झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र 25-26 नवंबर को, MMDR संशोधन और मतदाता सूची के SIR पर होगी चर्चा

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झारखंड विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र 25 और 26 नवंबर को, MMDR एक्ट और SIR पर होगी चर्चा

झारखंड की राजनीति में खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर 2026 को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह सत्र 25 और 26 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम यानी MMDR एक्ट और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा किए जाने की योजना है।

कैबिनेट की बैठक में कुल 62 प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। विशेष सत्र का फैसला ऐसे समय में आया है, जब खनिज संपन्न राज्यों के अधिकारों, खनन से होने वाली आय और चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं की भागीदारी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा चल रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैबिनेट बैठक के बाद संकेत दिया कि SIR और संशोधित MMDR कानून सहित कई विषयों पर विधानसभा में विस्तार से विचार करने की आवश्यकता है। सरकार का उद्देश्य इन मुद्दों पर अपना पक्ष सदन के सामने रखना और आगे की कार्रवाई के संबंध में निर्णय लेना है। हालांकि, विशेष सत्र में पेश किए जाने वाले प्रस्तावों की अंतिम रूपरेखा और कार्यसूची के सभी विवरण अलग से स्पष्ट होने बाकी हैं।

25 और 26 नवंबर को आयोजित होगा विशेष सत्र

झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव पर सहमति बनी। इसके अनुसार, सदन की बैठक 25 और 26 नवंबर 2026 को होगी। यह दो दिवसीय सत्र सामान्य विधायी कामकाज के अतिरिक्त कुछ खास मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बुलाया जा रहा है।

विशेष सत्र का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि इसमें राज्य के आर्थिक हितों और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर चर्चा की जाएगी। MMDR संशोधन का संबंध खनिज संसाधनों के नियमन और खनिजयुक्त भूमि से जुड़े अधिकारों से है, जबकि SIR का संबंध मतदाता सूची की जांच और उसके पुनरीक्षण की प्रक्रिया से है।

दोनों विषयों का स्वरूप अलग है, लेकिन राज्य सरकार ने इन्हें विधानसभा में चर्चा योग्य महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में रखा है। एक ओर खनिज संपदा से जुड़े राजस्व और अधिकारों का सवाल है, वहीं दूसरी ओर मतदाता सूची की शुद्धता, दस्तावेजों की उपलब्धता और पात्र नागरिकों के नाम दर्ज रहने जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं।

विधानसभा का विशेष सत्र राज्य सरकार को सदन में अपना पक्ष रखने और विधायकों के माध्यम से इन मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर देगा। यदि किसी विषय पर प्रस्ताव लाया जाता है, तो उस पर विचार और मतदान की प्रक्रिया विधानसभा के नियमों के अनुसार होगी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद विशेष सत्र को लेकर जानकारी सामने आई। मुख्यमंत्री ने SIR को देश का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए कहा कि इस पर चर्चा की जरूरत है। उन्होंने संशोधित MMDR कानून और अन्य विषयों को भी विशेष सत्र बुलाने की वजहों में शामिल किया।

सरकार का रुख यह संकेत देता है कि वह इन मामलों पर विधानसभा के माध्यम से अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहती है। SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से भी सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, खनिज संपन्न राज्यों में खनन से मिलने वाले राजस्व और राज्यों के अधिकारों का विषय लंबे समय से चर्चा में रहा है।

मुख्यमंत्री के बयान का अर्थ यह है कि राज्य सरकार इन मुद्दों को केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं, बल्कि विधानसभा के मंच पर भी उठाना चाहती है। हालांकि, किसी प्रस्ताव के पारित होने या उसके बाद केंद्र सरकार की ओर से कोई कदम उठाए जाने की स्थिति अभी भविष्य की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

विशेष सत्र के दौरान सदन में होने वाली चर्चा से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकार किन बिंदुओं पर अपना पक्ष रखती है और किन मांगों को औपचारिक प्रस्ताव का हिस्सा बनाने की कोशिश करती है।

MMDR एक्ट क्या है और विवाद किस बात पर है?

MMDR का पूरा नाम Mines and Minerals (Development and Regulation) Act है। हिंदी में इसे खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम कहा जाता है। यह कानून देश में खनिज संसाधनों के विकास और नियमन से संबंधित कानूनी ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

खनिजों का महत्व झारखंड जैसे राज्यों के लिए विशेष है, जहां कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज संसाधन आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। खनन से रोजगार, औद्योगिक उत्पादन और सरकारी राजस्व के अवसर पैदा होते हैं। इसके साथ ही खनन क्षेत्रों में पर्यावरण, भूमि, विस्थापन और स्थानीय समुदायों के हितों से संबंधित सवाल भी उठते हैं।

