Gold-Silver Crash: चांदी में जोरदार गिरावट, हजारों रुपये तक टूटा भाव; सोना भी दबाव में, जानें क्यों मचा हड़कंप

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सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को एक बार फिर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुओं पर दबाव दिखाई दिया और खासकर चांदी के वायदा भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार में अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर संबंधी बैठक, डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के संकेतों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

चांदी में गिरावट इतनी तेज रही कि कारोबार के अलग-अलग समय पर इसकी कीमत में हजारों रुपये का अंतर देखने को मिला। वहीं सोना भी अपने ऊंचे स्तरों से दबाव में आया। हालांकि दिन के अलग-अलग समय पर कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा और कुछ घरेलू बाजारों में सोने में हल्की तेजी भी दर्ज की गई। यही वजह है कि 10 सितंबर का कारोबार कीमती धातुओं के लिए बेहद अस्थिर रहा।

MCX के शुरुआती कारोबार में दिसंबर एक्सपायरी वाली चांदी करीब 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी करीब 907 रुपये की गिरावट के साथ खुली और कारोबार के दौरान लगभग 1,100 रुपये तक नीचे आई। सोने के अक्टूबर वायदा में भी शुरुआती कमजोरी देखने को मिली।

चांदी में क्यों मचा हड़कंप?

चांदी की कीमतों में हाल के महीनों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। इसी वजह से जब इसमें गिरावट आती है तो उसका असर रुपये के लिहाज से काफी बड़ा दिखाई देता है।

10 सितंबर को MCX पर दिसंबर एक्सपायरी वाली चांदी करीब 2,43,292 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली, जबकि पिछला बंद भाव 2,44,213 रुपये था। शुरुआती कारोबार में यह करीब 2,43,100 रुपये के आसपास पहुंच गई और दिन के दौरान 2,42,726 रुपये का निचला स्तर भी देखा गया।

दोपहर तक भी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा। एक अन्य अपडेट में दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स करीब 2,43,574 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी। इससे साफ है कि दिनभर चांदी के भाव में लगातार बदलाव हो रहा था।

क्या सच में एक झटके में 9,400 रुपये टूटे?

सोशल मीडिया और बाजार सुर्खियों में चांदी के भाव में हजारों रुपये की गिरावट को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि चांदी का भाव किस बाजार, किस कॉन्ट्रैक्ट और किस समय के आधार पर देखा जा रहा है।

MCX के एक खास कारोबारी सत्र में शुरुआती गिरावट करीब 900 से 1,100 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास थी। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत में करीब 4.2 फीसदी तक की गिरावट की रिपोर्ट आई, जिसने रुपये में चांदी के मूल्य पर दबाव बढ़ाया।

इसलिए हजारों रुपये की बड़ी गिरावट वाली सुर्खियों को समझते समय यह देखना जरूरी है कि तुलना किस पिछले स्तर से की जा रही है। अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट, इंट्राडे हाई और पिछले बंद भाव के बीच अंतर होने से गिरावट का आंकड़ा अलग दिख सकता है।

सोना भी आया दबाव में

सिर्फ चांदी ही नहीं, सोने की कीमतों में भी गुरुवार को कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स करीब 1,53,581 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जो पिछले बंद भाव 1,53,763 रुपये से लगभग 182 रुपये नीचे था।

बाद में कारोबार के दौरान सोने में भी उतार-चढ़ाव रहा। कुछ समय बाद यह 1,53,650 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। हालांकि दिन के अलग-अलग समय पर सोने ने कमजोरी से वापसी भी की और दोपहर के अपडेट में अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स करीब 1,53,980 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

इससे पता चलता है कि बाजार में एकतरफा गिरावट नहीं थी, बल्कि खरीदारी और बिकवाली के बीच लगातार मुकाबला चल रहा था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बड़ी हलचल

कीमती धातुओं की घरेलू कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का बड़ा असर पड़ता है। गुरुवार को वैश्विक बाजार में भी सोना और चांदी दबाव में नजर आए।

