
बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जनता दल यूनाइटेड यानी JDU ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को चार सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की है, जहां पार्टी ने मौजूदा विधान पार्षद और अपने प्रमुख प्रवक्ता नीरज कुमार को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि मोकामा से JDU विधायक अनंत सिंह सार्वजनिक रूप से नीरज कुमार की उम्मीदवारी का विरोध कर चुके हैं और उनके मुकाबले निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह को समर्थन देने की बात कह चुके हैं। इसके बावजूद पार्टी ने पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार के नाम में कोई बदलाव नहीं किया।
JDU ने पटना स्नातक के अलावा तिरहुत स्नातक सीट, सारण शिक्षक सीट और दरभंगा शिक्षक सीट के लिए भी प्रत्याशियों की घोषणा की है। पार्टी की सूची के अनुसार पटना स्नातक से नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक से अभिषेक झा, सारण शिक्षक से आनंद पुष्कर और दरभंगा शिक्षक से घनश्याम राय चुनाव मैदान में होंगे। सूची प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी की गई।
आठ सीटों पर होना है चुनाव
बिहार विधान परिषद की कुल आठ सीटों के लिए यह चुनाव हो रहा है। इनमें चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। स्नातक सीटों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी शामिल हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण सीटें हैं।
निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर को चुनाव कार्यक्रम जारी किया था। इसके अनुसार 29 सितंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और उसी दिन नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी होनी है।
इन आठ सीटों पर मौजूदा विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त होना है। इसी वजह से चुनाव आयोग ने समय रहते नई चुनाव प्रक्रिया शुरू की है।
नीरज कुमार को फिर मिला टिकट
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार को दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने को इस चुनाव की सबसे चर्चित राजनीतिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। नीरज कुमार इस सीट से मौजूदा MLC हैं और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह लगातार तीन बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं। अब JDU ने उन्हें चौथे कार्यकाल के लिए मैदान में उतारा है।
उनकी उम्मीदवारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से JDU के ही दो नेताओं, अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच सार्वजनिक रूप से बयानबाजी देखने को मिली है। अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे निर्दलीय उम्मीदवार अनुज सिंह को समर्थन देने की घोषणा की है। इस घटनाक्रम ने चुनाव को केवल अलग-अलग दलों के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं रखा, बल्कि JDU के भीतर दोनों नेताओं के मतभेद को भी चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, अनंत सिंह का विरोध पार्टी के आधिकारिक फैसले को बदल नहीं सका। JDU ने नीरज कुमार को ही पटना स्नातक सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
अनंत सिंह और नीरज कुमार की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मतभेद कोई नया मामला नहीं है। इसकी राजनीतिक पृष्ठभूमि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव तक जाती है। उस समय मोकामा विधानसभा सीट पर JDU ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था, जबकि अनंत सिंह पार्टी से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे थे।
अनंत सिंह उस चुनाव में जेल में रहते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और नीरज कुमार को लगभग 18 हजार वोटों के अंतर से हराया था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बनी रही।
आगामी विधान परिषद चुनाव ने एक बार फिर इस पुराने विवाद को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। अनंत सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह नीरज कुमार के समर्थन में काम नहीं करेंगे। इसके बजाय उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन करने की बात कही है।
यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अनंत सिंह के राजनीतिक आरोप और उनके द्वारा लगाए गए पुराने मामलों से जुड़े दावे उनके पक्ष के बयान हैं। संबंधित आरोपों को न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
अनंत सिंह किसे कर रहे हैं समर्थन?
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह चुनाव मैदान में हैं। अनंत सिंह ने उनके समर्थन का ऐलान किया है।
अनुज सिंह का नाम सामने आने के बाद पटना स्नातक सीट का मुकाबला और चर्चित हो गया है। अनंत सिंह ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका विरोध नीरज कुमार से व्यक्तिगत राजनीतिक मतभेद से जुड़ा है और इसे JDU के खिलाफ उनके रुख के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके बयान को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
इस स्थिति में चुनाव का परिणाम कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें स्नातक मतदाताओं का मतदान व्यवहार, उम्मीदवारों का व्यक्तिगत संपर्क, संगठनात्मक समर्थन और अन्य प्रत्याशियों की मौजूदगी शामिल है। फिलहाल किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में परिणाम की भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी।
क्या है पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र?
विधान परिषद की स्नातक निर्वाचन सीटें सामान्य विधानसभा या लोकसभा सीटों से अलग होती हैं। यहां सामान्य मतदाता सूची के बजाय संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्धारित स्नातक मतदाता सूची में पंजीकृत मतदाता मतदान करते हैं।
ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं के साथ लगातार संपर्क और व्यक्तिगत स्तर पर पहुंच को महत्वपूर्ण माना जाता है। उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को पंजीकृत स्नातक मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अलग तरह का संगठनात्मक अभियान चलाना पड़ता है।
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार पहले से मौजूद MLC हैं। ऐसे में उनके पास क्षेत्र में अपने पिछले कार्यकाल और राजनीतिक संपर्क का अनुभव है, जबकि उनके खिलाफ मैदान में मौजूद उम्मीदवारों को मतदाताओं के बीच अपनी पहचान और समर्थन मजबूत करने की चुनौती होगी।
JDU ने बाकी तीन सीटों पर किसे उतारा?
