‘मुझे लगा था भारत हमें मार ही देगा…’, जापान की 2 रन से हार के बाद पूर्व विदेश मंत्री का मजेदार रिएक्शन

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भारत और जापान के बीच मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को खेला गया पांच ओवर का टी20 इंटरनेशनल मुकाबला बेहद रोमांचक अंदाज में खत्म हुआ। बारिश के कारण मुकाबला छोटा करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद जापान ने भारत को आखिरी गेंद तक कड़ी टक्कर दी। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पांच ओवर में चार विकेट पर 32 रन बनाए। जवाब में जापान की टीम पांच ओवर में तीन विकेट पर 30 रन ही बना सकी और भारत ने यह मुकाबला सिर्फ दो रन से जीत लिया। मैच के बाद जापान के पूर्व विदेश मंत्री और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता तारो कोनो की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गई। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें लगा था भारतीय टीम जापान को बुरी तरह हरा देगी, लेकिन जापानी टीम ने उम्मीद से कहीं बेहतर मुकाबला किया।

तारो कोनो ने इस करीबी मुकाबले पर खुशी जताते हुए जापानी टीम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि भारत जापान को आसानी से हरा देगा, लेकिन मैच इतना करीबी हो जाएगा, इसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी। उन्होंने जापानी क्रिकेट के भविष्य को लेकर भी उम्मीद जताई और कहा कि क्रिकेट के ओलंपिक में शामिल होने से जापान की टीम को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

‘मुझे लगा था भारत हमें मार ही देगा’

मैच के बाद तारो कोनो ने भारतीय टीम की ताकत को देखते हुए अपनी शुरुआती उम्मीद के बारे में बात की। उनका कहना था कि उन्हें लगा था कि भारतीय टीम जापान को बहुत बड़े अंतर से हरा देगी। लेकिन मैदान पर जापानी खिलाड़ियों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उससे वह प्रभावित हुए।

उनका चर्चित बयान था, “मुझे लगा था भारतीय टीम हमें मार ही देगी, लेकिन यह मुकाबला लगभग बराबरी का रहा।” उनके इस बयान का आशय क्रिकेट के संदर्भ में भारत की मजबूत टीम और जापान की अपेक्षाकृत कम अनुभवी टीम के बीच अंतर से था। उन्होंने इसके बाद जापानी टीम के प्रदर्शन की सराहना की और उम्मीद जताई कि देश में क्रिकेट को लेकर लोगों की रुचि बढ़ेगी।

कोनो ने खास तौर पर इस बात का जिक्र किया कि क्रिकेट अब ओलंपिक खेलों का हिस्सा बनने जा रहा है। उनका मानना है कि इससे जापान के क्रिकेटरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए नया मंच मिल सकता है।

भारत ने बनाए सिर्फ 32 रन

सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस ऐतिहासिक मुकाबले में बारिश और गीली आउटफील्ड के कारण मैच को पांच-पांच ओवर का कर दिया गया। इससे दोनों टीमों के बल्लेबाजों के पास बहुत कम गेंदें थीं और हर रन का महत्व बढ़ गया था।

भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, लेकिन जापानी गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। भारतीय टीम निर्धारित पांच ओवर में चार विकेट खोकर सिर्फ 32 रन बना सकी।

कप्तान श्रेयस अय्यर भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उन्होंने 12 गेंदों पर 16 रन बनाए। उनके अलावा संजू सैमसन ने नौ रन बनाए, जबकि ईशान किशन तीन रन बनाकर आउट हुए। भारत की शुरुआत खराब रही और अभिषेक शर्मा खाता खोले बिना आउट हो गए।

जापान के 17 वर्षीय स्पिनर चार्ली हारा-हिंजे ने भारतीय बल्लेबाजों को काफी परेशान किया। उन्होंने दो विकेट लिए और भारतीय पारी की गति को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाई। जापानी गेंदबाजों ने धीमी और मददगार पिच का अच्छी तरह इस्तेमाल किया।

जापान के सामने 33 रन का लक्ष्य

भारत के 32 रन के बाद जापान को जीत के लिए 33 रन बनाने थे। पांच ओवर में यह लक्ष्य आसान दिखाई दे सकता था, लेकिन भारतीय टीम में अनुभवी अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज और ऑलराउंडर मौजूद थे। इसके बावजूद जापानी बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही मुकाबले को जीवित रखा।

