
पंजाब बंद के दौरान मानसा में तंबाकू-सिगरेट की दुकान पर हंगामा, प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर फेंका सामान, झोटा हत्याकांड से जुड़ा है विरोध
पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। हत्या के विरोध में बुलाए गए पंजाब बंद के दौरान मानसा में उस समय तनाव बढ़ गया, जब प्रदर्शनकारियों ने तंबाकू और सिगरेट बेचने वाली एक दुकान को खुला देखा। रिपोर्टों के अनुसार, दुकान पर मौजूद सामान को बाहर निकालकर सड़क पर फेंका गया और तंबाकू बेचने वाली एक दुकान को आग के हवाले भी कर दिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब झोटा की हत्या को लेकर उनके समर्थक, परिवार और विभिन्न सामाजिक संगठन आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
मानसा में बंद का असर बाजारों, दुकानों और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर दिखाई दिया। पंजाब के दूसरे शहरों में भी कई जगह बाजार बंद रहे और प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। झोटा के परिवार ने मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जांच कराने, मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे तथा अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने पोस्टमार्टम को लेकर भी मांग रखी और शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में 13 अक्टूबर 2026 को मानसा के एक व्यस्त बाजार में परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या की घटना है। पुलिस ने केमिस्ट अश्वनी कुमार को मुख्य आरोपी बताया और उसे राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी। शुरुआती पुलिस जांच में व्यक्तिगत रंजिश के पहलू की भी पड़ताल की गई। वहीं, झोटा के परिवार और समर्थकों ने हत्या के पीछे की परिस्थितियों की व्यापक जांच की मांग उठाई।
बंद के दौरान दुकान पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि नशे के खिलाफ आंदोलन के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना कितना जरूरी है। झोटा के समर्थक उनकी हत्या को नशे के कारोबार के खिलाफ संघर्ष से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि पुलिस हत्या के पीछे के कारणों और सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। विरोध के दौरान किसी दुकान पर हमला या सामान को नुकसान पहुंचाने की घटना को भी कानून के तहत अलग से देखा जाना जरूरी है।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद क्यों भड़का गुस्सा?
परविंदर सिंह झोटा मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। वह कथित तौर पर नशीले पदार्थों और दवाओं की गैरकानूनी बिक्री के खिलाफ अभियान चलाते थे। 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और उनके समर्थकों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना से पहले झोटा और केमिस्ट अश्वनी कुमार के बीच विवाद हुआ था। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में व्यक्तिगत रंजिश के पहलू की भी बात कही थी। बताया गया कि झोटा और आरोपी के बीच पहले भी विवाद हुआ था और पुराने घटनाक्रम की जांच की जा रही थी। हालांकि, हत्या के पीछे के सभी कारणों और संभावित भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही हो सकता है।
झोटा की हत्या के बाद उनके परिवार ने प्रशासन पर दबाव बनाया कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। परिवार का कहना है कि मामले में केवल मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि कहीं इस घटना में अन्य लोग शामिल तो नहीं थे।
इसी मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। मानसा में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और प्रशासन से जवाब मांगा। धीरे-धीरे यह विरोध राज्यव्यापी बंद की मांग तक पहुंच गया। विभिन्न राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने भी बंद के आह्वान का समर्थन किया।
बंद के दौरान तंबाकू-सिगरेट की दुकान पर क्यों हुआ विवाद?
