दो डेड बॉडी के साथ समुद्र में 3 दिन… पलटी नाव पर बैठा रहा 15 साल का लड़का, ऐसे बची जान

3

समुद्र के बीच अगर कोई छोटी नाव पलट जाए और आसपास कई किलोमीटर तक सिर्फ पानी ही पानी दिखाई दे, तो ऐसी स्थिति में कुछ घंटे भी गुजारना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन अमेरिका के अलास्का में एक 15 साल के लड़के ने ऐसी परिस्थितियों में करीब 62 घंटे तक जिंदगी की जंग लड़ी। वह एक पलटी हुई छोटी नाव के ऊपर बैठा रहा, जबकि उसके साथ समुद्र में गए उसके बड़े भाई और कजिन की मौत हो चुकी थी। बेहद ठंडे पानी, अंधेरी रात और बिना खाने-पीने के सामान के बावजूद किशोर ने नाव को नहीं छोड़ा और आखिरकार बचाव दल ने उसे खोज निकाला।

इस दिल दहला देने वाली घटना ने अलास्का के दूरदराज इलाके में समुद्री यात्रा के जोखिम और इंसानी हिम्मत की एक ऐसी कहानी सामने रखी है, जिसे सुनकर बचाव दल के लोग भी हैरान रह गए। किशोर की पहचान उसके परिवार ने डेरिक पार्कर अग्नांगा के रूप में की है। वह सेंट लॉरेंस आइलैंड के सावूंगा समुदाय का रहने वाला है। उसके साथ उसके 35 वर्षीय बड़े भाई सिडनी कुलोवियी और 34 वर्षीय कजिन बार्टन रूकूक भी मछली पकड़ने गए थे। तीनों एक छोटी 18 फुट की मछली पकड़ने वाली नाव में समुद्र के लिए निकले थे।

मछली पकड़ने निकले थे तीनों

यह यात्रा किसी रोमांच के लिए नहीं थी, बल्कि स्थानीय जीवन का हिस्सा थी। तीनों 4 सितंबर को अलास्का के सेंट लॉरेंस आइलैंड से मछली पकड़ने के लिए निकले थे। उनका इरादा हैलिबट मछली पकड़कर वापस लौटने का था। परिवार के मुताबिक, उनके समुदाय में समुद्र से मछली पकड़ना केवल रोजमर्रा की जरूरत नहीं, बल्कि एक पुरानी परंपरा भी है।

सावूंगा एक छोटा और दूरदराज का समुदाय है, जहां स्थानीय लोग शिकार और मछली पकड़कर अपने परिवार के साथ-साथ समुदाय के दूसरे लोगों की भी मदद करते हैं। किशोर की मां वीना कुलोवियी ने बताया कि उनके बेटे और बड़े भाई समुद्र से भोजन उपलब्ध कराने की परंपरा से जुड़े हुए थे। परिवार के मुताबिक, वहां कई बार स्थानीय दुकानों में लोगों की जरूरत के मुताबिक मांस या मछली उपलब्ध नहीं होती, इसलिए लोग खुद समुद्र में जाकर भोजन जुटाते हैं।

लेकिन इस बार समुद्र की यात्रा अचानक एक भयानक हादसे में बदल गई।

पलट गई छोटी नाव

तीनों जिस नाव से निकले थे, वह समुद्र में किसी समय पलट गई। हादसे की सटीक वजह को लेकर सार्वजनिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन नाव के पलटने के बाद तीनों संकट में फंस गए। नाव के पलटने के बाद किशोर किसी तरह उसके ऊपर चढ़ने में कामयाब रहा।

उस समय उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि वह खुद को पानी से ऊपर कैसे रखे। अलास्का के पास बेरिंग सागर का पानी बेहद ठंडा रहता है। जिस इलाके में उसे पाया गया, वहां पानी का तापमान लगभग 10 डिग्री सेल्सियस बताया गया। ऐसी ठंड में लंबे समय तक पानी में रहना शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है।

किशोर ने इसलिए पलटी नाव को ही अपनी जिंदगी का सहारा बना लिया।

भाई और कजिन भी नाव पर थे

डेरिक के साथ उसके बड़े भाई और कजिन भी थे। हादसे के बाद तीनों ने किसी तरह नाव के आसपास या उसके ऊपर टिके रहने की कोशिश की। लेकिन समय बीतने के साथ हालात बिगड़ते गए।