MMDR कानून में किए गए संशोधनों को लेकर झारखंड सरकार की चिंता राज्य के खनिज संसाधनों और उनसे जुड़े राजस्व अधिकारों पर केंद्रित है। राज्य सरकार का तर्क है कि संशोधित प्रावधानों का असर खनिजयुक्त भूमि पर लगाए जाने वाले करों या उपकरों और राज्य की आय पर पड़ सकता है।

इस विषय पर केंद्र और राज्य के अधिकारों की सीमा, कानून के प्रावधानों की व्याख्या तथा खनिज संपदा से जुड़े आर्थिक हित महत्वपूर्ण होंगे। विशेष सत्र में इन पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी कानून के प्रभाव को लेकर राज्य सरकार की आपत्ति और कानून की कानूनी वैधता दो अलग-अलग प्रश्न हैं। सरकार की आशंकाओं का अंतिम समाधान विधायी प्रक्रिया, कानूनी व्याख्या और जरूरत पड़ने पर न्यायिक समीक्षा के माध्यम से हो सकता है।

झारखंड को खनिज राजस्व की चिंता क्यों?

झारखंड देश के खनिज संपन्न राज्यों में शामिल है। यहां खनन गतिविधियां राज्य की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक उत्पादन और सरकारी आय से जुड़ी हुई हैं। खनिजों के उत्खनन और उनसे संबंधित गतिविधियों से राज्य को विभिन्न प्रकार के राजस्व प्राप्त होते हैं। इस कारण खनिज संसाधनों से जुड़े कानूनों में बदलाव का असर राज्य की वित्तीय योजनाओं पर पड़ सकता है।

राज्य सरकार की चिंता यह है कि MMDR संशोधन से खनिजयुक्त भूमि पर कर या उपकर लगाने की उसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। यदि राज्य के राजस्व अधिकार सीमित होते हैं, तो सरकार के अनुसार इससे आर्थिक संसाधनों और विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध धन पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, इस प्रभाव का वास्तविक आकार संबंधित कानूनी प्रावधानों, राजस्व के स्रोतों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। किसी निश्चित रकम के नुकसान का निष्कर्ष निकालने के लिए विस्तृत वित्तीय आकलन और आधिकारिक आंकड़ों की जरूरत होती है।

खनिज राजस्व पर चर्चा केवल सरकारी आय तक सीमित नहीं है। खनन से प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और अन्य सुविधाओं की जरूरतें भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए खनिज संसाधनों से प्राप्त धन का उपयोग किस तरह किया जाता है और स्थानीय आबादी को उसका कितना लाभ मिलता है, यह भी व्यापक बहस का हिस्सा है।

विशेष सत्र में यदि सरकार MMDR संशोधन पर औपचारिक प्रस्ताव लाती है, तो राज्य के वित्तीय हितों, संवैधानिक अधिकारों और खनिज क्षेत्रों की जरूरतों को लेकर उसके तर्क सामने आ सकते हैं।

राज्य और केंद्र के अधिकारों पर बहस

MMDR संशोधन का मुद्दा केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अधिकारों की सीमा से भी जुड़ा है। खनिज संसाधनों का नियमन राष्ट्रीय कानूनों के अंतर्गत होता है, जबकि राज्यों की प्रशासनिक जिम्मेदारियां और राजस्व संबंधी हित भी महत्वपूर्ण हैं।

ऐसी परिस्थितियों में किसी कानून में बदलाव को लेकर राज्य सरकार की आपत्ति होने पर यह सवाल उठता है कि संबंधित प्रावधानों का प्रभाव राज्य की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों पर कितना पड़ता है। इस तरह के प्रश्नों का उत्तर केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि कानून के पाठ, संवैधानिक व्यवस्था और न्यायिक व्याख्या के आधार पर निर्धारित होता है।

झारखंड सरकार ने MMDR संशोधन को लेकर अपनी चिंता जताई है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पहले इस कानून को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की मंशा भी व्यक्त कर चुके हैं। हालांकि, किसी कानूनी चुनौती की घोषणा और अदालत में मामला दाखिल होने या उस पर फैसला आने के बीच अंतर होता है।

इसलिए यह कहना उचित होगा कि MMDR संशोधन पर झारखंड सरकार की आपत्ति और संभावित कानूनी कार्रवाई चर्चा का हिस्सा हैं। आगे की स्थिति संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

विधानसभा का विशेष सत्र इस बहस को राज्य के विधायी मंच पर लाने का अवसर प्रदान करेगा। सदन में प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में उसका राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व हो सकता है, लेकिन उसका कानूनी प्रभाव प्रस्ताव की भाषा और संबंधित कानूनों पर निर्भर करेगा।

SIR क्या है और इस पर चर्चा क्यों जरूरी मानी जा रही है?

