तीन महीने बाद ताडोबा पहुंचे पर्यटक, पहली सफारी में सामने से गुजरी बाघिन, वीडियो में कैद हुआ रोमांच

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तीन महीने बाद फिर खुला ताडोबा का कोर जोन

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव पर्यटन का नया सीजन शुरू हो गया है। हर साल मानसून के दौरान सुरक्षा और संरक्षण संबंधी कारणों से रिजर्व का कोर पर्यटन क्षेत्र कुछ महीनों के लिए बंद रखा जाता है। इस बार भी 30 जून से 30 सितंबर तक कोर जोन में पर्यटकों की सफारी पर रोक थी। 1 अक्टूबर से यहां सफारी फिर शुरू हुई और पहले ही दिन बाघिन के दीदार ने पर्यटकों का उत्साह बढ़ा दिया।

ताडोबा के कोर जोन में सफारी बंद रहने के दौरान पर्यटक बफर जोन में उपलब्ध व्यवस्थाओं के जरिए जंगल घूम सकते थे। हालांकि, कोर जोन में जाने और वहां वन्यजीवों को देखने का अनुभव अलग माना जाता है। इसी वजह से सफारी शुरू होने के पहले दिन बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचे।

पहली सफारी में सामने आई कॉलरवाली

नए सीजन की पहली सुबह पर्यटकों को टेलिया इलाके में कॉलरवाली नाम से पहचानी जाने वाली बाघिन दिखाई दी। रिपोर्ट के अनुसार, बाघिन जंगल के रास्ते से गुजरती हुई पर्यटकों की गाड़ियों के सामने से निकली। अचानक हुए इस दीदार ने सफारी पर निकले लोगों को रोमांचित कर दिया।

बाघिन के गुजरने का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह जंगल के रास्ते पर सहज अंदाज में आगे बढ़ती दिखाई देती है। पर्यटकों के लिए जंगल सफारी में बाघ को देखना अक्सर सबसे खास अनुभव होता है, लेकिन सफारी के पहले ही दिन इस तरह का नजारा मिलना उनके लिए और भी यादगार बन गया।

वन्यजीव अभयारण्यों में बाघों की मौजूदगी के बावजूद उन्हें देख पाना पूरी तरह संयोग और जंगल की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। बाघ घने जंगल में रहते हैं और उनकी गतिविधियां मौसम, शिकार की उपलब्धता, पानी के स्रोत और क्षेत्रीय व्यवहार से प्रभावित होती हैं। इसलिए किसी भी सफारी में बाघ दिखने की गारंटी नहीं होती।

पहले दिन 564 पर्यटक पहुंचे

ताडोबा के कोर जोन के दोबारा खुलने के पहले दिन कुल 564 पर्यटकों ने सफारी का अनुभव लिया। इनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल थे। वन विभाग ने नए पर्यटन सीजन की शुरुआत मोहर्ली गेट पर औपचारिक कार्यक्रम के साथ की।

पर्यटकों का स्वागत गुलाब के फूलों से किया गया। ताडोबा होमस्टे एसोसिएशन की ओर से पर्यटकों और गाइडों को गुलाब के साथ स्नैक बॉक्स भी दिए गए। इस स्वागत ने सफारी सीजन के पहले दिन को खास बना दिया।

रिजर्व के अधिकारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए भी सीजन की शुरुआत महत्वपूर्ण रही, क्योंकि मानसून के बाद पर्यटकों की वापसी से स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को गति मिलती है।

छह गेट से शुरू हुई सफारी

ताडोबा के कोर जोन में इस सीजन के लिए छह प्रवेश द्वारों से सफारी संचालित की जा रही है। इनमें मोहर्ली, कोलारा, नवेगांव, खुटवांडा, जरी और पांगड़ी गेट शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन गेटों के माध्यम से सुबह और शाम की सफारी में कुल 100 वाहनों को प्रवेश की अनुमति दी जाती है। सफारी के लिए निर्धारित संख्या और समय का पालन इसलिए जरूरी है, ताकि पर्यटकों की आवाजाही नियंत्रित रहे और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

सफारी के दौरान पर्यटक खुले जंगल में निर्धारित रास्तों पर चलते हैं। उनके साथ प्रशिक्षित गाइड और वाहन चालक होते हैं, जो जंगल के नियमों और वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी देते हैं। पर्यटकों को वाहन से उतरने, शोर करने या जानवरों के बहुत करीब जाने की अनुमति नहीं होती।

मानसून में क्यों बंद रहता है कोर जोन?

ताडोबा का कोर पर्यटन क्षेत्र हर साल मानसून के दौरान बंद किया जाता है। यह व्यवस्था केवल पर्यटन प्रबंधन से जुड़ा फैसला नहीं, बल्कि जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण से भी संबंधित है।

बारिश के मौसम में जंगल के रास्ते कीचड़युक्त और फिसलन भरे हो सकते हैं। कई जगह जलभराव और छोटे-बड़े जलस्रोतों का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में सफारी वाहनों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसके अलावा मानसून जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान वनस्पति, जलस्रोत और वन्यजीवों की गतिविधियों में बदलाव देखने को मिलता है।

कोर जोन बंद रहने से इस अवधि में पर्यटकों की आवाजाही सीमित होती है। हालांकि, बफर क्षेत्र में सफारी मौसम और रास्तों की स्थिति के आधार पर जारी रह सकती है। इस साल भी कोर जोन के बंद रहने के दौरान बफर जोन में पर्यटन की व्यवस्था जारी रखी गई थी।

ताडोबा वन्यजीव प्रेमियों के बीच क्यों लोकप्रिय है?

ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल है। चंद्रपुर जिले में फैला यह रिजर्व बाघों के अलावा कई अन्य वन्यजीवों और पक्षियों का भी आवास है।

महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार, ताडोबा राज्य के सबसे पुराने और बड़े राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है। यहां बाघों के साथ तेंदुए, स्लॉथ भालू, गौर, जंगली कुत्ते, सांभर, चीतल, नीलगाय और कई अन्य जीव पाए जाते हैं। जंगल की विविधता और सफारी की सुविधा इसे देश-विदेश के वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षक बनाती है।

ताडोबा में पर्यटक सुबह और शाम की सफारी के दौरान जंगल के अलग-अलग हिस्सों में वन्यजीवों को देखने की कोशिश करते हैं। बाघों की मौजूदगी इस रिजर्व की लोकप्रियता का एक प्रमुख कारण है, लेकिन यहां का अनुभव केवल बाघों तक सीमित नहीं है। जंगल का वातावरण, पक्षियों की आवाजें, हिरणों के झुंड और अन्य जानवर भी सफारी को खास बनाते हैं।

पर्यटन के साथ संरक्षण की जिम्मेदारी

जंगल सफारी पर्यटकों को वन्यजीवों के करीब से देखने का अवसर देती है, लेकिन इस अनुभव के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। बाघ और अन्य वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास में रहते हैं। उन्हें देखने के लिए पर्यटकों को जंगल के नियमों का पालन करना आवश्यक है।

सफारी के दौरान वाहन से बाहर निकलना, जानवरों को खाना देना, तेज आवाज करना या उन्हें रास्ता बदलने के लिए मजबूर करना वन्यजीवों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। सुरक्षित दूरी बनाए रखना और गाइड के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

ताडोबा जैसे रिजर्व में पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। नियंत्रित संख्या में वाहनों को प्रवेश देना और निर्धारित मार्गों पर सफारी कराना इसी व्यवस्था का हिस्सा है।

पिछले सीजन में लाखों पर्यटक पहुंचे

ताडोबा में पर्यटन की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर प्रभु नाथ शुक्ला के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था के जरिए रिजर्व में कुल 3,89,700 पर्यटक पहुंचे।

इनमें से 2,72,119 पर्यटक बफर जोन में और 1,17,581 पर्यटक कोर जोन में गए। कुल पर्यटकों में 20,939 विदेशी पर्यटक थे। यह संख्या कुल पर्यटक प्रवेश का लगभग 5.37 प्रतिशत थी।

विदेशी पर्यटकों में अमेरिका से आने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक बताई गई। इसके बाद ब्रिटेन, श्रीलंका, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के पर्यटक शामिल रहे। यूरोपीय देशों से आने वाले पर्यटकों की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय रही।

गेट के लिहाज से मोहर्ली सबसे व्यस्त रहा, जहां 50,261 पर्यटक प्रवेश दर्ज किए गए। इसके बाद जुनोना और कोलारा गेट का स्थान रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि ताडोबा का आकर्षण केवल स्थानीय या घरेलू पर्यटकों तक सीमित नहीं है।

नए सीजन से स्थानीय कारोबार को भी उम्मीद

ताडोबा में पर्यटन शुरू होने का असर आसपास के स्थानीय कारोबार पर भी पड़ता है। सफारी वाहनों के चालक, गाइड, होमस्टे, होटल, भोजनालय और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों को पर्यटकों की आवाजाही से काम मिलता है।

मानसून के दौरान कोर जोन बंद रहने से पर्यटन गतिविधियों का एक हिस्सा सीमित हो जाता है। ऐसे में अक्टूबर से शुरू होने वाला नया सीजन स्थानीय लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। पहले दिन पर्यटकों की अच्छी मौजूदगी और बाघिन के दीदार ने सीजन की शुरुआत को चर्चा में ला दिया।

हालांकि, पूरे सीजन में पर्यटकों की संख्या और वन्यजीवों के दिखने की स्थिति मौसम, बुकिंग, जंगल की परिस्थितियों और अन्य कारकों पर निर्भर करेगी।

पहली सुबह का नजारा बना यादगार

तीन महीने के विराम के बाद ताडोबा के कोर जोन में सफारी शुरू हुई तो पर्यटक जंगल के अनुभव के लिए पहुंचे थे। लेकिन पहली ही सुबह कॉलरवाली बाघिन का सामने से गुजरना उनके लिए अप्रत्याशित और यादगार पल बन गया।

वीडियो में कैद इस दृश्य ने एक बार फिर दिखाया कि जंगल सफारी का रोमांच उसकी अनिश्चितता में भी छिपा है। कभी पर्यटकों को लंबे समय तक किसी बड़े वन्यजीव का दीदार नहीं होता, तो कभी सफारी के शुरुआती मिनटों में ही ऐसा दृश्य सामने आ जाता है जिसे वे लंबे समय तक याद रखते हैं।

ताडोबा का नया सीजन शुरू हो चुका है। अब आने वाले महीनों में देश और विदेश से वन्यजीव प्रेमियों के यहां पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों के लिए यह जंगल को करीब से देखने का अवसर होगा, जबकि वन विभाग के लिए पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना अहम रहेगा।

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