‘उस हार ने मुझे अंदर से तोड़ दिया…’, विराट कोहली ने याद किया 2019 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल का दर्द

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विराट कोहली के क्रिकेट करियर में कई यादगार जीतें और शानदार पारियां दर्ज हैं, लेकिन कुछ हार ऐसी भी हैं जिनकी टीस लंबे समय तक बनी रहती है। 2019 वनडे वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल ऐसी ही एक हार थी। भारतीय टीम पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल तक पहुंची थी, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले में 18 रन से मिली हार ने टीम का खिताब जीतने का सपना तोड़ दिया था।

अब साल 2026 में, जब विराट कोहली ने पुष्टि कर दी है कि 2027 का वनडे वर्ल्ड कप भारत के लिए उनका आखिरी वर्ल्ड कप होगा, उन्होंने एक बार फिर 2019 की उस हार को याद किया है। कोहली ने बताया कि उस मुकाबले के बाद उनकी मानसिक स्थिति कैसी थी और क्यों वह हार उनके लिए बेहद मुश्किल अनुभव बन गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि उस टूर्नामेंट में भारतीय टीम को भरोसा था कि इस बार विश्व कप उसका हो सकता है।

2019 में क्या हुआ था?

2019 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का लीग चरण बेहद मजबूत रहा था। टीम ने नौ लीग मैचों में से सात जीते, एक मैच में हार मिली और एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया। भारत अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर रहा और सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के सामने था।

मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए उस सेमीफाइनल में बारिश ने भी अहम भूमिका निभाई। न्यूजीलैंड की पारी पूरी नहीं हो सकी और मुकाबला अगले दिन पूरा हुआ। न्यूजीलैंड ने 50 ओवर में 239 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और शुरुआती ओवरों में रोहित शर्मा, केएल राहुल और विराट कोहली जल्दी आउट हो गए।

भारत ने इसके बाद वापसी की कोशिश की। रवींद्र जडेजा और महेंद्र सिंह धोनी ने महत्वपूर्ण साझेदारी की, लेकिन अंततः भारतीय टीम 49.3 ओवर में 221 रन पर ऑलआउट हो गई और न्यूजीलैंड ने 18 रन से मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बना ली।

शुरुआत के कुछ ओवरों ने बदल दिया मैच

इस मुकाबले में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों ने नई गेंद से शानदार प्रदर्शन किया था। भारत के शीर्ष तीन बल्लेबाजों को शुरुआती चार ओवरों में ही पवेलियन लौटना पड़ा था।

विराट कोहली भी सिर्फ एक रन बनाकर आउट हुए थे। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखा और शुरुआत में रन बनाने के मौके बेहद सीमित कर दिए।

मैच के बाद कोहली ने खुद माना था कि शुरुआती 40 से 45 मिनट में न्यूजीलैंड ने जिस तरह दबाव बनाया, उससे मुकाबले का रुख बदल गया था। उन्होंने उस समय न्यूजीलैंड के गेंदबाजी प्रदर्शन को बेहतरीन बताया था।

भारत की ओर से रवींद्र जडेजा ने 77 रन की तेज पारी खेलकर उम्मीद जगाई थी। महेंद्र सिंह धोनी ने भी 50 रन बनाए। दोनों ने सातवें विकेट के लिए 116 रन की साझेदारी की, लेकिन यह साझेदारी टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सकी।

हार के अगले दिन की याद आज भी ताजा है

विराट कोहली ने पहले भी इस हार के बारे में बात की थी। 2025 में RCB Podcast पर उन्होंने बताया था कि सेमीफाइनल हारने के बाद अगली सुबह उनकी हालत ऐसी थी कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है।

कोहली ने उस अनुभव को बेहद भारी मानसिक झटके के तौर पर याद किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे वह पूरी तरह सुन्न हो गए हों और रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों के बारे में भी सोच नहीं पा रहे थे। उन्होंने इस अनुभव की तुलना एक बेहद खराब हैंगओवर से की थी।