SIR यानी Special Intensive Revision का हिंदी अर्थ मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसका उद्देश्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की समीक्षा करना और उसमें पात्र मतदाताओं के नाम तथा संबंधित विवरणों की जांच करना होता है।

मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा है। चुनाव में मतदान का अधिकार इस्तेमाल करने के लिए पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी है। इसलिए सूची में नामों की शुद्धता, नए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण, गलत प्रविष्टियों का सुधार और अपात्र प्रविष्टियों की जांच महत्वपूर्ण विषय हैं।

दूसरी ओर, पुनरीक्षण की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि पात्र मतदाता केवल दस्तावेजों या प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण अपने अधिकार से वंचित न हों। खासकर उन लोगों के लिए यह विषय महत्वपूर्ण हो सकता है जिनके पास पुराने रिकॉर्ड या जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में SIR पर चर्चा इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकती है। राज्य सरकार और संबंधित विधायकों के सामने यह सवाल होगा कि मतदाता सूची की जांच की प्रक्रिया किस तरह लागू की जा रही है और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए किन पहलुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

हालांकि, SIR की वास्तविक प्रक्रिया और दस्तावेजों से संबंधित आवश्यकताएं संबंधित निर्वाचन प्राधिकरण के आधिकारिक निर्देशों से निर्धारित होती हैं। इसलिए किसी विशेष दस्तावेज की जरूरत, समयसीमा या पात्रता संबंधी नियमों को लेकर अंतिम जानकारी आधिकारिक अधिसूचनाओं से ही प्राप्त की जानी चाहिए।

SIR पर विपक्ष की आपत्तियां

SIR को लेकर विपक्षी दलों ने विभिन्न राज्यों में सवाल उठाए हैं। उनकी प्रमुख चिंताओं में यह शामिल है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज जुटाने में कठिनाई का सामना करने वाले नागरिकों के नाम प्रभावित न हों।

झारखंड जैसे राज्य में आदिवासी और ग्रामीण आबादी की बड़ी मौजूदगी के कारण दस्तावेजों की उपलब्धता, पुराने रिकॉर्ड और नागरिकों तक प्रशासनिक सुविधाओं की पहुंच जैसे विषय चर्चा में आ सकते हैं। हालांकि, इन आशंकाओं को किसी विशेष व्यक्ति या समुदाय के मतदाता अधिकारों के उल्लंघन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसे निष्कर्ष के लिए सत्यापित आंकड़ों और संबंधित मामलों की जांच आवश्यक है।

राज्य सरकार ने SIR को विशेष सत्र में चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा माना है। इस चर्चा में प्रक्रिया की पारदर्शिता, पात्र मतदाताओं की पहचान, दस्तावेजी कठिनाइयों और शिकायतों के निवारण जैसे विषय उठाए जा सकते हैं।

निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए दो बातें महत्वपूर्ण हैं। पहली, मतदाता सूची में गलतियों को दूर करने की प्रभावी व्यवस्था हो। दूसरी, पात्र नागरिकों को उचित प्रक्रिया और उपलब्ध कानूनी उपायों के माध्यम से अपना नाम दर्ज कराने या किसी गलती को ठीक कराने का अवसर मिले।

विशेष सत्र में इन मुद्दों पर सरकार का पक्ष और विधायकों के विचार सामने आ सकते हैं। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि विधानसभा किसी औपचारिक प्रस्ताव या अन्य कदम के माध्यम से क्या रुख अपनाती है।

क्या विशेष सत्र में प्रस्ताव पारित किए जाएंगे?

विशेष सत्र बुलाने के फैसले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या MMDR संशोधन और SIR पर विधानसभा में प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। उपलब्ध रिपोर्टों में इन मुद्दों पर चर्चा की योजना का उल्लेख है। कुछ रिपोर्टों में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी की बात भी कही गई है।

फिर भी, अंतिम कार्यसूची, प्रस्तावों का पूरा पाठ और सदन में उनकी प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आने तक इन्हें संभावित कदम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

विधानसभा में किसी प्रस्ताव को प्रस्तुत करना, उस पर चर्चा करना और उसे पारित करना अलग-अलग चरण हैं। सदन के नियमों के अनुसार प्रस्ताव पर विचार, संशोधन और मतदान की प्रक्रिया हो सकती है। प्रस्ताव पारित होने के बाद उसे संबंधित प्राधिकरण या केंद्र सरकार को भेजे जाने की स्थिति भी प्रस्ताव की प्रकृति और सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगी।

यदि विधानसभा MMDR संशोधन पर आपत्ति जताने वाला प्रस्ताव पारित करती है, तो उससे राज्य सरकार का आधिकारिक रुख स्पष्ट हो सकता है। इसी तरह SIR पर प्रस्ताव पारित होने से मतदाता सूची की प्रक्रिया के बारे में राज्य विधानसभा की चिंताएं औपचारिक रूप ले सकती हैं।