जापान की शुरुआत कुछ खास नहीं रही और टीम ने शुरुआती ओवरों में दो विकेट गंवा दिए। इसके बाद कप्तान केंडल कडोवाकी-फ्लेमिंग ने पारी को संभालने की कोशिश की। उन्होंने 12 रन बनाए और अपनी टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

चार ओवर पूरे होने के बाद जापान का स्कोर तीन विकेट पर 25 रन था। इसका मतलब था कि आखिरी छह गेंदों में उसे जीत के लिए आठ रन की जरूरत थी। भारतीय टीम के लिए भी स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं थी। एक बड़ा शॉट या कुछ अतिरिक्त रन जापान को ऐतिहासिक जीत दिला सकते थे।

आखिरी ओवर में अक्षर पटेल ने संभाला मोर्चा

भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने निर्णायक पांचवां ओवर अक्षर पटेल को सौंपा। अक्षर ने इस फैसले को सही साबित किया और आखिरी ओवर में जापान को जरूरी रन नहीं बनाने दिए।

जापान के बल्लेबाजों को आखिरी ओवर में आठ रन चाहिए थे। शुरुआती गेंदों पर बल्लेबाजों ने रन जुटाए, लेकिन अक्षर ने दबाव बनाए रखा। एक समय ऐसा लग रहा था कि जापान मैच को अपने पक्ष में कर सकता है, लेकिन भारतीय स्पिनर ने आखिरी गेंद तक नियंत्रण बनाए रखा।

अंतिम गेंद तक जापान को जीत के लिए चार रन की जरूरत थी। बल्लेबाज बड़ा शॉट लगाने की कोशिश में सफल नहीं हो सका और भारत ने दो रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया। अक्षर ने अपने दो ओवर में केवल सात रन दिए और एक विकेट भी हासिल किया।

वाशिंगटन सुंदर ने भी गेंद से प्रभावी प्रदर्शन किया। उन्होंने दो विकेट हासिल किए और जापान की पारी को बीच में रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत की अनुभवी स्पिन गेंदबाजी ने आखिरकार उसे करीबी मुकाबले में जीत दिलाई।

मैच में आया वाइड का विवाद

मुकाबले के आखिरी ओवर में एक गेंद को लेकर विवाद भी हुआ। अंपायर ने अक्षर पटेल की गेंद को वाइड करार दिया था। इसके बाद भारतीय टीम की ओर से इस फैसले पर आपत्ति जताई गई। बाद में अंपायरों ने चर्चा के बाद फैसला बदलते हुए गेंद को डेड बॉल माना और अतिरिक्त रन को स्कोर से हटा दिया।

इस फैसले ने आखिरी ओवर के रोमांच को और बढ़ा दिया। जापान को जीत के लिए बेहद कम रन चाहिए थे और ऐसे समय में अतिरिक्त रन का मिलना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता था। हालांकि अंततः भारत ने मुकाबला दो रन से जीत लिया।

पहली बार पूर्ण सदस्य देश के खिलाफ खेला जापान

इस मुकाबले की अहमियत केवल परिणाम तक सीमित नहीं थी। यह भारत और जापान के बीच पहला टी20 इंटरनेशनल मुकाबला था। जापान के लिए यह मैच इसलिए भी खास था क्योंकि उसे पहली बार किसी पूर्ण ICC सदस्य देश के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने का मौका मिला।

मुकाबला दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। मैच का आयोजन जापान के सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में हुआ, जिसकी दर्शक क्षमता करीब 2,000 बताई गई है।

जापान की टीम के लिए भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मैदान पर उतरना अपने आप में महत्वपूर्ण अनुभव था। मैच से पहले दोनों टीमों के बीच काफी अंतर माना जा रहा था। भारत टी20 विश्व कप का मौजूदा चैंपियन है, जबकि जापान की ICC रैंकिंग 41 बताई गई थी। इसके बावजूद जापान ने मुकाबले को आखिरी गेंद तक पहुंचा दिया।

बारिश ने बदला मैच का पूरा स्वरूप

सानो में मुकाबले से पहले और आसपास के समय में भारी बारिश हुई थी। गीली आउटफील्ड के कारण मैच समय पर शुरू नहीं हो सका। इसके बाद दोनों पारियों को पांच-पांच ओवर तक सीमित कर दिया गया।