बाद में बचाव दल को किशोर ने बताया कि उसका भाई नाव के नीचे फंस गया था। वहीं उसका कजिन कुछ समय तक पलटी नाव के ऊपर उसके साथ रहा। लेकिन ठंड, समुद्री लहरों और बेहद कठिन परिस्थितियों के कारण वह भी टिक नहीं सका।

किशोर ने बचाव दल को बताया कि उसके कजिन की पकड़ रात के दौरान छूट गई और वह समुद्र में चला गया। दोनों रिश्तेदारों की बाद में मौत की पुष्टि हुई और उनके शव भी बरामद कर लिए गए।

यानी जिस नाव पर 15 साल का डेरिक अपनी जिंदगी बचाने के लिए बैठा था, वही नाव उसके परिवार के दो सदस्यों की मौत की भी गवाह बन चुकी थी।

करीब 62 घंटे तक नाव पर बैठा रहा

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि डेरिक ने करीब 62 घंटे तक उस पलटी हुई नाव को नहीं छोड़ा। अलग-अलग रिपोर्टों में इस अवधि को करीब दो दिन से लेकर लगभग तीन दिन तक बताया गया है, जबकि विस्तृत रिपोर्टिंग में लगभग 62 घंटे का आंकड़ा सामने आया है।

इस दौरान उसके पास खाने या पीने के लिए पर्याप्त सामान नहीं था। वह लगातार ठंडे वातावरण में खुले समुद्र के बीच था। दिन के समय भी समुद्र में कोई मदद नजर नहीं आ रही थी और रात के दौरान स्थिति और कठिन हो जाती थी।

उसके पास बचने का सबसे बड़ा साधन वही छोटी नाव थी, जिस पर वह किसी तरह बैठा हुआ था।

अगर वह नाव से समुद्र में गिर जाता, तो ठंडे पानी में उसके लिए खुद को जिंदा रखना और भी मुश्किल हो सकता था। इसलिए उसने नाव की पकड़ बनाए रखी और मदद आने का इंतजार किया।

परिवार को नहीं थी पता कि वह जिंदा है

उधर जमीन पर परिवार की चिंता लगातार बढ़ रही थी। जब तीनों निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटे तो उनके लापता होने की सूचना अधिकारियों को दी गई।

अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने खोज और बचाव अभियान शुरू किया। खराब मौसम और समुद्र की कठिन परिस्थितियों के कारण खोज आसान नहीं थी। बचाव दल को यह भी नहीं पता था कि नाव आखिर किस दिशा में बह गई होगी।

परिवार के लोग रेडियो और बचाव अभियान से जुड़ी जानकारी पर नजर बनाए हुए थे। उनके लिए हर गुजरता घंटा चिंता बढ़ाने वाला था।

फिर वह क्षण आया, जब कोस्ट गार्ड के विमान ने समुद्र में कुछ ऐसा देखा जो सामान्य तैरती वस्तु जैसा लग रहा था।

वह वही पलटी हुई नाव थी।

और उसके ऊपर एक इंसान मौजूद था।

विमान ने देखा तो बचने की उम्मीद जगी

कोस्ट गार्ड के एक एयरक्रू ने सोमवार सुबह पलटी हुई नाव के ऊपर किशोर को देखा। वह नाव पर बैठा हुआ था और मदद का इंतजार कर रहा था। बचाव दल ने उसकी स्थिति को देखते हुए आसपास संकेत देने के लिए फ्लेयर्स और दूसरी सहायता सामग्री उपलब्ध कराई।

इसके बाद पास में मौजूद मछली पकड़ने वाले जहाज नॉर्थवेस्ट एक्सप्लोरर के चालक दल को किशोर तक पहुंचने के लिए निर्देशित किया गया।

यह जहाज करीब 162 फुट लंबा था और उस समय उसमें कई लोग मौजूद थे। जहाज के कप्तान एडम व्हाइट और उनकी टीम ने पलटी हुई छोटी नाव की ओर बढ़ना शुरू किया।

समुद्र में मौजूद छोटी नाव को बड़े जहाज के पास लाना भी आसान नहीं था। लेकिन बचाव दल ने सावधानी से किशोर तक पहुंचने की कोशिश की।

