
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पेइंग गेस्ट यानी PG की इमारत गिरने के हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा और हॉस्टल की कमी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि छात्रों के लिए पर्याप्त संख्या में नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं और उन्हें असुरक्षित PG में रहने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने सत्य निकेतन हादसे की जांच की स्थिति और जवाबदेही को लेकर भी सवाल किया है।
राहुल गांधी ने यह सवाल ऐसे समय उठाया है जब दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर 2026 को एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। इस इमारत में PG चल रहा था और इसमें रहने वालों में कई छात्र शामिल थे। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद दिल्ली में छात्रों के निजी आवास, PG की सुरक्षा, भवनों की स्थिति और विश्वविद्यालयों में उपलब्ध हॉस्टल की संख्या को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हुई।
अरपित के परिवार से मुलाकात के बाद उठाया सवाल
राहुल गांधी ने अपने ताजा बयान में सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वाले छात्र अरपित झाझ के परिवार का जिक्र किया। रिपोर्टों के अनुसार अरपित मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले 21 वर्षीय छात्र थे और सत्य निकेतन हादसे में उनकी मौत हुई थी। राहुल गांधी ने परिवार से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर उनकी पीड़ा का उल्लेख करते हुए जवाबदेही का सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि परिवार यह जानना चाहता है कि उनके बेटे की जान क्यों गई और इस घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में छात्रों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को व्यापक मुद्दे के रूप में उठाते हुए पूछा कि अगर पर्याप्त और सुरक्षित हॉस्टल उपलब्ध होते तो क्या छात्रों को ऐसी इमारतों में रहने की जरूरत पड़ती।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि हादसे के कारण और इसके लिए कानूनी या प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने का सवाल जांच और संबंधित प्रक्रियाओं से जुड़ा है। किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना जांच और कानूनी निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकता है।
‘नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे?’
राहुल गांधी ने सीधे तौर पर पूछा कि देश में छात्रों के लिए नए और सुरक्षित हॉस्टल बनाने पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा। उनका तर्क है कि बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए अपने शहर या गांव से दूसरे शहरों में जाते हैं और वहां रहने के लिए उन्हें निजी PG या किराए के कमरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
दिल्ली जैसे शिक्षा केंद्रों में यह समस्या और अधिक दिखाई देती है। दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके आसपास बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं, लेकिन संस्थागत हॉस्टल की क्षमता छात्रों की कुल संख्या की तुलना में सीमित है। हालिया रिपोर्टों में बताया गया है कि हॉस्टल की कमी के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराए के आवास का विकल्प चुनते हैं।
सत्य निकेतन हादसे के बाद यही सवाल प्रमुखता से सामने आया कि जब छात्रों को विश्वविद्यालय या कॉलेज परिसर में पर्याप्त हॉस्टल नहीं मिलता, तो उन्हें निजी आवास तलाशना पड़ता है। ऐसे में भवन की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास और स्थानीय नियमों के पालन की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
छात्र क्यों चुनते हैं PG?