हालांकि, विधानसभा का प्रस्ताव अपने आप में केंद्रीय कानून को निरस्त नहीं करता। किसी केंद्रीय कानून की वैधता या उसमें बदलाव का प्रश्न संबंधित विधायी और न्यायिक प्रक्रियाओं के अधीन होता है।

कैबिनेट बैठक में 62 प्रस्तावों को मंजूरी

विशेष सत्र के फैसले के अलावा 27 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में कुल 62 प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इन प्रस्तावों में प्रशासन, स्वास्थ्य, खनन, शिक्षा और अन्य विकास संबंधी विषय शामिल बताए गए हैं।

बैठक में झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट, 2024 में संशोधन और झारखंड मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड ब्लॉक डेवलपमेंट पॉलिसी, 2026 को मंजूरी दिए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। इन फैसलों का संबंध राज्य में खनिज संसाधनों के नियमन और खनिज ब्लॉकों के विकास से है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में जमशेदपुर स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 500 बिस्तरों वाले नए अस्पताल भवन के निर्माण के लिए 545 करोड़ रुपये की मंजूरी की खबर सामने आई है। इसके अलावा प्रस्तावित झारखंड मेडिसिटी के विकास के लिए 284 करोड़ रुपये की स्वीकृति की जानकारी भी दी गई है।

शिक्षा और छात्र कल्याण से संबंधित फैसलों में सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्वास्थ्य एवं कल्याण इकाइयों की स्थापना का विषय शामिल बताया गया है। इन इकाइयों के माध्यम से प्राथमिक उपचार, आपात सहायता और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थियों को कौशल विकास और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने के लिए सरकारी टूल रूम में इंटर्नशिप के अवसर देने का फैसला भी रिपोर्टों में उल्लेखित है।

इन अन्य फैसलों का विवरण विशेष सत्र के मुख्य एजेंडे से अलग है, लेकिन इससे पता चलता है कि कैबिनेट की बैठक में कई विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर एक साथ विचार किया गया।

स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े फैसले भी महत्वपूर्ण

कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावों पर भी ध्यान दिया गया। जमशेदपुर के मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नए 500-बेड भवन के निर्माण के लिए स्वीकृत राशि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जुड़ी है। वहीं, प्रस्तावित मेडिसिटी के लिए मंजूर धनराशि का उद्देश्य बड़े स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं के विकास से संबंधित बताया गया है।

इन परियोजनाओं का वास्तविक लाभ उनके निर्माण, संचालन, चिकित्सा कर्मचारियों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा। केवल बजट स्वीकृति से परियोजना पूरी होने या सभी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध हो जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्वास्थ्य एवं कल्याण इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव भी छात्र समुदाय के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। उच्च शिक्षण संस्थानों में प्राथमिक उपचार और आपात सहायता की व्यवस्था होने से छात्रों को परिसर के भीतर बुनियादी सहायता मिल सकती है। मानसिक स्वास्थ्य परामर्श की सुविधा विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखने की दिशा में एक कदम हो सकती है।

इसके साथ संस्थानों के बजट का एक हिस्सा स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निर्धारित करने की बात सामने आई है। इस व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप, लागू होने की समयसीमा और संस्थानवार क्रियान्वयन संबंधित सरकारी आदेशों से स्पष्ट होगा।

इन फैसलों का विशेष सत्र से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन वे 27 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक के व्यापक एजेंडे का हिस्सा रहे।

आगे की नजर 25 और 26 नवंबर की बैठक पर

अब झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों में विधानसभा के विशेष सत्र पर ध्यान रहेगा। 25 और 26 नवंबर को होने वाले सत्र में MMDR संशोधन और SIR जैसे विषयों पर चर्चा की योजना है। इन मुद्दों पर सदन में होने वाली बहस से राज्य सरकार का रुख अधिक स्पष्ट हो सकता है।

MMDR के मामले में मुख्य सवाल खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों, राज्य के राजस्व और संशोधित कानूनी प्रावधानों के प्रभाव का होगा। वहीं SIR के मामले में मतदाता सूची की समीक्षा, दस्तावेजों की उपलब्धता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

सत्र के दौरान यदि प्रस्ताव लाए जाते हैं, तो उनकी भाषा और दायरे को समझना जरूरी होगा। किसी प्रस्ताव के पारित होने के बाद भी आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ने दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 25 और 26 नवंबर को होने वाली बैठक राज्य के खनिज हितों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर बहस का महत्वपूर्ण मंच बन सकती है। अंतिम एजेंडा और सदन में लिए जाने वाले फैसलों से ही यह स्पष्ट होगा कि इन दोनों मुद्दों पर झारखंड विधानसभा किस प्रकार आगे बढ़ती है।

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