पंजाब में SIR के बाद 13.60 लाख मतदाता कम, फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 2.01 करोड़ लोगों के नाम दर्ज; जानें नाम कटने पर क्या करें

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पंजाब में SIR के बाद 13.60 लाख मतदाता कम, फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 2.01 करोड़ वोटरों के नाम दर्ज

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो गई है। सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई। नई सूची के अनुसार, पंजाब में कुल 2,01,00,727 मतदाता पंजीकृत हैं। पुनरीक्षण शुरू होने से पहले जून 2026 में राज्य में 2,14,61,043 मतदाता दर्ज थे। इस तरह शुरुआती आंकड़े की तुलना में अंतिम सूची में 13,60,316 मतदाता कम हो गए हैं।

हालांकि, इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि जांच के दौरान सभी 13.60 लाख नाम एक ही कारण से काटे गए। मतदाता सूची में बदलाव के दौरान मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोगों, अनुपस्थित मतदाताओं और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों की जांच की गई। दूसरी ओर, अंतिम सूची में 7,97,263 नए मतदाता भी शामिल किए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और पात्र नागरिकों को मतदान का अवसर देना है।

पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा के कार्यालय की ओर से अंतिम सूची प्रकाशित किए जाने के साथ ही मतदाताओं के लिए अपने नाम की स्थिति जांचना महत्वपूर्ण हो गया है। जिन पात्र नागरिकों का नाम अंतिम सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन माध्यम और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के जरिए आवेदन करने की सुविधा उपलब्ध है।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर मतदान के लिए अंतिम मतदाता सूची आधार बनेगी। ऐसे में जिन लोगों ने पहले मतदान किया है, उन्हें भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका नाम नई सूची में मौजूद है।

पंजाब की अंतिम मतदाता सूची में कितने वोटर हैं?

12 अक्टूबर को जारी अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक, पंजाब में कुल 2,01,00,727 मतदाता दर्ज हैं। इनमें पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर श्रेणी के मतदाता शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार, अंतिम सूची में 1,03,76,026 पुरुष मतदाता हैं। महिला मतदाताओं की संख्या 97,24,195 है, जबकि थर्ड जेंडर श्रेणी में 506 मतदाता दर्ज किए गए हैं।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य की मतदाता सूची में पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से अधिक है। हालांकि, चुनाव में भागीदारी के लिए सभी पात्र मतदाताओं को समान अधिकार प्राप्त हैं। मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान करने की पात्रता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पंजाब की अंतिम सूची में कुल मतदाताओं की संख्या शुरुआती पुनरीक्षण से पहले के आंकड़े से कम है, लेकिन अगस्त में प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची के मुकाबले इसमें वृद्धि हुई है। ड्राफ्ट सूची में 1,93,94,435 मतदाता दर्ज थे। अंतिम सूची में यह संख्या बढ़कर 2,01,00,727 हो गई, जो ड्राफ्ट सूची के मुकाबले लगभग 3.64 प्रतिशत अधिक है।

यह अंतर समझना जरूरी है। यदि केवल जून के आंकड़े और अक्टूबर की अंतिम सूची की तुलना की जाए, तो मतदाताओं की कुल संख्या में 13.60 लाख की कमी दिखाई देती है। लेकिन अगस्त की ड्राफ्ट सूची से तुलना करने पर अंतिम सूची में करीब 7.06 लाख मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि दिखती है। इसका कारण यह है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान नामों की जांच के साथ पात्र नए मतदाताओं को जोड़ने का काम भी किया गया।

इसलिए मतदाता सूची में हुए बदलाव को समझने के लिए शुरुआती सूची, ड्राफ्ट सूची और अंतिम सूची, तीनों के आंकड़ों को देखना जरूरी है।

SIR में 13.60 लाख मतदाता कम होने का क्या मतलब है?

विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान चुनाव अधिकारी मतदाता सूची में दर्ज नामों और उनकी पात्रता की जांच करते हैं। इसका उद्देश्य ऐसे रिकॉर्ड की पहचान करना होता है, जिन्हें अपडेट करने की जरूरत है। इसमें मृत व्यक्तियों के नाम, स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके मतदाता, अनुपस्थित मतदाता और एक से अधिक जगह दर्ज नाम शामिल हो सकते हैं।

पंजाब में जून 2026 में SIR शुरू होने के समय 2,14,61,043 मतदाता पंजीकृत थे। अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 2,01,00,727 रह गई। दोनों आंकड़ों के बीच 13,60,316 का अंतर है।

