‘छात्रों की गूंज नहीं, धमाका सुनाई दिया’, DUSU नतीजों पर जेपी नड्डा का राहुल गांधी पर निशाना

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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU चुनाव 2026 के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शनिवार, 19 सितंबर को घोषित परिणामों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की। इसी दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी मध्य प्रदेश के इंदौर में अपने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए युवाओं और छात्रों से संवाद कर रहे थे। DUSU के नतीजों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें ‘गूंज’ सुनाई नहीं दी, बल्कि ‘धमाका’ सुनाई दिया। यह बयान नड्डा की राजनीतिक प्रतिक्रिया थी, जिसे DUSU परिणाम और राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम के संदर्भ में देखा गया।

DUSU में ABVP ने जीते तीन पद

DUSU चुनाव के अंतिम नतीजों के मुताबिक ABVP के यश डबास अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए। सचिव पद पर रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने जीत दर्ज की। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन विजयी रहे। इस तरह केंद्रीय पैनल की चार सीटों में से तीन ABVP के खाते में गईं, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती। कांग्रेस से संबद्ध NSUI चारों केंद्रीय पदों में से किसी पर भी जीत हासिल नहीं कर सकी।

अध्यक्ष पद पर यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि मीणा को 22,523 वोट प्राप्त हुए। इस तरह अध्यक्ष पद पर जीत का अंतर 2,053 वोट रहा। लेफ्ट गठबंधन की उम्मीदवार अनाया रतूड़ी 5,377 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी को 21,650 वोट मिले, जबकि NSUI उम्मीदवार नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले। संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए। इस सीट पर समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव को 15,778 और NSUI के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले।

उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत

DUSU के चार केंद्रीय पदों में सबसे अलग नतीजा उपाध्यक्ष पद का रहा। निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। ABVP के इशू मौर्य को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले।

दीपांशु शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे थे। उन्हें संगठन से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। चुनाव परिणाम में उनकी जीत ने DUSU के केंद्रीय पैनल में एक अलग राजनीतिक समीकरण बनाया।

जेपी नड्डा ने क्या कहा?

DUSU नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का संदर्भ लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘गूंज’ सुनाई नहीं दी, लेकिन ‘धमाका’ जरूर सुनाई दिया। नड्डा का यह बयान राहुल गांधी के छात्र संपर्क कार्यक्रम और उसी दिन सामने आए DUSU परिणामों को जोड़कर की गई राजनीतिक टिप्पणी थी।

नड्डा ने आगे राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह ‘झूठ की राजनीति’ करते हैं और उनकी केवल ‘झूठ की गूंज’ है। यह राहुल गांधी और कांग्रेस को लेकर नड्डा का राजनीतिक आरोप है।

बीजेपी के दूसरे नेताओं ने भी DUSU परिणामों को राहुल गांधी के छात्र संपर्क अभियान से जोड़कर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। हालांकि, चुनाव परिणामों से किसी छात्र के राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विचार या किसी विशेष नेता के समर्थन अथवा विरोध का सीधे निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम क्या था?

DUSU नतीजों के दिन ही राहुल गांधी इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों से संवाद कर रहे थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया और देश की संस्थाओं के कामकाज जैसे विषयों पर अपनी बात रखी।

राहुल गांधी ने छात्रों से सवाल पूछने की आदत बनाए रखने की बात कही। उन्होंने शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा और युवाओं से संस्थागत कामकाज पर सवाल करने की अपील की।

अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों से सवाल पूछने के बजाय एक तरह की आज्ञाकारिता चाहती है। उन्होंने क्रिकेट प्रशासन से जुड़े एक उदाहरण का उल्लेख करते हुए योग्यता और अवसर को लेकर सवाल उठाया।

उनका यह कार्यक्रम कांग्रेस के युवा और छात्र संपर्क अभियान का हिस्सा था। इसी वजह से DUSU के परिणाम सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने दोनों घटनाओं को एक ही राजनीतिक संदर्भ में जोड़कर प्रतिक्रिया दी।

बीजेपी ने नतीजों को राहुल गांधी के अभियान से जोड़ा

DUSU में ABVP की तीन सीटों पर जीत के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने इसे कांग्रेस और NSUI के लिए राजनीतिक संदेश के रूप में पेश किया। पार्टी नेताओं ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी दिन दिल्ली विश्वविद्यालय में ABVP के प्रदर्शन को भी देखा जाना चाहिए।

हालांकि, चुनाव परिणामों का राजनीतिक अर्थ अलग-अलग दल अपने-अपने नजरिए से निकाल रहे हैं। DUSU चुनाव एक विश्वविद्यालय के छात्र संघ का चुनाव है और इसमें उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पहचान, कॉलेज स्तर के मुद्दे, छात्र संगठनों का संगठनात्मक ढांचा और स्थानीय अभियान जैसे कई कारक प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए इसे सीधे राष्ट्रीय राजनीति का प्रतिनिधि परिणाम मानना जरूरी नहीं है।

एक विश्लेषण में भी DUSU परिणाम को राष्ट्रीय स्तर के Gen Z या युवा मतदाताओं के फैसले के बराबर नहीं माना गया।

NSUI का केंद्रीय पैनल में खाता नहीं खुला

इस बार NSUI के लिए परिणाम खास तौर पर महत्वपूर्ण रहे क्योंकि संगठन चारों केंद्रीय पदों में से कोई भी पद हासिल नहीं कर सका। अध्यक्ष पद पर उसके उम्मीदवार विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले, लेकिन वह यश डबास से पीछे रह गए। सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर भी NSUI उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सके। उपाध्यक्ष पद पर भी संगठन के उम्मीदवार को निर्दलीय दीपांशु शौकीन से हार का सामना करना पड़ा।

