उन्होंने ‘कसुमल सपने’ नामक राजस्थानी संगीतात्मक रूपांतरण में काम किया, जो शेक्सपियर के ‘A Midsummer Night’s Dream’ पर आधारित था।

यह अनुभव उनके अभिनय सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

एक छोटे शहर से निकलकर थिएटर की दुनिया में अपनी पहचान बनाना और फिर अंतरराष्ट्रीय थिएटर महोत्सव तक पहुंचना उनके संघर्ष और मेहनत को दिखाता है।

मुंबई लौटकर बदली दिशा

2016 में आसिफ मुंबई लौटे।

इस बार वह केवल अभिनेता बनने की कोशिश नहीं कर रहे थे। उन्होंने फिल्म और कास्टिंग की प्रक्रिया को भी करीब से समझने का फैसला किया।

उन्होंने अपने दोस्त और मेंटर अभिषेक बनर्जी की कास्टिंग एजेंसी ‘कास्टिंग बे’ में करीब एक साल तक कास्टिंग एसोसिएट के तौर पर काम किया।

यह अनुभव उनके लिए काफी उपयोगी रहा होगा क्योंकि कास्टिंग प्रक्रिया को अंदर से समझने का मौका मिला।

साथ ही उन्होंने अभिनय के छोटे अवसरों को भी जारी रखा।

धीरे-धीरे उन्हें ऐसे प्रोजेक्ट्स मिलने लगे जहां उनके अभिनय को दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिला।

‘मिर्जापुर’ ने दिलाई पहचान

आसिफ के करियर में ‘मिर्जापुर’ एक बड़ा मोड़ साबित हुआ।

इस सीरीज ने भारत में ओटीटी कंटेंट को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसके कई किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए।

आसिफ ने इसमें बाबर की भूमिका निभाई।

उनका किरदार मुख्य पात्रों में से नहीं था, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

यहीं से वह उन कलाकारों की श्रेणी में आने लगे जिन्हें दर्शक नाम से भले कम जानते हों, लेकिन स्क्रीन पर देखते ही पहचानने लगते हैं।

‘पाताल लोक’ और ‘जामताड़ा’ में भी किया काम

‘मिर्जापुर’ के बाद आसिफ को अलग-अलग तरह के किरदार मिलने लगे।

उन्होंने ‘पाताल लोक’ में काम किया, जो अपराध और सामाजिक असमानताओं को लेकर बनी चर्चित वेब सीरीज रही।

इसके अलावा ‘जामताड़ा’ जैसे प्रोजेक्ट में भी उन्होंने अभिनय किया।

इन सीरीज ने उन्हें अलग-अलग प्रकार के किरदार निभाने का अवसर दिया।

यही विविधता एक अभिनेता के रूप में उनके लिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि वह किसी एक तरह की भूमिका में सीमित नहीं हुए।

‘पंचायत’ ने बना दिया ‘दामाद जी’

अगर ‘मिर्जापुर’ ने आसिफ को ओटीटी दर्शकों के बीच पहचान दिलाई, तो ‘पंचायत’ ने उनके किरदार को आम दर्शकों तक पहुंचा दिया।

‘पंचायत’ में गणेश का किरदार छोटा जरूर था, लेकिन उसकी प्रस्तुति ने लोगों को खूब हंसाया।

फुलेरा गांव के माहौल में गणेश की मौजूदगी और उसके संवाद दर्शकों को याद रह गए।

उनका किरदार कहानी में आने पर माहौल बदल देता था और इसी वजह से वह सीरीज के यादगार सपोर्टिंग किरदारों में शामिल हो गए।

लोग उन्हें ‘फुलेरा के दामाद जी’ कहने लगे।

यही उपनाम अब उनकी बिग बॉस एंट्री की खबर के साथ फिर चर्चा में है।

अब असली परीक्षा बिग बॉस के घर में

स्क्रिप्टेड सीरीज में अभिनेता को किरदार के अनुसार संवाद और परिस्थितियां मिलती हैं।

लेकिन ‘बिग बॉस’ में मामला अलग है।

यहां कैमरा लगातार मौजूद रहता है और कंटेस्टेंट को बिना किसी स्क्रिप्ट के अलग-अलग लोगों के साथ रहना पड़ता है।

यही कारण है कि आसिफ के फैंस अब यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि असल जिंदगी में उनका व्यवहार कैसा है।

क्या वह शांत रहेंगे? क्या वह मजाकिया अंदाज दिखाएंगे? क्या घर में रणनीति बनाएंगे? क्या वह बहस से दूर रहेंगे या विवादों में उतरेंगे?