इस अंतर को सीधे तौर पर इतने लोगों के मतदान अधिकार छिनने के रूप में समझना सही नहीं होगा। मतदाता सूची में नाम कम होने के कई संभावित कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी मतदाता की मृत्यु हो जाने पर उसका नाम हटाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति स्थायी रूप से दूसरी जगह चला गया है, तो उसके पुराने पते की सूची में बदलाव किया जा सकता है। इसी तरह, एक ही व्यक्ति के नाम का कई स्थानों पर दर्ज होना भी सूची को संशोधित करने का कारण बन सकता है।

इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि पुनरीक्षण के दौरान नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया। पंजाब में अंतिम सूची में 7,97,263 नए मतदाता जोड़े गए हैं।

हालांकि, जिन लोगों का नाम सूची से हटाया गया है, उनके मामले में कारण जानना जरूरी है। यदि कोई पात्र नागरिक गलती से सूची से बाहर हो गया है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। चुनाव आयोग की व्यवस्था का उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने का अवसर देना भी है।

इसलिए हर मतदाता को केवल राज्य के कुल आंकड़े पर निर्भर रहने के बजाय अपने नाम की स्थिति की जांच करनी चाहिए।

35 लाख से ज्यादा मतदाताओं को जारी हुए थे नोटिस

पंजाब में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड की जांच की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पुनरीक्षण के दौरान लगभग 35,49,036 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे। इन मामलों में पात्रता और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की गई।

इन नोटिसों का उद्देश्य संबंधित मतदाताओं के विवरण को स्पष्ट करना और जहां जरूरत हो, वहां दस्तावेजों या अन्य जानकारी के आधार पर स्थिति का निर्धारण करना था। जांच के बाद 86,038 मतदाताओं को अयोग्य घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आदेश जारी किए गए।

यह संख्या कुल 13.60 लाख की शुद्ध कमी से अलग है। दोनों आंकड़ों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। कुल मतदाता संख्या में बदलाव कई कारणों से हुआ, जबकि 86,038 उन मतदाताओं की संख्या बताई गई है जिन्हें जांच के बाद अयोग्य घोषित किया गया।

मतदाता सूची में नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया में सटीक रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सीधे मतदान की पात्रता पर असर पड़ता है। इसीलिए मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच करें। यदि किसी तरह की त्रुटि दिखाई देती है, तो उसे सुधारने के लिए निर्धारित आवेदन प्रक्रिया अपनाएं।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अंतिम सूची में कैसे बढ़े नाम?

पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची 13 अगस्त 2026 को प्रकाशित की गई थी। उस समय राज्य में 1,93,94,435 मतदाता दर्ज थे। इसके बाद पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान दावों, आपत्तियों और नए पंजीकरण से जुड़े मामलों पर विचार किया गया।

अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 2,01,00,727 हो गई। इस प्रकार ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में 7,06,292 मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हुई, जो लगभग 3.64 प्रतिशत है।

इस वृद्धि से स्पष्ट होता है कि SIR केवल नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं थी। इसमें पात्र मतदाताओं को शामिल करने और मतदाता रिकॉर्ड को संशोधित करने का काम भी किया गया।

मतदाता सूची की तैयारी के दौरान ड्राफ्ट सूची प्रकाशित करना इसलिए महत्वपूर्ण होता है, ताकि नागरिक अपने विवरण देख सकें और किसी गलती या छूटे हुए नाम के संबंध में दावा कर सकें। इसके बाद प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों पर निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

अंतिम सूची जारी होने के बाद भी पात्र नागरिकों के लिए नाम जुड़वाने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हो जाती। निर्धारित नियमों के तहत आवेदन किया जा सकता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं था या अंतिम सूची में भी नहीं दिख रहा है, तो उसे अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन करने की प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।

पंजाब में कितने पोलिंग स्टेशन बनाए गए?

मतदाता सूची के पुनरीक्षण के साथ पंजाब में मतदान केंद्रों की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में पोलिंग स्टेशनों की संख्या 24,453 से बढ़ाकर 25,332 कर दी गई है।

मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य मतदाताओं के लिए मतदान की सुविधा बेहतर बनाना है। मतदान केंद्रों का निर्धारण करते समय मतदाताओं की संख्या, भौगोलिक स्थिति और मतदान तक पहुंच जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है।

यदि किसी क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या अधिक हो या मतदान केंद्र तक पहुंचने में लोगों को परेशानी होती हो, तो केंद्रों के पुनर्गठन की जरूरत पड़ सकती है। इसी कारण चुनाव अधिकारी मतदान केंद्रों की संख्या और स्थान की समीक्षा करते हैं।

पंजाब में पोलिंग स्टेशनों की संख्या 24,453 से बढ़कर 25,332 होने का अर्थ है कि कुल 879 मतदान केंद्र बढ़ाए गए हैं। यह बदलाव राज्य के सभी जिलों में मतदान व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने के प्रयास का हिस्सा है।

हालांकि, किसी मतदाता को किस मतदान केंद्र पर वोट डालना है, इसकी पुष्टि उसकी मतदाता जानकारी और संबंधित चुनाव अधिकारी के रिकॉर्ड से ही करनी चाहिए। केवल यह मान लेना सही नहीं होगा कि मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ने के कारण हर मतदाता का बूथ बदल गया है।

पंजाब की अंतिम वोटर लिस्ट कहां देख सकते हैं?