2026 में दिए गए अपने हालिया इंटरव्यू में भी कोहली ने 2019 की हार को एक बड़ा झटका बताया है। उनके मुताबिक, उस टूर्नामेंट में टीम का माहौल शानदार था और खिलाड़ियों के बीच अच्छा तालमेल था। टीम को विश्वास था कि वह विश्व कप जीत सकती है, इसलिए सेमीफाइनल की हार को स्वीकार करना और भी कठिन था।

बारिश ने भी बदला था मुकाबले का माहौल

2019 का सेमीफाइनल दो दिनों में पूरा हुआ था। न्यूजीलैंड ने पहले दिन अपनी पारी शुरू की, लेकिन बारिश के कारण खेल रोकना पड़ा। उस समय न्यूजीलैंड 46.1 ओवर में 211 रन बना चुका था।

अगले दिन न्यूजीलैंड ने अपनी पारी पूरी की और 239 रन का लक्ष्य भारत के सामने रखा। इसके बाद भारतीय टीम की पारी शुरू हुई तो परिस्थितियां अलग थीं। न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों ने सुबह के हालात का फायदा उठाया और भारतीय शीर्ष क्रम पर दबाव बनाया।

हालिया बातचीत में कोहली ने भी इस बात का जिक्र किया कि अगर मुकाबला पहले दिन ही पूरा हो जाता तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी स्वीकार किया कि खेल में परिस्थितियां बदलती रहती हैं और खिलाड़ी को उन्हें स्वीकार करके आगे बढ़ना पड़ता है।

2019 सिर्फ एक हार नहीं थी

विराट कोहली के लिए 2019 वर्ल्ड कप इसलिए भी खास था क्योंकि वह पहली बार वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत मजबूत अंदाज में की थी और लीग चरण में लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण टीम को खिताब के दावेदारों में माना जा रहा था।

सेमीफाइनल में मिली हार ने इस पूरे अभियान को अचानक समाप्त कर दिया। मैच की खास बात यह भी थी कि भारत को जीत के लिए 240 रन का लक्ष्य मिला था, जो उस समय बहुत बड़ा स्कोर नहीं माना जा रहा था। लेकिन शुरुआती विकेटों के गिरने के बाद टीम लगातार दबाव में रही।

विराट कोहली ने बाद में इस हार से जुड़े अनुभव को स्वीकार करने की जरूरत पर भी बात की। उनके मुताबिक, खेल में हर चीज खिलाड़ी के नियंत्रण में नहीं होती। हार को स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन खिलाड़ी को उसी अनुभव से आगे बढ़ना पड़ता है।

2023 की हार भी रही दर्दनाक

2019 के बाद भारत के पास 2023 में अपने घरेलू मैदान पर वनडे वर्ल्ड कप जीतने का एक और बड़ा मौका आया। रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने उस टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल तक पहुंची।

फाइनल में भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ। अहमदाबाद में खेले गए मुकाबले में भारत को हार का सामना करना पड़ा। विराट कोहली ने उस मैच में 54 रन बनाए थे और एक बड़ी पारी की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे थे, लेकिन उनका विकेट गिरने के बाद भारतीय पारी की गति प्रभावित हुई और अंततः ऑस्ट्रेलिया ने मुकाबला जीत लिया।

कोहली ने 2026 में 2023 के फाइनल को भी याद किया और बताया कि उस हार को स्वीकार करना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि उस पारी में उन्हें लग रहा था कि अगर वह 140 या 150 रन तक पहुंच जाते तो भारत अच्छी स्थिति में हो सकता था। विकेट गंवाने के बाद उस अनुभव को स्वीकार करने में उन्हें कई दिन लगे।

अब 2027 है आखिरी मौका

विराट कोहली ने 26 सितंबर 2026 को पुष्टि की कि दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे में होने वाला 2027 वनडे वर्ल्ड कप भारत के लिए उनका आखिरी वर्ल्ड कप होगा।

कोहली ने कहा कि यही बात उनके लिए प्रेरणा का काम कर रही है और विश्व कप जीतना उनका लक्ष्य है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस लक्ष्य के लिए जो कुछ भी जरूरी होगा, करने के लिए तैयार हैं।

2027 वर्ल्ड कप को लेकर कोहली की यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले ही टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। अब उनका अंतरराष्ट्रीय करियर वनडे क्रिकेट तक सीमित है।