पंजाब बंद के दौरान मानसा में दुकानों और बाजारों को बंद रखने की अपील की जा रही थी। प्रदर्शनकारी अलग-अलग इलाकों में जाकर व्यापारियों से दुकानें बंद रखने का आग्रह कर रहे थे। इसी दौरान तंबाकू और सिगरेट बेचने वाली एक दुकान खुली दिखाई दी, जिसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने नाराजगी जताई।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने दुकान में रखा सामान बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया। एक अन्य रिपोर्ट में तंबाकू बेचने वाले कियोस्क को आग लगाए जाने की जानकारी दी गई। इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण माहौल को और गंभीर बना दिया।
प्रदर्शनकारियों की नाराजगी को झोटा के नशे के खिलाफ अभियान और उनकी हत्या के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है। झोटा के समर्थकों का मानना है कि नशे से जुड़े कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, तंबाकू और सिगरेट की बिक्री को लेकर किसी दुकान पर सामान फेंकना या उसे नुकसान पहुंचाना अलग मामला है। किसी व्यक्ति या समूह की मांग चाहे जो भी हो, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून अपने हाथ में लेने की कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही देखा जाना चाहिए।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि तंबाकू और सिगरेट की बिक्री, नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री और प्रतिबंधित पदार्थों के कारोबार के कानूनी पहलू अलग-अलग हो सकते हैं। केवल किसी दुकान पर तंबाकू या सिगरेट बिकने से यह साबित नहीं होता कि वहां प्रतिबंधित नशीले पदार्थ भी बेचे जा रहे थे। इस घटना में दुकान को लेकर प्रदर्शनकारियों की नाराजगी का पूरा आधार और संबंधित आरोप अलग से प्रमाणित होना जरूरी है।
मानसा में लगातार तीसरे दिन बंद का असर
झोटा की हत्या के बाद मानसा में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहे। स्थानीय बाजार कई दिनों तक प्रभावित हुए और दुकानदारों ने बंद के दौरान कारोबार नहीं किया। 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया, जिसका असर राज्य के अनेक जिलों में देखा गया। कई जगह दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि कुछ स्थानों पर सड़कें भी बाधित हुईं।
मानसा में बाजार पहले से ही विरोध के कारण बंद थे। झोटा के समर्थक अस्पताल के बाहर भी एकत्र हुए, जहां उनका शव रखा गया था। परिवार की मांग थी कि हत्या की जांच व्यापक स्तर पर कराई जाए और जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाई जाए।
राज्य के अन्य हिस्सों में भी बंद का असर दिखाई दिया। रिपोर्टों के अनुसार, अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, होशियारपुर, फिरोजपुर, संगरूर, बरनाला, मोगा और पटियाला जैसे शहरों में बाजारों तथा कुछ शिक्षण संस्थानों पर असर पड़ा। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने दुकानदारों से बंद में शामिल होने की अपील की।
हालांकि, पूरे राज्य में स्थिति एक जैसी नहीं रही। कुछ इलाकों में बंद का व्यापक असर था, जबकि कुछ जगह बाजार बाद में खुलने लगे। मानसा में भी शुक्रवार, 16 अक्टूबर को बाजारों के दोबारा खुलने की खबर आई, लेकिन तनाव और विरोध प्रदर्शन पूरी तरह समाप्त नहीं हुए थे।
परिवार की मांग: CBI जांच और वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई
परविंदर सिंह झोटा के परिवार ने हत्या की जांच को लेकर कई मांगें रखीं। परिवार ने CBI से जांच कराने की मांग की और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे की मांग भी उठाई। परिवार का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी संभावित साजिश या अन्य व्यक्ति की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
परिवार ने पोस्टमार्टम चंडीगढ़ के PGIMER में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल से कराने की मांग भी की। इसके अलावा, उन्होंने मानसा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित थाने के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इन मांगों को लेकर परिवार और समर्थकों ने प्रशासन पर दबाव बनाए रखा।
झोटा के पिता भीम सिंह ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। शव का अंतिम संस्कार रोकने का निर्णय विरोध का प्रमुख हिस्सा बन गया और इसने प्रशासन के सामने मामले को जल्द सुलझाने की चुनौती बढ़ा दी।
पुलिस और प्रशासन की ओर से मामले की जांच जारी होने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कहा कि हत्या में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
हालांकि, परिवार की सभी मांगों को स्वीकार किए जाने या CBI जांच सौंपे जाने की पुष्टि शुरुआती रिपोर्टों में नहीं थी। इसलिए इन मांगों और प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को अलग-अलग समझना जरूरी है।
मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार की गिरफ्तारी
पुलिस ने केमिस्ट अश्वनी कुमार को परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बताया। रिपोर्टों के अनुसार, उसे राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे पंजाब लाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में झोटा और अश्वनी कुमार के बीच व्यक्तिगत रंजिश का पहलू सामने आया। अधिकारियों ने बताया कि दोनों के बीच पहले भी विवाद हुआ था और पुराने मामले की परिस्थितियों को जांच में शामिल किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के समय झोटा सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण कर रहे थे और घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद मानसा में गुस्सा बढ़ गया।