इससे पहले पिछले चुनाव में NSUI ने उपाध्यक्ष पद हासिल किया था। इस बार केंद्रीय पैनल में किसी पद पर जीत नहीं मिलने से संगठन के चुनावी प्रदर्शन पर चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, किसी छात्र संगठन के एक चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर उसके व्यापक राजनीतिक समर्थन या भविष्य की स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालना अलग विश्लेषण का विषय है।

चुनाव में मतदान और कैंपस के मुद्दे

DUSU चुनाव इस साल कई छात्र मुद्दों के बीच हुआ। छात्र आवास, हॉस्टल की उपलब्धता, कैंपस सुरक्षा, परीक्षा व्यवस्था, रोजगार और इंटर्नशिप जैसे मुद्दे चुनावी अभियान में चर्चा में रहे।

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत गिरने की घटना, जिसमें पांच लोगों की मौत हुई थी, के बाद छात्र आवास और किराये के कमरों की सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रहा। चुनाव अभियान के दौरान अलग-अलग छात्र संगठनों ने छात्रों से जुड़े स्थानीय मुद्दों को अपने घोषणापत्र और प्रचार का हिस्सा बनाया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इस चुनाव में मतदान प्रतिशत करीब 40.46 प्रतिशत रहा, जो पिछले दो वर्षों के मुकाबले अधिक था।

यश डबास की जीत का आंकड़ा

अध्यक्ष पद पर यश डबास को 24,576 वोट मिले। उनके सामने NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। दोनों के बीच 2,053 वोटों का अंतर रहा।

अध्यक्ष पद की लड़ाई में कई राउंड तक दोनों उम्मीदवारों के बीच बढ़त बदलती रही और अंतिम चरणों में परिणाम स्पष्ट हुआ। अंततः डबास ने अध्यक्ष पद हासिल किया।

यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि अध्यक्ष पद पर ABVP और NSUI के बीच अंतर सचिव और संयुक्त सचिव पदों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहा। दूसरी ओर उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले, जो केंद्रीय पैनल के विजेताओं में सबसे अधिक वोट थे।

बीजेपी नेताओं ने दी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

DUSU परिणाम आने के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने ABVP उम्मीदवारों को बधाई दी। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर जीत के लिए ABVP को बधाई दी। वहीं केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने युवाओं की आवाज से जुड़ी टिप्पणी करते हुए विजयी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी परिणामों पर प्रतिक्रिया दी और इसे युवाओं से जुड़े कुछ मूल्यों के समर्थन के रूप में प्रस्तुत किया। ये सभी नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं और इन्हें चुनाव के आधिकारिक परिणामों से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

DUSU परिणाम और राष्ट्रीय राजनीति

DUSU चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी इसलिए भी तेज हुई है क्योंकि यह परिणाम राहुल गांधी के छात्र संपर्क अभियान के दिन सामने आया। बीजेपी नेताओं ने इसे कांग्रेस के छात्र संवाद कार्यक्रम के संदर्भ में उठाया, जबकि DUSU का वास्तविक चुनाव कैंपस के छात्रों, उम्मीदवारों और छात्र संगठनों के बीच हुआ।

दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से छात्र पढ़ते हैं। इस वजह से DUSU चुनाव को राष्ट्रीय छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद इसके परिणामों को पूरे देश के युवाओं की राजनीतिक राय के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

DUSU के नतीजे एक विशिष्ट विश्वविद्यालयी निर्वाचन क्षेत्र के हैं। इनमें छात्रों ने चार केंद्रीय पदों के लिए अलग-अलग उम्मीदवारों को वोट दिया और उपाध्यक्ष पद पर एक निर्दलीय उम्मीदवार को सबसे अधिक समर्थन मिला। इसलिए चारों पदों के परिणाम यह भी दिखाते हैं कि एक ही चुनाव में छात्रों का समर्थन सभी पदों पर समान तरीके से नहीं बंटा।

आगे निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने क्या मुद्दे होंगे?

चुनाव परिणाम आने के बाद अब नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी। हॉस्टल और सुरक्षित आवास, परीक्षा व्यवस्था, कैंपस सुविधाएं, रोजगार और इंटर्नशिप, छात्र कल्याण तथा सुरक्षा जैसे विषय आने वाले कार्यकाल में महत्वपूर्ण रह सकते हैं।

अध्यक्ष यश डबास, सचिव रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव लक्ष्य राज सिंह ABVP से हैं, जबकि उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए हैं। चारों प्रतिनिधियों का चुनाव अलग-अलग मुकाबलों के जरिए हुआ है और उनके सामने विश्वविद्यालय के छात्रों की विभिन्न मांगों को उठाने की जिम्मेदारी होगी।

DUSU चुनाव परिणामों पर जेपी नड्डा की टिप्पणी फिलहाल राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। उन्होंने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जवाब में ‘गूंज नहीं, धमाका’ वाली टिप्पणी की और कांग्रेस नेता पर ‘झूठ की राजनीति’ करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, राहुल गांधी का कार्यक्रम शिक्षा, रोजगार और छात्रों के सवालों पर केंद्रित था। दोनों नेताओं के बयानों को उनके संबंधित राजनीतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

DUSU के आधिकारिक परिणामों में ABVP ने तीन केंद्रीय पद जीते और उपाध्यक्ष पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन के खाते में गया। इन आंकड़ों से चुनाव का परिणाम स्पष्ट होता है, जबकि इस परिणाम के व्यापक राजनीतिक अर्थ को लेकर अलग-अलग दलों और नेताओं ने अपनी-अपनी व्याख्याएं सामने रखी हैं।

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