लैंसडौन वन प्रभाग में वन विभाग पर सवाल, लालढांग रेंज के गोदाम से पांच हाथी दांत चोरी

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लैंसडौन वन प्रभाग में वन विभाग पर सवाल, लालढांग रेंज के गोदाम से पांच हाथी दांत चोरी

उत्तराखंड के लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज के भंडार से पांच हाथी दांत गायब होने का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज हाथी दांतों और गोदाम में मौजूद सामग्री का मिलान करने पर पांच दांत कम पाए गए। इनका कुल वजन लगभग 35.045 किलोग्राम बताया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने विभागीय जांच शुरू कर दी है। साथ ही पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। शुरुआती जांच में सरकारी भंडार में रखे संरक्षित वन्यजीव अंगों की सुरक्षा, रिकॉर्ड रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है तथा विभागीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि हाथी दांत वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित वन्यजीव संपत्ति हैं। इनकी अवैध खरीद-फरोख्त और तस्करी पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में सरकारी वन विभाग के स्टोर से हाथी दांतों का गायब होना विभागीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर से खुला मामला

लालढांग रेंज के भंडार में लंबे समय से हाथी दांत रखे हुए थे। वन विभाग के रिकॉर्ड में इनकी संख्या और वजन दर्ज था। हाल ही में विभागीय स्तर पर वन्यजीव अंगों के स्टॉक का सत्यापन किया गया। इसी प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा और मौके पर उपलब्ध हाथी दांतों में अंतर सामने आया।

सत्यापन के दौरान पता चला कि पंजिका में दर्ज 15 हाथी दांतों के मुकाबले गोदाम में केवल 10 दांत मौजूद थे। इस तरह पांच हाथी दांत कम पाए गए। रिकॉर्ड के अनुसार, गायब हाथी दांतों का कुल वजन 35.045 किलोग्राम है।

इस अंतर के सामने आने के बाद विभाग में हलचल मच गई। अधिकारियों ने गायब हाथी दांतों की तलाश शुरू की, लेकिन शुरुआती खोजबीन में उनका पता नहीं चल सका। इसके बाद मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्णय लिया गया।

31 अक्टूबर के सत्यापन में सामने आई कमी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 को किए गए सत्यापन के दौरान वन्यजीव अंगों के स्टॉक से संबंधित सी-17 पंजिका में दर्ज मात्रा और वास्तविक उपलब्धता का मिलान किया गया था। इसी जांच में पांच हाथी दांत कम पाए गए।

सी-17 पंजिका में वन्यजीव अंगों के भंडार से संबंधित विवरण दर्ज किया जाता है। इस रजिस्टर में दर्ज संख्या और वजन के आधार पर स्टॉक की स्थिति का पता लगाया जाता है। रिकॉर्ड और वास्तविक सामग्री में अंतर मिलने के बाद अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हाथी दांत आखिरी बार कब और किस स्थिति में मौजूद थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि स्टॉक का नियमित सत्यापन किस तरह किया जाता था और गायब सामग्री का पता पहले क्यों नहीं चला।

वन विभाग ने दर्ज कराई प्राथमिकी

हाथी दांतों की तलाश में सफलता नहीं मिलने के बाद वन विभाग की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। प्रारंभिक रूप से अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों के खिलाफ सरकारी संपत्ति की चोरी से संबंधित मामला दर्ज किया गया है।

प्राथमिकी में उल्लेख किया गया है कि हाथी दांत वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित वन्यजीव संपत्ति हैं। मामले की जांच पुलिस को सौंप दी गई है। पुलिस अब घटनास्थल का निरीक्षण, उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।

मामला पहले यमकेश्वर थाने में दर्ज किया गया था। बाद में क्षेत्राधिकार के आधार पर प्राथमिकी कोटद्वार कोतवाली में स्थानांतरित कर दी गई। पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने लालढांग रेंज कार्यालय का निरीक्षण कर प्रारंभिक जानकारी जुटाई है।

विभागीय जांच कमेटी ने शुरू की पूछताछ

वन विभाग ने मामले की आंतरिक जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध की अध्यक्षता में गठित कमेटी लालढांग पहुंची और संबंधित अधिकारियों तथा कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की।

कमेटी ने वन विभाग के रिकॉर्ड और स्टॉक से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि हाथी दांतों के गायब होने की घटना किस समय हुई और क्या इसमें किसी कर्मचारी की लापरवाही या अन्य भूमिका रही है।

विभागीय जांच में यह भी देखा जा रहा है कि गोदाम की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था थी, चाबियों और प्रवेश की जिम्मेदारी किसके पास थी तथा स्टॉक का सत्यापन कितनी नियमितता से किया जाता था। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला चोरी का है, रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी का है या किसी अन्य कारण से हाथी दांतों की उपलब्धता में अंतर आया।