हर छात्र को कॉलेज या विश्वविद्यालय का हॉस्टल उपलब्ध हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई संस्थानों में हॉस्टल की सीटें सीमित होती हैं और प्रवेश अलग-अलग पात्रता मानदंड या उपलब्धता के आधार पर होता है। कुछ कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा है ही नहीं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के आसपास स्थित कई कॉलेजों को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में हॉस्टल की सीमित उपलब्धता का उल्लेख किया गया है। Careers360 की एक रिपोर्ट के अनुसार दक्षिणी परिसर से जुड़े कई कॉलेजों में संस्थागत हॉस्टल सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे छात्रों को निजी PG की ओर जाना पड़ता है।
इसके अलावा बाहर से आने वाले छात्रों के लिए कॉलेज से उचित दूरी पर सुरक्षित और किफायती आवास ढूंढना भी चुनौती हो सकता है। किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, बिजली-पानी के खर्च और अन्य शुल्क मिलाकर रहने की कुल लागत बढ़ सकती है।
लड़कियों के हॉस्टल को लेकर भी सवाल
राहुल गांधी ने छात्राओं के लिए हॉस्टल की कमी का मुद्दा भी उठाया। इससे पहले इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा ने उनसे अपने रहने की समस्या साझा की थी। राहुल गांधी के अनुसार, वह छात्रा गांव से पढ़ाई करने शहर आई थी और हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे PG में रहना पड़ रहा था।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में उस छात्रा के सवाल को साझा करते हुए कहा कि सुरक्षित आवास की लागत छात्रों और उनके परिवारों के लिए बड़ी चिंता बन सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आवास की समस्या के कारण कुछ छात्राओं को पढ़ाई छोड़ने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। यह दावा राहुल गांधी की ओर से किया गया है और इसे स्वतंत्र आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
छात्रावासों की उपलब्धता का मुद्दा विशेष रूप से छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि परिवार अक्सर सुरक्षा और आवागमन को लेकर अतिरिक्त चिंताओं का सामना करते हैं। ऐसे में सुरक्षित, संस्थागत और किफायती आवास की उपलब्धता शिक्षा तक पहुंच को प्रभावित करने वाला एक कारक बन सकती है।
‘सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है, हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?’
इंदौर के कार्यक्रम में एक छात्रा ने राहुल गांधी से सरकार के खर्च और छात्रावास की सुविधा को लेकर सवाल किया था। राहुल गांधी ने बाद में सोशल मीडिया पर उस बातचीत का उल्लेख किया। उनके अनुसार छात्रा का सवाल था कि सरकार के पास दीये जलाने के लिए पैसा है, लेकिन छात्रों के हॉस्टल के लिए क्यों नहीं है।
यह बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा है। इसे सरकारी बजट के विस्तृत तुलनात्मक आंकड़े के रूप में नहीं, बल्कि कार्यक्रम में छात्रा द्वारा उठाए गए सवाल और राहुल गांधी की उस पर प्रतिक्रिया के रूप में समझना चाहिए।
सत्य निकेतन हादसे ने क्यों बढ़ाई चिंता?
सत्य निकेतन में हुई दुर्घटना ने छात्रों के निजी आवासों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी। हादसे के बाद दिल्ली में PG और हॉस्टल की सुरक्षा जांच को लेकर मांगें उठीं। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली में PG और हॉस्टल की ऑडिट से संबंधित निर्देश दिए थे और घटना के बाद भवन की अनुमति तथा जिम्मेदारी से जुड़े सवाल भी उठे।
राहुल गांधी ने अब इसी संदर्भ में जांच की स्थिति पूछी है। उन्होंने सवाल किया कि हादसे की जांच कहां तक पहुंची और छात्रों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी कैसे तय की जाएगी।
किसी भवन के सुरक्षित होने का निर्धारण केवल उसकी उम्र से नहीं होता। भवन की संरचनात्मक स्थिति, समय-समय पर होने वाली जांच, निर्माण और उपयोग की अनुमति, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास और रखरखाव जैसे कई पहलू इसमें शामिल होते हैं।
दिल्ली में PG की समस्या कितनी बड़ी है?