झोटा के समर्थकों का कहना है कि वह नशे के खिलाफ आवाज उठाते थे और उनकी हत्या की व्यापक जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, पुलिस ने शुरुआती तौर पर व्यक्तिगत रंजिश के पहलू की जांच की बात कही। दोनों बातों में अंतर है: झोटा का नशे के खिलाफ काम करना उनके सार्वजनिक जीवन का हिस्सा था, जबकि हत्या का वास्तविक मकसद और आरोपियों की भूमिका जांच से तय होगी।
अश्वनी कुमार की गिरफ्तारी के बावजूद परिवार ने मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच की मांग जारी रखी। पुलिस ने भी कहा कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी की दुकान और मकान पर कार्रवाई से बढ़ा तनाव
झोटा की हत्या के बाद गुस्साए लोगों ने अश्वनी कुमार की मेडिकल दुकान को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ ने दुकान को नुकसान पहुंचाया और उसमें आग लगा दी। दुकान से फर्नीचर बाहर निकालकर सड़क पर फेंकने तथा उसे जलाने की जानकारी भी सामने आई।
इसके बाद प्रशासन ने अश्वनी कुमार के मकान के एक हिस्से को गिराया। अधिकारियों ने कथित तौर पर अवैध निर्माण का हवाला दिया था। इस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे, क्योंकि हत्या की जांच और किसी संपत्ति के निर्माण संबंधी नियमों का उल्लंघन दो अलग-अलग कानूनी मुद्दे हैं।
किसी आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज होना अपने आप में उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उसे बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के गिराने का आधार नहीं बनता। यदि किसी भवन में अवैध निर्माण की शिकायत है, तो संबंधित प्रशासन को लागू नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करनी होती है। इस तरह की कार्रवाई की वैधता का आकलन उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए।
मानसा में दुकान पर हमले और आगजनी के बाद पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई। प्रशासन के सामने एक ओर हत्या की जांच और परिवार की मांगों पर काम करने की चुनौती थी, तो दूसरी ओर विरोध के दौरान हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को रोकना भी जरूरी था।
तंबाकू कियोस्क में आगजनी के बाद बढ़ी चिंता
16 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मानसा में तंबाकू बेचने वाले एक कियोस्क को आग के हवाले किए जाने की घटना ने तनाव और बढ़ा दिया। यह घटना झोटा हत्याकांड के विरोध के बीच हुई। रिपोर्टों में बताया गया कि लगातार कई दिनों तक बाजार बंद रहने के बाद शुक्रवार को कुछ दुकानें फिर खुलने लगीं, लेकिन लोगों में असुरक्षा की भावना बनी हुई थी।
आगजनी की घटना के बाद स्थानीय कारोबारियों के लिए सुरक्षा का सवाल महत्वपूर्ण हो गया। किसी भी बंद या विरोध प्रदर्शन के दौरान दुकानदारों पर दुकान बंद करने का दबाव, सामान को नुकसान पहुंचाना या आग लगाना सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इससे न केवल व्यापारियों को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है।
यह भी जरूरी है कि विरोध के दौरान किसी दुकान को निशाना बनाने से पहले संबंधित आरोपों की पुष्टि हो। अगर किसी कारोबारी पर गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने का संदेह है, तो उसकी जांच पुलिस और संबंधित विभागों को करनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों द्वारा खुद कार्रवाई करने से गलत पहचान, संपत्ति को नुकसान और हिंसा का खतरा बढ़ सकता है।
मानसा में तंबाकू कियोस्क को निशाना बनाए जाने की घटना इसी वजह से महत्वपूर्ण है। यह दिखाती है कि हत्या के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन कई स्तरों पर कानून-व्यवस्था की चुनौती बन गया। प्रशासन को हत्या के मामले में न्याय सुनिश्चित करने के साथ-साथ हिंसा और आगजनी को रोकने के लिए भी कदम उठाने पड़ रहे हैं।
पंजाब बंद में राजनीतिक दलों और किसान संगठनों का समर्थन
झोटा की हत्या के विरोध में बुलाए गए पंजाब बंद को कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, भाजपा और अकाली दल वारिस पंजाब दे सहित विभिन्न विपक्षी समूहों ने बंद का समर्थन किया। किसान संगठनों और सरकारी कर्मचारी यूनियनों ने भी विरोध में भाग लिया या अपना समर्थन जताया।
विपक्षी दलों ने हत्या को लेकर राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था व्यवस्था पर सवाल उठाए। कुछ नेताओं ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले व्यक्ति की हत्या गंभीर चिंता का विषय है और सरकार को जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की ओर से कहा गया कि हत्या के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने पुलिस को जांच में तेजी लाने और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करने के निर्देश देने की बात कही।
राजनीतिक दलों के बयान इस मामले को राज्य की राजनीति में भी महत्वपूर्ण बना रहे हैं। हालांकि, हत्या की जांच के निष्कर्ष और कानून-व्यवस्था पर राजनीतिक आरोपों को अलग-अलग देखना चाहिए। किसी राजनीतिक दल की आलोचना या समर्थन अपने आप किसी आरोप को प्रमाणित नहीं करता।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती
मानसा में विरोध प्रदर्शन के दौरान दुकानों पर हमले, आगजनी और बाजार बंद रहने की घटनाओं ने पुलिस तथा प्रशासन के सामने चुनौती पैदा की। पुलिस को हत्या के मामले में साक्ष्य जुटाने और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा सुनिश्चित करनी थी।
रिपोर्टों के अनुसार, कई स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों और कार्रवाई समिति के प्रतिनिधियों से बातचीत भी की। बातचीत का उद्देश्य परिवार की मांगों, पोस्टमार्टम और जांच की प्रक्रिया को लेकर समाधान तलाशना था।