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी महंगाई के मजबूत आंकड़ों के बाद सोने की कीमत में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट आई। स्पॉट गोल्ड करीब 4,358 डॉलर प्रति औंस तक नीचे आया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी कमजोर हुआ।

चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमत में इससे भी तेज गिरावट दर्ज की गई और स्पॉट सिल्वर करीब 4.2 फीसदी फिसलकर 64.47 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। प्लेटिनम और पैलेडियम में भी गिरावट देखी गई।

अमेरिकी महंगाई का आंकड़ा बना बड़ा कारण

बाजार में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिकी महंगाई को लेकर है। निवेशक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व आने वाली बैठक में ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला कर सकता है।

अमेरिका में अगस्त के Producer Price Index यानी PPI में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस आंकड़े ने महंगाई के दबाव को लेकर बाजार की चिंता बढ़ाई।

इसके बाद कारोबारियों के बीच फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को लेकर उम्मीद बढ़ी। Reuters के मुताबिक, महंगाई के आंकड़े आने से पहले जहां ऐसी संभावना करीब 62 फीसदी आंकी जा रही थी, वहीं बाद में यह लगभग 70 फीसदी तक पहुंच गई।

ब्याज दर बढ़ने की आशंका से सोने पर दबाव क्यों?

सोना आमतौर पर ऐसा निवेश माना जाता है जिस पर नियमित ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ती है, तो निवेशकों को बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाली संपत्तियां अपेक्षाकृत आकर्षक लग सकती हैं।

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी भी सोने के लिए दबाव पैदा कर सकती है। यही कारण है कि महंगाई के आंकड़े और फेड की नीति की उम्मीदें सोने की कीमतों को तेजी से प्रभावित करती हैं।

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भी चिंता का कारण

सोने-चांदी के बाजार में एक और महत्वपूर्ण फैक्टर कच्चे तेल की कीमत है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

तेल की कीमत बढ़ने से वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ती है। यदि ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो केंद्रीय बैंकों पर महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है।

यही वजह है कि तेल, महंगाई, ब्याज दर और डॉलर—ये सभी फैक्टर फिलहाल सोने और चांदी की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव का भी असर

बाजार में भू-राजनीतिक तनाव भी एक बड़ा फैक्टर बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष से तेल की सप्लाई को लेकर चिंता पैदा हुई है।

ऐसे तनाव के समय आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग मिल सकती है। लेकिन यदि उसी समय महंगाई और ब्याज दर बढ़ने की आशंका मजबूत हो जाए, तो इसका उल्टा असर भी देखने को मिल सकता है।

यही कारण है कि फिलहाल सोने का बाजार एक साथ कई विपरीत संकेतों से प्रभावित हो रहा है।

चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा क्यों?

चांदी की कीमत आम तौर पर सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर मानी जाती है। इसका कारण यह है कि चांदी की मांग केवल निवेश और आभूषणों तक सीमित नहीं है। इसका औद्योगिक इस्तेमाल भी काफी महत्वपूर्ण है।

सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का उपयोग होता है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक मांग और निवेशकों की धारणा में बदलाव का असर चांदी पर तेजी से पड़ सकता है।

पिछले एक साल में चांदी में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। एक घरेलू बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्रमुख शहरों में 999 फाइन सिल्वर की कीमत सालभर में करीब 95 फीसदी तक बढ़ी थी। इतनी बड़ी तेजी के बाद मुनाफावसूली आने पर गिरावट भी तेज हो सकती है।

चांदी का पिछला रिकॉर्ड स्तर

MCX पर चांदी इस साल बेहद ऊंचे स्तरों तक पहुंच चुकी है। Business Standard के अनुसार, MCX सिल्वर फ्यूचर्स का साल का उच्चतम स्तर लगभग 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम तक गया था।

इसके मुकाबले 10 सितंबर को चांदी करीब 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही थी। यह अंतर बाजार में हाल के महीनों में आई असाधारण तेजी और उसके बाद हुए बड़े बदलाव को दिखाता है।