इन सवालों के जवाब शो शुरू होने के बाद ही मिलेंगे।

अभिनय और रियलिटी शो में बड़ा अंतर

आसिफ अब तक ज्यादातर स्क्रिप्टेड कंटेंट में नजर आए हैं।

‘मिर्जापुर’ में बाबर हो या ‘पंचायत’ में गणेश—उनके हर किरदार के पीछे लेखक की कहानी, निर्देशक की सोच और एक निश्चित चरित्र संरचना होती है।

बिग बॉस में उन्हें अपने व्यक्तित्व के साथ सामने आना होगा।

यह किसी अभिनेता के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि दर्शक उसके अभिनय और वास्तविक व्यवहार के बीच अंतर तलाशते हैं।

आसिफ के लिए भी यही सबसे बड़ा बदलाव होगा।

क्या ‘दामाद जी’ का शांत अंदाज काम आएगा?

‘पंचायत’ के दर्शक आसिफ को एक मजेदार और परिस्थिति के हिसाब से प्रतिक्रिया देने वाले किरदार के रूप में देखते हैं।

लेकिन बिग बॉस में केवल मजाकिया होना पर्याप्त नहीं होता।

घर में रिश्ते बनाना, मतभेद संभालना, टास्क में प्रदर्शन करना, अपनी बात रखना और जरूरत पड़ने पर रणनीति बनाना भी जरूरी होता है।

अगर आसिफ अपने अभिनय के अनुभव से लोगों को समझने और परिस्थितियों को पढ़ने की क्षमता इस्तेमाल करते हैं, तो यह उनके लिए फायदेमंद हो सकता है।

लेकिन रियलिटी शो का खेल किसी स्क्रिप्ट के मुताबिक नहीं चलता।

संघर्ष की कहानी अब नए मंच पर

आसिफ खान का बिग बॉस तक पहुंचना उनके करियर का एक नया अध्याय है।

एक छोटे शहर से शुरुआत करने वाला लड़का, जिसने स्कूल के नाटक में छोटी भूमिका से अभिनय का सपना देखा, पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारियों से जूझा, मुंबई में वेटर की नौकरी की, मॉल में काम किया, जूनियर आर्टिस्ट बना, थिएटर किया और फिर ओटीटी के लोकप्रिय शो में पहचान बनाई—अब देश के सबसे चर्चित रियलिटी शो के घर में नजर आने वाला है।

यह बदलाव उनके सफर की लंबी दूरी को दिखाता है।

OTT से टीवी तक का सफर

आसिफ की लोकप्रियता मुख्य रूप से ओटीटी प्लेटफॉर्म और वेब सीरीज से आई।

अब बिग बॉस उन्हें टेलीविजन के बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर देगा।

बिग बॉस जैसे शो में भाग लेने के बाद किसी कलाकार की लोकप्रियता का दायरा तेजी से बढ़ सकता है।

जो दर्शक उन्हें ‘पंचायत’ या ‘मिर्जापुर’ में नहीं देख पाए, वे अब उन्हें उनके वास्तविक व्यक्तित्व के साथ जान सकते हैं।

यही कारण है कि यह शो उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

फिल्मी करियर में भी बढ़े अवसर

बिग बॉस में लोकप्रियता मिलने के बाद किसी अभिनेता को फिल्मों और वेब सीरीज में नए अवसर मिलने की संभावना भी बढ़ सकती है।

हालांकि किसी रियलिटी शो की लोकप्रियता सीधे अभिनय करियर की सफलता की गारंटी नहीं होती।

आसिफ के मामले में अच्छी बात यह है कि उनके पास पहले से थिएटर और स्क्रीन एक्टिंग का अनुभव है।

उन्होंने फिल्मों, वेब सीरीज और छोटे-बड़े किरदारों में काम किया है।

इसलिए बिग बॉस उनके अभिनय करियर की शुरुआत नहीं बल्कि करियर का एक नया चरण होगा।

निजी जिंदगी भी चर्चा में रही

आसिफ खान ने दिसंबर 2024 में अपनी लंबे समय की पार्टनर जेबा से शादी की थी। उनकी शादी निजी और पारंपरिक समारोह में हुई थी।

बिग बॉस में प्रवेश के बाद उनके प्रशंसक उनके निजी जीवन के बारे में भी ज्यादा जानना चाहेंगे।

हालांकि रियलिटी शो में किसी सेलिब्रिटी की निजी जिंदगी चर्चा में आना सामान्य बात है, लेकिन दर्शकों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि स्क्रीन पर दिखाई देने वाली हर बात व्यक्ति की पूरी वास्तविक जिंदगी को नहीं दर्शाती।

बिग बॉस 20 में कितना आगे जाएंगे आसिफ?