पीली जैकेट में दिखा 15 साल का लड़का

बचाव अभियान के वीडियो में किशोर को पलटी हुई नाव के ऊपर पीली जैकेट पहने हुए देखा गया। वह नाव के उलटे हिस्से पर घुटनों के बल बैठा था।

बचाव दल ने उसे एक लाइन की मदद से अपने जहाज की ओर खींचा और फिर रेस्क्यू बास्केट के जरिए उसे सुरक्षित जहाज पर पहुंचाया गया। वीडियो में दिखता है कि समुद्र की लहरों और ठंड के बीच बचावकर्मी लगातार उसे अपनी ओर खींच रहे हैं।

जब वह जहाज पर पहुंचा तो उसकी हालत सामान्य नहीं थी। उसके शरीर में हाइपोथर्मिया के लक्षण दिखाई दे रहे थे। यानी लंबे समय तक बेहद ठंडे वातावरण में रहने के कारण उसके शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक गिर गया था।

बचाव दल ने उसे गर्म रखने के लिए कंबल और हॉट पैक्स का इस्तेमाल किया। उसके साथ लगातार बातचीत भी की गई ताकि उसकी स्थिति पर नजर रखी जा सके।

कप्तान ने कहा- ‘बहुत मजबूत बच्चा है’

जिस जहाज के चालक दल ने किशोर को बचाया, उसके कप्तान एडम व्हाइट ने उसकी स्थिति देखकर उसकी हिम्मत की तारीफ की। उनके मुताबिक, इतने लंबे समय तक इतनी ठंडी परिस्थितियों में नाव से चिपके रहना असाधारण बात थी।

कप्तान ने बताया कि जब किशोर को जहाज पर लाया गया, तब उसके दांत ठंड से बज रहे थे। वह बेहद कमजोर था, लेकिन उसने बचाव दल को अपने भाई और कजिन के बारे में जानकारी दी।

उसने बताया कि उसका भाई नाव के नीचे था और कजिन उससे अलग हो गया था।

कप्तान ने किशोर की हिम्मत को देखते हुए उसे बेहद मजबूत बच्चा बताया। बचाव दल के लिए भी यह घटना भावनात्मक रूप से बेहद कठिन थी, क्योंकि एक तरफ उन्हें 15 साल के लड़के को जिंदा बचाने की खुशी थी, वहीं दूसरी तरफ उसके साथ गए दो लोगों को नहीं बचाया जा सका।

कोस्ट गार्ड के लिए भी बेहद मुश्किल ऑपरेशन

अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इस बचाव अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बताया। जिस क्षेत्र में घटना हुई, वह अलास्का का दूरदराज इलाका है। सेंट लॉरेंस आइलैंड रूस के मुकाबले अमेरिका के मुख्य हिस्से से ज्यादा दूर स्थित क्षेत्र के पास आता है।

ऐसे इलाके में समुद्र के बीच किसी छोटी नाव को खोज पाना अपने आप में कठिन काम है। इसके अलावा मौसम, कम तापमान और समुद्र की स्थिति बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।

कोस्ट गार्ड के एक अधिकारी ने कहा कि आम तौर पर ऐसी परिस्थितियों में किसी व्यक्ति के कई रातें समुद्र में जीवित रहने की उम्मीद बेहद कम होती है। खासकर जब पानी इतना ठंडा हो और व्यक्ति के पास पर्याप्त भोजन या गर्म रहने का इंतजाम न हो।

लेकिन डेरिक ने पलटी नाव को अपना सहारा बनाया और लगातार उस पर टिके रहने की कोशिश की।

परिवार के लिए खुशी और गम दोनों

जब परिवार को रेडियो के जरिए पता चला कि एक लड़का जिंदा मिला है, तो पहले उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि वह डेरिक हो सकता है।

परिवार के सदस्यों ने बचाव की खबर सुनते ही खुशी मनाई, लेकिन तुरंत उनके मन में दूसरा सवाल भी आया—बाकी दोनों कहां हैं?