ICC के आंकड़ों के मुताबिक, कोहली ने अब तक चार वनडे वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है और 37 वर्ल्ड कप मैचों में 1,795 रन बनाए हैं। उनका वर्ल्ड कप बल्लेबाजी औसत 59.83 रहा है और उनके नाम पांच शतक तथा 12 अर्धशतक हैं।

2027 वर्ल्ड कप की चुनौती अलग होगी

कोहली ने 50 ओवर के वर्ल्ड कप की कठिनाई के बारे में भी बात की है। उनके मुताबिक, एक बड़े वनडे वर्ल्ड कप में खिलाड़ियों को लगभग 10 मैचों तक टी20 जैसी तीव्रता बनाए रखनी पड़ सकती है। इसके साथ विदेशी परिस्थितियां भी चुनौती को बढ़ाती हैं।

उनका कहना है कि हर वर्ल्ड कप में अलग-अलग टीमें, मैदान और परिस्थितियां होती हैं। इसलिए एक बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयारी भी अलग तरीके से करनी पड़ती है।

2027 का टूर्नामेंट कोहली के लिए पांचवां वनडे वर्ल्ड कप हो सकता है। 2011 में वह विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। इसके बाद 2015 और 2019 में भारत सेमीफाइनल तक पहुंचा, जबकि 2023 में टीम फाइनल में पहुंचकर ऑस्ट्रेलिया से हार गई थी।

कोहली और रोहित की नजरें 2027 पर

विराट कोहली के साथ रोहित शर्मा भी 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी कर रहे हैं। दोनों दिग्गजों ने टी20 इंटरनेशनल और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है और फिलहाल उनका अंतरराष्ट्रीय करियर वनडे क्रिकेट तक सीमित है।

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक दोनों खिलाड़ी 2027 वर्ल्ड कप को लेकर अपनी तैयारियों और टीम की जरूरतों पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि अंतिम टीम चयन भविष्य में चयनकर्ताओं के फैसलों और खिलाड़ियों के प्रदर्शन, फिटनेस तथा अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

कोहली ने अपने हालिया इंटरव्यू में यह भी कहा कि उनके लिए यह नहीं सोचना है कि क्रिकेट में उनका काम पूरा हो चुका है। जब तक वह खेल रहे हैं, तब तक आगे देखने और नई चुनौती का सामना करने के लिए कुछ न कुछ मौजूद है।

2019 की याद से 2027 के लक्ष्य तक

विराट कोहली के करियर में 2019 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल एक ऐसा अध्याय है जिसे वह भूल नहीं पाए हैं। उस मैच में भारत सिर्फ 18 रन से पीछे रह गया था और न्यूजीलैंड फाइनल में पहुंच गया था। कोहली के लिए व्यक्तिगत रूप से भी वह मैच बेहद कठिन था, क्योंकि वह कप्तान थे और भारतीय टीम को पूरे टूर्नामेंट में खिताब जीतने की उम्मीद थी।

लेकिन उस हार के कई साल बाद भी कोहली का नजरिया सिर्फ अतीत में अटका हुआ नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया है कि हार को स्वीकार करना कठिन होता है, लेकिन खिलाड़ी को आगे बढ़ना पड़ता है। अब उनके सामने 2027 का विश्व कप है, जो उनके अंतरराष्ट्रीय वनडे करियर का अंतिम विश्व कप होगा।

2019 की निराशा, 2023 के फाइनल की हार और 2024 के टी20 वर्ल्ड कप तथा 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी की सफलताओं के बाद कोहली के करियर में 2027 एक अलग तरह का पड़ाव होगा। वह टूर्नामेंट उनके लिए केवल एक और विश्व कप नहीं होगा, बल्कि वनडे क्रिकेट में उनके लंबे सफर का अंतिम विश्व कप अध्याय भी होगा।

अब 2019 की उस हार की याद कोहली के लिए सिर्फ दर्द की कहानी नहीं है। वह अनुभव उनके करियर का हिस्सा बन चुका है और 2027 में जब वह एक बार फिर विश्व कप के मैदान पर उतरेंगे, तो उनके सामने उस टूर्नामेंट की चुनौती होगी जिसे वह भारत के लिए अपना आखिरी वनडे वर्ल्ड कप बता चुके हैं।
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