JDU की ओर से घोषित चार उम्मीदवारों में तीन अन्य नाम भी महत्वपूर्ण हैं।
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र:
इस सीट से JDU ने अभिषेक झा को उम्मीदवार बनाया है। अभिषेक झा पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं और क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उनके सामने भी विभिन्न राजनीतिक दलों और अन्य उम्मीदवारों से मुकाबला होगा।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र:
JDU ने यहां आनंद पुष्कर को प्रत्याशी बनाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आनंद पुष्कर का परिवार शिक्षक राजनीति से भी जुड़ा रहा है। उनके पिता केदारनाथ पांडेय बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के लंबे समय तक महासचिव रहे और सारण शिक्षक सीट से कई बार विधान परिषद पहुंचे थे।
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र:
इस सीट से JDU ने घनश्याम राय को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने इस सीट पर भी अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
इस तरह JDU ने चार सीटों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। बाकी चार सीटों पर NDA के अन्य घटक दलों की ओर से उम्मीदवारों की तस्वीर सामने आनी बाकी है।
चुनाव में जन सुराज की भी एंट्री
इस चुनाव में जन सुराज पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं। इससे विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों पर मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना है।
जन सुराज ने पहले ही पांच सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए थे। इनमें दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एसपी राय और दरभंगा स्नातक से रवींद्र यादव का नाम शामिल है।
इसके अलावा अलग-अलग सीटों पर RJD, कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों तथा निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। चूंकि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता संरचना आम विधानसभा चुनाव से अलग है, इसलिए इन सीटों पर स्थानीय संगठनों और उम्मीदवारों का व्यक्तिगत संपर्क भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आठ मौजूदा MLC का कार्यकाल खत्म होगा
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक जिन आठ सीटों पर चुनाव होना है, उनके मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त होगा।
स्नातक सीटों पर पटना से नीरज कुमार, दरभंगा से सर्वेश कुमार, तिरहुत से बंशीधर ब्रजवासी और कोसी से एनके यादव वर्तमान सदस्य हैं। वहीं शिक्षक सीटों पर पटना से नवल किशोर यादव, दरभंगा से मदन मोहन झा, तिरहुत से संजय कुमार सिंह और सारण से आफाक अहमद वर्तमान MLC हैं।
इनमें अलग-अलग राजनीतिक दलों और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेता शामिल हैं। ऐसे में आठ सीटों का चुनाव बिहार की विधान परिषद में विभिन्न दलों की भविष्य की स्थिति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा।
नीरज के लिए चौथे कार्यकाल की चुनौती
नीरज कुमार के लिए यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि JDU ने उन्हें लगातार चौथी बार इसी सीट से उम्मीदवार बनाया है। तीन बार चुनाव जीतने के बाद अब पार्टी ने फिर उनके नाम पर भरोसा जताया है।
लेकिन इस बार चुनाव के दौरान उनकी अपनी पार्टी के एक विधायक द्वारा खुला विरोध सामने आया है। इससे चुनाव अभियान का एक पहलू आंतरिक राजनीतिक मतभेद भी बन गया है।
दूसरी तरफ नीरज कुमार के पास लंबे समय से विधान परिषद में रहने और पार्टी संगठन में काम करने का अनुभव है। वह JDU के प्रमुख प्रवक्ताओं में भी शामिल हैं और पार्टी का पक्ष सार्वजनिक रूप से रखने के लिए जाने जाते हैं।
हालांकि चुनाव में किसी नेता का संगठनात्मक पद या पिछला रिकॉर्ड अपने आप में परिणाम तय नहीं करता। अंतिम फैसला मतदाता करेंगे और मतदान 23 अक्टूबर को होना है।
JDU के फैसले से क्या संदेश?
JDU द्वारा नीरज कुमार को दोबारा टिकट देने से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पार्टी ने पटना स्नातक सीट पर अपने मौजूदा उम्मीदवार को बदलने का फैसला नहीं किया। अनंत सिंह के विरोध के बावजूद नीरज कुमार को टिकट मिलना पार्टी के आधिकारिक निर्णय और एक विधायक की सार्वजनिक असहमति के बीच अंतर को दिखाता है।
कुछ रिपोर्टों में इस घटनाक्रम को JDU के भीतर शक्ति संतुलन या राजनीतिक प्रभाव से जोड़कर देखा गया है। हालांकि ये मीडिया और राजनीतिक विश्लेषण हैं। पार्टी ने उम्मीदवारों की घोषणा करते समय यह नहीं कहा कि नीरज कुमार को टिकट देने का फैसला किसी विशेष नेता के प्रभाव या विरोध को ध्यान में रखकर किया गया है।
इसीलिए फिलहाल तथ्य यह है कि पार्टी ने नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि अनंत सिंह ने उनके खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा की है।
अब 23 अक्टूबर पर नजर
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को होगा। नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी और 6 अक्टूबर तक चलेगी। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 9 अक्टूबर तक नाम वापसी होगी। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार बनाम अनुज सिंह का मुकाबला विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि एक ओर JDU ने नीरज कुमार को आधिकारिक प्रत्याशी बनाया है, वहीं दूसरी ओर JDU विधायक अनंत सिंह ने उनके खिलाफ मैदान में उतरने वाले निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दिया है।
अब यह देखना होगा कि चुनावी मैदान में यह राजनीतिक टकराव किस रूप में आगे बढ़ता है और स्नातक मतदाता किस तरह मतदान करते हैं। फिलहाल JDU ने अपनी तरफ से तस्वीर साफ कर दी है कि पटना स्नातक सीट पर पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार ही होंगे। बाकी तस्वीर नामांकन और प्रचार अभियान आगे बढ़ने के साथ और स्पष्ट होगी।