बाद में उन्हें पता चला कि डेरिक के बड़े भाई और कजिन की जान नहीं बच सकी।

इस तरह परिवार के लिए यह घटना एक साथ खुशी और गहरे दुख का कारण बन गई। एक तरफ 15 साल का डेरिक जिंदा घर लौट सका, वहीं उसके भाई और कजिन की मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया। दोनों के शव बरामद कर लिए गए थे।

मां ने बेटे को बताया ‘मेरा सर्वाइवर’

डेरिक की मां वीना कुलोवियी ने अपने बेटे की इस कठिन परीक्षा के बाद उसकी हिम्मत को याद किया। परिवार के मुताबिक, लड़का पूरी घटना के दौरान शांत रहने की कोशिश कर रहा था और प्रार्थना करता रहा।

मां ने अपने बेटे को अपना ‘सर्वाइवर’ बताते हुए उसकी वापसी को बेहद भावुक क्षण बताया। उनके अनुसार, उनके बेटे की कहानी इस बात का उदाहरण है कि मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में भी इंसान उम्मीद नहीं छोड़ता।

परिवार ने यह भी बताया कि उनके समुदाय में शिकार और मछली पकड़ने के जरिए भोजन जुटाना और जरूरतमंद परिवारों के साथ उसे साझा करना पुरानी परंपरा है। यही वजह थी कि तीनों समुद्र में मछली पकड़ने निकले थे।

ठंडे समुद्र में जिंदा रहना इतना मुश्किल क्यों है?

डेरिक की कहानी इसलिए भी असाधारण है क्योंकि बेरिंग सागर का पानी बेहद ठंडा था। रिपोर्टों में उस समय पानी का तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस बताया गया है। ऐसी परिस्थितियों में शरीर लगातार गर्मी खोता है और लंबे समय तक संपर्क रहने पर हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है।

हाइपोथर्मिया में शरीर का तापमान सामान्य से नीचे गिरने लगता है। शुरुआत में व्यक्ति को तेज ठंड लगती है और शरीर कांपता है। इसके बाद कमजोरी, भ्रम और शारीरिक नियंत्रण में कमी जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। बेहद गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकता है।

इस घटना में किशोर का नाव के ऊपर रहना उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। उसने खुद को लगातार पानी में डूबे रहने से बचाया और पलटी हुई नाव को एक तरह के अस्थायी प्लेटफॉर्म की तरह इस्तेमाल किया।

62 घंटे की इस जंग ने सबको चौंकाया

समुद्र में किसी दुर्घटना के बाद बचाव की संभावना समय के साथ लगातार कम होती जाती है। लेकिन डेरिक ने लगभग 62 घंटे तक उम्मीद बनाए रखी। उसने न केवल ठंड और समुद्री लहरों का सामना किया, बल्कि अपने दो करीबी रिश्तेदारों को खोने का मानसिक सदमा भी झेला।

जब बचाव दल उसके पास पहुंचा तो वह अकेला था, लेकिन जिंदा था।

उसके बचने की कहानी अब अलास्का में एक असाधारण समुद्री बचाव की मिसाल बन गई है। यह घटना जहां एक ओर परिवार के लिए बेहद दर्दनाक है, वहीं दूसरी ओर इसने यह भी दिखाया कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में इंसानी शरीर और दिमाग कितनी मजबूती से संघर्ष कर सकते हैं।

डेरिक की कहानी में कोई आसान जीत नहीं थी। उसके सामने ठंडा समुद्र था, पलटी हुई नाव थी, रात का अंधेरा था और मदद का कोई निश्चित समय नहीं था। फिर भी उसने नाव को नहीं छोड़ा।

करीब तीन दिनों तक समुद्र में जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद जब बचाव दल ने उसे देखा, तो उसके लिए वह सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं था—वह घर लौटने की शुरुआत थी।

उसके भाई और कजिन को बचाया नहीं जा सका, लेकिन 15 वर्षीय डेरिक का जिंदा मिलना इस दुखद हादसे में परिवार के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी वजह बन गया। बचाव दल ने उसे सुरक्षित निकाला, गर्म किया और इलाज के लिए आगे भेजा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बाद में वह अपने परिवार के पास लौट आया और उसकी हालत में सुधार हुआ।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि समुद्र कितना खूबसूरत होने के साथ-साथ कितना खतरनाक भी हो सकता है। कुछ मिनटों में सामान्य मछली पकड़ने की यात्रा जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा में बदल सकती है। लेकिन डेरिक ने जिस धैर्य के साथ पलटी नाव पर टिके रहकर मदद का इंतजार किया, उसने उसकी जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

Share it :

End