एसडीओ, रेंजर और स्टोर इंचार्ज को नोटिस

मामले के सामने आने के बाद वन विभाग ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार, एसडीओ कोटद्वार, लालढांग रेंजर और स्टोर इंचार्ज को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

इन अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि स्टोर में रखे संरक्षित वन्यजीव अंगों की निगरानी और रिकॉर्ड मिलान की जिम्मेदारी किस तरह निभाई गई। नोटिस जारी होना अपने आप में किसी अधिकारी या कर्मचारी की दोषसिद्धि नहीं है। विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि जिस भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलाव भी किए जा सकते हैं।

स्टोर शिफ्ट होने की संभावना की भी जांच

मामले की शुरुआती जांच में यह संभावना भी सामने आई है कि हाल ही में लालढांग रेंज के स्टोर रूम को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया था। इस दौरान कुछ सामान भी शिफ्ट किया गया था। ऐसे में यह जांच की जा रही है कि कहीं हाथी दांतों को स्थानांतरण के दौरान किसी दूसरी जगह तो नहीं रख दिया गया।

हालांकि, अभी तक इस संभावना की पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने और रिकॉर्ड तथा वास्तविक सामग्री का पूरा मिलान होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

यदि हाथी दांत किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर रखे गए हों, तो उनका पता लगाने के लिए संबंधित स्थानों की जांच की जाएगी। वहीं, यदि चोरी की पुष्टि होती है, तो पुलिस और वन विभाग को आरोपियों की पहचान और बरामदगी के लिए आगे की कार्रवाई करनी होगी।

वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

वन विभाग का मुख्य दायित्व जंगलों, वन्यजीवों और संरक्षित प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करना है। ऐसे में विभाग के अपने रेंज कार्यालय के स्टोर से हाथी दांतों का गायब होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

रेंज कार्यालय वन विभाग की प्रशासनिक और मैदानी गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। यहां वन्यजीवों से जुड़े रिकॉर्ड, जब्त सामग्री और अन्य संवेदनशील दस्तावेज रखे जाते हैं। यदि ऐसे स्थान पर रखे संरक्षित वन्यजीव अंगों का स्टॉक सुरक्षित नहीं रह पाता, तो निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।

इस घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि स्टोर में रखी वन्यजीव संपत्ति की नियमित निगरानी कैसे की जाती थी और रिकॉर्ड में दर्ज वस्तुओं की भौतिक जांच कितनी बार होती थी। विभागीय जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इन्हीं सवालों के जवाब तलाशना है।

शासन ने वन मुख्यालय से रिपोर्ट मांगी

मामले के सामने आने के बाद शासन स्तर पर भी जानकारी मांगी गई है। वन मुख्यालय से रिपोर्ट तलब किए जाने की खबर है। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

वन विभाग की जांच में रिकॉर्ड, स्टोर की सुरक्षा, सामग्री के स्थानांतरण और संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारियों की समीक्षा की जा रही है। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि प्रशासनिक स्तर पर किन बदलावों की जरूरत है।

इस मामले का असर केवल लालढांग रेंज तक सीमित नहीं रह सकता। विभाग के अन्य कार्यालयों और भंडारों में रखे वन्यजीव अंगों के रिकॉर्ड तथा वास्तविक स्टॉक का मिलान भी महत्वपूर्ण हो सकता है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से मामला संवेदनशील

हाथी दांतों की अवैध तस्करी वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर खतरा मानी जाती है। हाथियों के दांतों की मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अवैध बाजार में इनकी खरीद-फरोख्त की कोशिशें होती रही हैं। इसी वजह से हाथी दांतों और अन्य संरक्षित वन्यजीव अंगों के कब्जे, परिवहन और व्यापार पर कानूनी प्रतिबंध हैं।

वन विभाग के पास प्राकृतिक रूप से मिले या कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए वन्यजीव अंगों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे अंगों का रिकॉर्ड रखना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि वे अवैध व्यापार के नेटवर्क तक न पहुंच सकें।

लालढांग रेंज से पांच हाथी दांत गायब होने का मामला इसी कारण गंभीर माना जा रहा है। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि दांतों का गायब होना किसी अनियमितता, सुरक्षा में चूक या सुनियोजित चोरी का परिणाम है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल वन विभाग और पुलिस दोनों स्तरों पर जांच जारी है। विभागीय कमेटी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ कर रही है, जबकि पुलिस घटनास्थल का निरीक्षण और प्राथमिकी के आधार पर जांच कर रही है।

जांच के प्रमुख सवाल हैं कि पांच हाथी दांत कब गायब हुए, उन्हें आखिरी बार किसने देखा, स्टोर में प्रवेश की व्यवस्था क्या थी, रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पहले क्यों नहीं पकड़ा गया और क्या किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है।

इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही चोरी की परिस्थितियों, संभावित जिम्मेदारियों और आगे की कानूनी कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। फिलहाल पांच हाथी दांतों की बरामदगी और विभागीय जवाबदेही तय करना जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

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