हालांकि अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट और आंकड़ों की तारीख के कारण कीमतों में अंतर हो सकता है, इसलिए निवेशकों को किसी एक आंकड़े को देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।

घरेलू बाजार में सोने-चांदी के भाव

देश के अलग-अलग शहरों में सोने और चांदी की खुदरा कीमतें भी एक जैसी नहीं होतीं। टैक्स, स्थानीय मांग, मेकिंग चार्ज और अन्य लागतों के कारण ग्राहक को मिलने वाला वास्तविक भाव MCX के वायदा भाव से अलग हो सकता है।

10 सितंबर की एक अपडेट में 24 कैरेट सोने की कीमत कई प्रमुख शहरों में करीब 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बताई गई। वहीं 999 फाइन सिल्वर करीब 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास थी।

इसलिए यदि कोई व्यक्ति सोना या चांदी खरीदने जा रहा है, तो उसे अपने शहर के उसी समय के खुदरा भाव की जानकारी लेनी चाहिए।

क्या अभी सोना-चांदी खरीदना चाहिए?

कीमती धातुओं की कीमतों में इस समय काफी अस्थिरता है। इसलिए केवल एक दिन की गिरावट देखकर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सोना या चांदी अब लगातार सस्ता ही होगा।

बाजार पर अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक, डॉलर, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई कारकों का असर पड़ सकता है।

यदि कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए सोना या चांदी खरीदना चाहता है, तो उसे अपने निवेश लक्ष्य, जोखिम क्षमता और समय सीमा को ध्यान में रखना चाहिए। केवल तेजी देखकर खरीदना या एक दिन की गिरावट देखकर घबराकर बेच देना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए क्या मायने?

अगर आप निवेश के बजाय आभूषण खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो MCX के भाव से सीधे अपनी खरीद कीमत तय नहीं करनी चाहिए।

ज्वेलरी की कीमत में सोने की शुद्धता, वजन, मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क शामिल होते हैं। इसलिए बाजार में सोने का भाव कम होने के बावजूद दुकान पर अंतिम बिल में उतना ही प्रतिशत अंतर दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।

चांदी के मामले में भी सिक्के, बर्तन, आभूषण और निवेश वाली फाइन सिल्वर की कीमतों में अंतर हो सकता है।

बाजार में अभी क्या देखना होगा?

अब निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई से जुड़े आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी नीति बैठक पर है। ब्याज दरों को लेकर संकेत आने के साथ सोने और चांदी में फिर तेज हलचल देखने को मिल सकती है।

अगर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख सामने आता है, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत होने की स्थिति में कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को सहारा मिल सकता है।

चांदी के लिए औद्योगिक मांग और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।

एक दिन की गिरावट से बदल गई तस्वीर?

10 सितंबर का कारोबार यह दिखाता है कि सोना और चांदी दोनों ही इस समय बेहद संवेदनशील बाजारों में शामिल हैं। कुछ घंटों के भीतर कीमतों में सैकड़ों और हजारों रुपये का अंतर दिखाई दे सकता है।

सुबह जहां चांदी दबाव में थी, वहीं दिन बढ़ने के साथ कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा। सोने में भी शुरुआती कमजोरी के बाद कुछ सुधार देखने को मिला। इसका अर्थ है कि बाजार में फिलहाल किसी एक दिशा में मजबूत स्थिरता नहीं है।

निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि कीमतों में अचानक होने वाले बदलाव को समझे बिना जल्दबाजी में फैसला न लिया जाए। सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और घटनाओं से तेजी से प्रभावित हो सकती हैं।

फिलहाल बाजार की नजर अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई, डॉलर, कच्चे तेल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन्हीं संकेतों से यह तय होगा कि हालिया गिरावट सिर्फ एक अस्थायी करेक्शन है या कीमती धातुओं के बाजार में किसी बड़े ट्रेंड बदलाव की शुरुआत।

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