बारिश और पिच की परिस्थितियों ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए भी मुश्किलें पैदा कीं। गेंद रुककर आ रही थी और जापानी स्पिनरों को सतह से मदद मिल रही थी। यही कारण रहा कि भारतीय टीम अपने पांच ओवर में केवल 32 रन बना सकी।

दूसरी पारी में भी जापान के बल्लेबाजों के लिए परिस्थितियां आसान नहीं थीं। लेकिन छोटे लक्ष्य ने उन्हें मुकाबले में बनाए रखा और आखिरी ओवर तक मैच पूरी तरह खुला रहा।

जापान के क्रिकेट के लिए बड़ी घटना

तारो कोनो ने मैच के बाद जापानी क्रिकेट के भविष्य पर भी बात की। उनका मानना है कि भारत जैसी बड़ी क्रिकेट टीम के खिलाफ मुकाबला जापान में इस खेल की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद कर सकता है।

जापान में बेसबॉल सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है और क्रिकेट की पहुंच अभी सीमित है। ऐसे में भारत जैसी विश्व स्तरीय टीम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मैच को जापानी क्रिकेट के लिए प्रचार और अनुभव दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जापान क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारियों ने भी मैच से पहले इस मुकाबले को क्रिकेट के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया था। बड़ी संख्या में भारतीय प्रशंसकों और जापानी मीडिया की दिलचस्पी ने भी मैच को लेकर माहौल बनाया।

ओलंपिक से जापान को उम्मीद

क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल किए जाने से जापान जैसे देशों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर बढ़ सकता है। तारो कोनो ने इसी पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि ओलंपिक में क्रिकेट होने से जापानी खिलाड़ियों को भविष्य के लिए उम्मीद मिल सकती है।

उनका मानना है कि अगर जापान में क्रिकेट खेलने वाले लोगों की संख्या बढ़ती है और घरेलू स्तर पर खेल का आधार मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जापान की टीम को बेहतर प्रदर्शन का मौका मिल सकता है।

एशियन गेम्स से पहले भारत का अहम मुकाबला

भारत के लिए भी यह मुकाबला एशियन गेम्स से पहले तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण था। भारतीय टीम 2026 एशियन गेम्स में अपने अभियान की तैयारी कर रही है। इसी वजह से जापान के खिलाफ यह मुकाबला टीम के लिए परिस्थितियों से तालमेल बैठाने का अवसर भी था।

जापान की टीम भी एशियन गेम्स में क्रिकेट अभियान शुरू करने वाली है। रिपोर्टों के अनुसार जापान को पुरुषों के टी20 क्रिकेट में अफगानिस्तान के खिलाफ अपने शुरुआती मुकाबले में उतरना है। ऐसे में भारत के खिलाफ पांच ओवर का यह मुकाबला जापानी खिलाड़ियों के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय अनुभव लेकर आया।

करीबी हार के बावजूद जापान ने छोड़ी छाप

जापान भले ही मुकाबला दो रन से हार गया, लेकिन टीम ने जिस तरह भारत को आखिरी गेंद तक चुनौती दी, उसने इस मैच को यादगार बना दिया। भारत ने केवल 32 रन बनाए और जापान ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 30 रन तक पहुंचकर मैच को बेहद करीबी बना दिया।

भारत की जीत में उसके अनुभवी स्पिनरों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वहीं जापान की ओर से गेंदबाज चार्ली हारा-हिंजे और कप्तान कडोवाकी-फ्लेमिंग के प्रदर्शन ने टीम को मुकाबले में बनाए रखा।

यही वजह है कि तारो कोनो का मैच के बाद दिया गया बयान भी चर्चा में आ गया। जिस मुकाबले को कागज पर भारत के पक्ष में एकतरफा माना जा रहा था, वह आखिरी गेंद तक चला गया। कोनो ने इसी अंतर को मजाकिया अंदाज में व्यक्त किया और जापानी टीम के प्रदर्शन पर संतोष जताया।

भारत ने आखिरकार दो रन से मुकाबला जीत लिया, लेकिन जापान के लिए यह मैच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिहाज से एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के अवसर पर खेला गया यह मुकाबला क्रिकेट से आगे भी दोनों देशों के बीच खेल और सांस्कृतिक संपर्क का एक अवसर बना। अब जापान की नजर एशियन गेम्स पर होगी, जबकि भारतीय टीम अपने अगले मुकाबलों में इस अनुभव को आगे ले जाएगी।

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