अंतिम मतदाता सूची सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रकाशित की गई है। मतदाता इसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पंजाब की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। इसके अलावा, जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ERO) और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के कार्यालयों में भी सूची उपलब्ध कराई गई है।

मतदाता अपने नाम की स्थिति जांचने के लिए आधिकारिक चुनावी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऑनलाइन सूची देखने के दौरान राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र और संबंधित मतदान केंद्र की जानकारी चुननी पड़ सकती है।

नाम की जांच करते समय केवल अपना नाम देखकर संतुष्ट होने के बजाय अन्य विवरण भी मिलाना चाहिए। मतदाता को अपना नाम, परिवार के सदस्य का नाम, पता और उपलब्ध मतदाता पहचान संबंधी विवरण सही होने की पुष्टि करनी चाहिए।

यदि नाम सूची में दिखाई नहीं देता, तो सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि सही विधानसभा क्षेत्र और सही मतदान केंद्र की सूची देखी जा रही है या नहीं। कई बार पते में बदलाव या निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित जानकारी के कारण मतदाता को अपनी जानकारी खोजने में कठिनाई हो सकती है।

यदि सही विवरण खोजने के बाद भी नाम नहीं मिलता, तो संबंधित BLO या निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। पात्र नागरिकों को नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या करें?

यदि किसी पात्र नागरिक का नाम पंजाब की अंतिम मतदाता सूची में नहीं है, तो उसे घबराने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना चाहिए। चुनाव आयोग की व्यवस्था के अनुसार, पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए Form 6 भर सकते हैं।

यह आवेदन ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से किया जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन के लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक डिजिटल सेवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऑफलाइन आवेदन संबंधित बूथ लेवल अधिकारी या निर्धारित निर्वाचन कार्यालय में जमा किया जा सकता है।

आवेदन करते समय सही व्यक्तिगत जानकारी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना जरूरी है। आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। आवेदन स्वीकार होने के बाद संबंधित रिकॉर्ड में नाम शामिल किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

यदि किसी मतदाता का नाम पहले सूची में था, लेकिन अब नहीं दिख रहा है, तो उसे पहले संबंधित अधिकारी से यह जानकारी लेनी चाहिए कि नाम क्यों हटाया गया। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि उसे नया पंजीकरण कराना है, विवरण में सुधार करना है या किसी अन्य प्रक्रिया का पालन करना है।

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया के लिए केवल मतदाता पहचान पत्र होना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। मतदान की पात्रता और अंतिम सूची में नाम दर्ज होना महत्वपूर्ण है। इसलिए चुनाव से पहले नाम की स्थिति जांचना जरूरी है।

Form 6 क्या है और इसका इस्तेमाल कब किया जाता है?

Form 6 का इस्तेमाल पात्र नागरिकों द्वारा मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण करा रहा है या उसका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है, तो पात्रता के अनुसार इस फॉर्म के जरिए आवेदन किया जा सकता है।

आवेदन में निर्धारित व्यक्तिगत जानकारी, निवास और उम्र से संबंधित विवरण देने होते हैं। जरूरत के अनुसार दस्तावेज भी उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं। आवेदन जमा करने के बाद निर्वाचन अधिकारी उसकी जांच करते हैं और पात्रता के आधार पर फैसला लेते हैं।

यदि किसी व्यक्ति का नाम पहले से किसी दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज है और वह स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो गया है, तो उसे अपने मामले के अनुसार सही प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में पुराने और नए पते के रिकॉर्ड में बदलाव की जरूरत हो सकती है।

यदि किसी व्यक्ति का नाम गलती से हट गया है, तो उसे संबंधित चुनाव अधिकारी से संपर्क करके कारण और उचित आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। हर मामले में एक ही प्रक्रिया लागू हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए आधिकारिक निर्देशों का पालन करना सबसे बेहतर तरीका है।

क्या अंतिम सूची जारी होने के बाद भी नाम जुड़ सकता है?

अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी पात्र नागरिकों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने का विकल्प उपलब्ध रहता है। चुनाव आयोग की व्यवस्था के अनुसार, पात्र नागरिक Form 6 के जरिए आवेदन कर सकते हैं।

हालांकि, आवेदन करने और नाम वास्तव में सूची में शामिल होने के बीच अंतर है। आवेदन की जांच, पात्रता की पुष्टि और संबंधित निर्वाचन अधिकारी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नाम जोड़े जाने का निर्णय होता है।

यदि आगामी चुनाव में मतदान करना है, तो मतदाता को जल्द से जल्द अपनी स्थिति जांचनी चाहिए। आवेदन करने के बाद उसकी स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी है, ताकि किसी अतिरिक्त दस्तावेज या जानकारी की जरूरत होने पर समय रहते कदम उठाया जा सके।

यदि मतदाता का नाम सूची में है, लेकिन पता या अन्य विवरण गलत हैं, तो उसे संबंधित सुधार प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। केवल पुराने मतदाता पहचान पत्र पर निर्भर रहने के बजाय वर्तमान सूची में दर्ज जानकारी की पुष्टि करना बेहतर है।

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह सूची क्यों महत्वपूर्ण है?

पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। राज्य में कुल 117 विधानसभा सीटें हैं और इन्हीं सीटों के लिए मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण आधार है।

मतदाता सूची में सही नाम दर्ज होना किसी नागरिक के मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी है। यदि पात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो उसे मतदान के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए चुनाव से पहले मतदाता सूची की जांच करना सभी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक दलों के लिए भी मतदाता सूची महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि चुनावी क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या और वितरण से चुनाव की तैयारियों पर असर पड़ता है। हालांकि, मतदाता संख्या में बदलाव अपने आप में किसी पार्टी के चुनावी प्रदर्शन का संकेत नहीं है। मतदाता सूची में कमी या वृद्धि के आधार पर चुनाव परिणाम का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

SIR की प्रक्रिया के दौरान नामों की जांच और पात्र नए मतदाताओं को शामिल करने का उद्देश्य सूची को अधिक सटीक बनाना है। इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने का अवसर देना लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण है।

मतदाताओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

पंजाब की अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद हर मतदाता को कुछ बुनियादी बातों की जांच करनी चाहिए।

सबसे पहले, आधिकारिक सूची में अपना नाम खोजें। यदि नाम मौजूद है, तो अपना पता और अन्य उपलब्ध विवरण भी जांच लें। यदि नाम नहीं है, तो संबंधित BLO या निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से संपर्क करके स्थिति स्पष्ट करें।

दूसरा, यदि आप हाल ही में किसी दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से स्थानांतरित हुए हैं, तो अपने पते और निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित जानकारी अपडेट कराएं। तीसरा, यदि आपका नाम हटाया गया है और आप इसके कारण से सहमत नहीं हैं, तो संबंधित अधिकारी से कारण और उपलब्ध उपायों के बारे में जानकारी लें।

चौथा, यदि आप पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहते हैं, तो पात्रता की पुष्टि करके Form 6 के माध्यम से आवेदन करें। आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति जांचते रहें।

पांचवां, मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक चुनावी माध्यमों पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर प्रसारित अधूरी या गलत जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष न निकालें कि किसी खास व्यक्ति या पूरे समुदाय के नाम जानबूझकर हटाए गए हैं। ऐसे दावों की जांच संबंधित रिकॉर्ड और आधिकारिक जानकारी से की जानी चाहिए।

निष्कर्ष: 2.01 करोड़ मतदाताओं के साथ पंजाब की अंतिम सूची जारी

पंजाब में SIR के बाद 12 अक्टूबर 2026 को सभी 117 विधानसभा सीटों की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। अंतिम सूची में कुल 2,01,00,727 मतदाता दर्ज हैं। पुनरीक्षण शुरू होने से पहले के 2,14,61,043 मतदाताओं के मुकाबले यह संख्या 13,60,316 कम है।

इस प्रक्रिया के दौरान 7,97,263 नए मतदाताओं को जोड़ा गया। वहीं, जांच के बाद 86,038 मतदाताओं को अयोग्य घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। अंतिम सूची में 1,03,76,026 पुरुष, 97,24,195 महिला और 506 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या 3.64 प्रतिशत बढ़ी है। इससे स्पष्ट है कि SIR के दौरान नाम हटाने के साथ पात्र मतदाताओं को शामिल करने का काम भी हुआ।

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सबसे जरूरी कदम यह है कि हर पात्र नागरिक अपने नाम की स्थिति की जांच करे। यदि नाम सूची में नहीं है, तो Form 6 के जरिए आवेदन करने और संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करने का विकल्प उपलब्ध है। सही मतदाता सूची और पात्र नागरिकों की भागीदारी स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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