यह सवाल फिलहाल खुला है।

बिग बॉस का खेल केवल लोकप्रियता पर निर्भर नहीं करता। इसमें दर्शकों का समर्थन, घर के भीतर रिश्ते, टास्क में प्रदर्शन, रणनीति और विवादों को संभालने की क्षमता सभी मायने रखते हैं।

आसिफ के पास पहले से एक मजबूत ओटीटी फैनबेस है।

‘पंचायत’ और ‘मिर्जापुर’ जैसे शो के दर्शक उनके लिए वोट कर सकते हैं। लेकिन रियलिटी शो में लगातार प्रदर्शन करना और दर्शकों से जुड़ाव बनाए रखना अलग चुनौती है।

दर्शकों को दिखेगा आसिफ का नया चेहरा

अब तक दर्शकों ने आसिफ को अलग-अलग किरदारों में देखा है।

कभी वह अपराध की दुनिया का हिस्सा बने, कभी गांव के मजेदार माहौल में दामाद जी बने और कभी गंभीर भूमिकाओं में नजर आए।

बिग बॉस में कोई किरदार नहीं होगा।

वहां जो दिखेगा, वह उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू होगा—हालांकि कैमरा और रियलिटी शो का माहौल किसी व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।

यही वजह है कि उनके प्रशंसकों के लिए यह शो खास हो सकता है।

6 सितंबर से शुरू हुआ नया अध्याय

बिग बॉस 20 का ग्रैंड प्रीमियर 6 सितंबर 2026 को हो रहा है और सलमान खान इस सीजन को होस्ट कर रहे हैं। शो की प्रतियोगी सूची को लेकर प्रीमियर से पहले लगातार चर्चाएं चल रही थीं, जिनमें आसिफ खान का नाम भी प्रमुखता से सामने आया।

अब दर्शकों को यह देखने का मौका मिलेगा कि ‘पंचायत’ के दामाद जी कैमरों से भरे बिग बॉस के घर में किस तरह खुद को प्रस्तुत करते हैं।

उनका संघर्ष उन्हें बाकी कंटेस्टेंट्स से अलग पहचान दे सकता है, जबकि उनका अभिनय अनुभव उन्हें लोगों को समझने में मदद कर सकता है।

लेकिन बिग बॉस की दुनिया में कोई भी रणनीति हमेशा काम करेगी, यह कहना मुश्किल है।

निष्कर्ष

आसिफ खान की बिग बॉस 20 में एंट्री उनके लंबे संघर्ष के बाद आया एक बड़ा पड़ाव है। राजस्थान के निम्बाहेड़ा जैसे छोटे शहर से निकलकर मुंबई तक पहुंचने वाले आसिफ ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।

उन्होंने स्कूल के नाटक से अभिनय की शुरुआत की, पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारियों का सामना किया, मुंबई में वेटर और अन्य नौकरियां कीं, जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम किया और फिर थिएटर के जरिए अपनी अभिनय क्षमता को निखारा। इसके बाद ‘मिर्जापुर’, ‘पाताल लोक’, ‘जामताड़ा’ और ‘पंचायत’ जैसी सीरीज ने उन्हें पहचान दी।

‘पंचायत’ में गणेश यानी फुलेरा के दामाद जी के किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। वहीं ‘मिर्जापुर’ के बाबर ने उनके अभिनय के दूसरे रंग को दर्शकों के सामने रखा।

अब बिग बॉस 20 में उन्हें किसी किरदार की स्क्रिप्ट नहीं मिलेगी। यहां उन्हें अपने व्यक्तित्व के साथ रहना होगा। घर के अंदर रिश्ते कैसे बनते हैं, विवादों को वह किस तरह संभालते हैं, टास्क में कैसा प्रदर्शन करते हैं और दर्शकों के साथ कितना जुड़ पाते हैं—इन्हीं चीजों से उनका सफर तय होगा।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि जिस अभिनेता ने वेटर की नौकरी से लेकर ओटीटी के चर्चित किरदारों तक का सफर तय किया है, उसकी बिग बॉस यात्रा अपने आप में देखने लायक होगी। अब सवाल सिर्फ इतना है कि ‘फुलेरा के दामाद जी’ बिग बॉस के घर में भी दर्शकों का दिल जीत पाएंगे या यहां उन्हें अपने पुराने किरदारों से बिल्कुल अलग अंदाज दिखाना पड़ेगा।

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