दिल्ली देश के सबसे बड़े शिक्षा और रोजगार केंद्रों में से एक है। देश के अलग-अलग राज्यों से विद्यार्थी यहां पढ़ने आते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अन्य संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की बड़ी संख्या को देखते हुए किराए के आवास और PG की मांग बनी रहती है।
लेकिन संस्थागत हॉस्टल की सीटें सीमित होने के कारण हर छात्र को विश्वविद्यालय की आवासीय सुविधा मिलना संभव नहीं होता। यही वजह है कि निजी PG और किराए के कमरों का बाजार छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। हालिया रिपोर्टों में भी DU के छात्रों के बीच हॉस्टल की कमी और निजी आवास पर निर्भरता को प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने रखा गया है।
सत्य निकेतन की घटना ने यह सवाल भी उठाया कि निजी छात्र आवासों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन करता है और शिकायत होने पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किस विभाग या स्थानीय निकाय की होती है।
हादसे के बाद सुरक्षा जांच पर जोर
सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने दिल्ली में PG और हॉस्टल के सुरक्षा ऑडिट की मांग उठाई। कांग्रेस नेताओं ने भी दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास संचालित PG इमारतों की सुरक्षा जांच से संबंधित सवाल उठाए थे।
इस बहस का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सुरक्षा जांच केवल हादसे के बाद नहीं, बल्कि नियमित रूप से होनी चाहिए। अगर किसी इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं तो वहां अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास, बिजली व्यवस्था, संरचनात्मक मजबूती और अधिकृत उपयोग की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की मांग
छात्र आवास का मुद्दा केवल एक भवन या एक इलाके तक सीमित नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों के दौरान भी छात्र आवास और सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। विभिन्न छात्र संगठनों ने अपने-अपने घोषणापत्रों में नए हॉस्टल, सुरक्षित PG, आवास सहायता और सुरक्षा ऑडिट जैसे प्रस्ताव रखे थे।
इससे यह स्पष्ट होता है कि छात्र आवास की समस्या पर अलग-अलग संगठनों और समूहों की ओर से अलग-अलग समाधान सुझाए जा रहे हैं। इनमें नए हॉस्टल बनाना, मौजूदा हॉस्टल का विस्तार, निजी आवास की सुरक्षा जांच, किराए से संबंधित सहायता और छात्र आवास के लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से क्या पूछा?
राहुल गांधी के ताजा सवाल मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर केंद्रित रहे। पहला, छात्रों के लिए नए और सुरक्षित हॉस्टल पर्याप्त संख्या में क्यों नहीं बनाए जा रहे। दूसरा, छात्रों को असुरक्षित या खराब स्थिति वाले PG में रहने की स्थिति क्यों बन रही है। तीसरा, सत्य निकेतन हादसे की जांच किस स्थिति में है और इस घटना में जवाबदेही कैसे तय होगी।
उन्होंने इसे छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ा व्यापक मुद्दा बताया है। उनके बयान में सत्य निकेतन में जान गंवाने वाले छात्र के परिवार की पीड़ा और इंदौर में छात्रा द्वारा उठाए गए हॉस्टल से जुड़े सवाल दोनों का संदर्भ था।
हालांकि, इन राजनीतिक सवालों के जवाब में सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह अलग प्रशासनिक और नीतिगत प्रक्रिया का विषय है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में राहुल गांधी के सवाल प्रमुखता से सामने आए हैं, जबकि सत्य निकेतन हादसे की जिम्मेदारी और जांच से जुड़े अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों तथा प्रशासनिक प्रक्रिया से स्पष्ट होंगे।
आगे क्या देखना होगा?
सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों के लिए सुरक्षित आवास का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली में PG और हॉस्टल की सुरक्षा जांच से क्या निष्कर्ष निकलते हैं, कितनी इमारतों में खामियां मिलती हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
इसके साथ ही नए छात्रावासों की जरूरत, उनकी क्षमता, निर्माण की समयसीमा और छात्रों के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। दिल्ली सरकार ने 10,000 छात्रों के लिए नए हॉस्टल बनाने की घोषणा की है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार इनके निर्माण में 18 से 24 महीने लग सकते हैं। इस बीच छात्रों के लिए तत्काल सुरक्षित आवास की व्यवस्था भी एक अलग चुनौती बनी हुई है।
फिलहाल राहुल गांधी का बयान एक राजनीतिक सवाल के रूप में सामने आया है, जबकि सत्य निकेतन हादसे की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अलग स्तर पर चल रही है। घटना ने यह जरूर दिखाया है कि उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में आने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास भी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।